Mon. Dec 17th, 2018

करतार : गंगेश्कुमार मिश्र

करतार;
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कट्पट्-खट्, बाजै करतार;
सपना बेच रही, सरकार;
भएँ निकम्मा, सत्तासीन;
देशवा छिन्नभिन्न, कै दीन;
खट्पट्-खट्, बाजै करतार;
सस्ता जीवन, मँहगी कार;
मौका मिला है, जमिकै लूट;
जनता कै, किस्मत गै फूट;
खट्पट्-खट्, बाजै करतार;
राजनीति, बढ़ियाँ व्यापार;
जीत जो जइहैं, एको बार;
तीन पुस्त कै, जिनगी पार;
खट्पट्-खट्, बाजै करतार;
कर के बल, चलती सरकार;
ख़ून चूस, ढेहरी भर लीन;
देशवा कै, भिखमंगा कीन;
खट्पट्-खट्, बाजै करतार;
शातिर नेता, केकर यार;
आस्तीन कै साँप, यी भैया;
मौका मिलतै, डसिहैं भैया;
खट्पट्-खट्, बाजै करतार ।

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