Sat. Apr 20th, 2019

कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन

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 व्यग्ंय………बिम्मी शर्मा
कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन । मा कर्मफलहेतुर्भुर्मा ते संगोऽस्त्वकर्मणि ॥ श्रीमद् भागवतगीता में भगवान श्रीकृष्ण  उपरोक्त श्लोक में कर्म करने और फल की आशा या चिंता न करने कि बात करते हैं । कर्म ईंसान के हाथ में है और उसका परिणाम इईश्वर के हाथ में । ईसी लिए लोगबेधडक और बिना डरे कर्म कर रहे हैं । फिर चाहे वह कर्म बुरा हो या अच्छा । बस कर्म कर रहे हैं । उन्हे यही सिखाया गया है और वह वही कर रहे हैं आंख और कान बंद कर के । हां वह कर्म तो कर रहे है पर बुरे और दुसरों को रुलाने वाला कर्म । क्यों कि उन्होने भागवत गीता अच्छी तरह पढी और मनन की है । ईसी लिए तो धडल्ले से दुश्कर्म करते जा रहे है बिना फल की चितां के । नेपाल के सन्दर्भ मे कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन का बडे मनोयोग से पालन कर रहे हैं यहां के नेता, व्यापारी, काला बाजारी, माफिया डान और बलात्कारी । क्यों कि यह सब कर्म कर रहे है बिना कर्म फल की चिंता किए । यदि कर्म फल की आशा कर के ऐसा कर्म (दुश्कर्म) तो वह बिल्कुल नहीं करते । न खराब कर्म के परिणाम कि चिंता ही ईन्हे है । ईसी लिए निष्काम अर्थात अंधे और बहरे हो कर कर्म (दुश्कर्म) कर रहे है । वास्तव में देखा जाए तो श्रीमद् भागवत गीता के कर्म योग का सही अर्थ में प्रयोग या उपयोग यही लोग कर रहे हैं । क्यों कि ईन्हे डर ही नहीं है किसी चीज की । न प्रशासन, न कानून न पुलिस का ही इन्हे डर है । ईसी लिए तो सब निष्काम है । यदि डर होता तो ३३ किलो सोना गायब न हो जाता, न हवाई जहाज के वाईड बडी में अरबों रुपएं का घोटाला होता, न निर्मला पंत का बलात्कारी और हत्यारा फरार होता, न डा. गोविंद केसी को देश में स्वास्थ्य शिक्षा की स्थिति में सुधार लाने के लिए बारबार अनशन बैठना पडता । सभी निडर और बेखौफ है ईसी लिए तो हरेक वह कार्य कर रहे हैं जो बुरा या निषिद्ध है । पर सरकार को मार्सी चावल का भात खिला कर मदहोश कर चुके माफिया तंत्र ने सरकार से बख्शिश के रुप में उसका डकार भी प्राप्त कर लिया है । अब काहे का डर ? कानून तो इन के हाथ का झुनझुना है । जो इन के लिए इनकी आबोहवा के अनुकूल सुरीली आवाज में बजता है पर बांकियों को यह कर्कश सुनाई देता है । गीता के ईस श्लोक का पाठ हमारे देश के पिएम  ने पढा, मनन किया और उस का प्रयोग अब अपने हिसाब से सत्ता के गलियारे में कर रहे हैं । जब वह १४ साल जेल में बंदी जीवन बिता रहे थे तब इन्होने खुब ध्यान से पढा इस श्लोक को । और जब दो तिहाई के बहुमत से इन की पार्टी की सरकार बनी तब निष्काम हो कर हर वह कार्य किया जो देश और जनता कि दृष्टि में वर्जित हैं । सभी को वर्जित फल खाने और वर्जित काम करने की ईच्छा होती ही है । ज्यादातर लोग वर्जित को अवर्जित बनाने कि चेष्टा तो करते है पर सफल नहीं हे पाते । हमारे पीएम इस के अपवाद है । इसी लिए तो बिना कर्म फल की चिंता और आशा किए बगैर हर वह दुश्कार्य कर रहे है , सिर्फ १४ साल जेल जीवन बिता कर तो वह ऐसे निषिद्ध कार्य कर के देश और जनता को भरमा रहे हैं । जरा सोचिए नेलशन मंडेला की तरह ओली जी भी २७ साल जेल में बंदी जीवन बिताते तो देश कि हालत क्या होती ? तब ताे ओली महाशय देश का पूरा नक्शा ही बदल देते । यह देश धरती में न हो कर हवा की गोदी में बादलों में उड रहा होता ? एक किडनी से ही जब वह देश में बवाल कर रहे हैं तो अगर ओली जी के पास अपनी दाेनो किडनी सही सलामत होती तो देश को अपनी गोद में उठा कर मगंल ग्रह में ले जा कर रख देते । ताकि मगंल के ताप से देश और जनता दग्ध हो जाए । कर्म करने में हमारे देश की सरकार, पीएम, मंत्री और अन्य नेतागण इतने मशगुल हो जाते है कि दूसरे देश के हस्तक्षेप या विवाद (भेनेजुएला) पर भी अपनी कथित टिप्पणी दे देते हैं । और तो और उत्तर कोरिया के दिवगंत हो चुके शासकों का जन्म जयंती मनाने के लिए अपने देश में एक कमीटी का गठन कर लेते है । है न कितने महान बिचारवाले हमारे देश के शासक जो अपने देश के पूर्व राजा और शासकों का जनम जयंति नहीं मनाते न ही छुट्टी देते है । पर दूर देश के पडोसियों को ऐसे याद करते हैं कि जैसे कि वह हमारे पितृगण हो । यह सब कर्म करने और फल की चिंता न करने से ही संभव है । सरकार का बस यही एक फंडा है कि सारे बुरे काम करो पर उस के दोष से मुक्त हो कर या फल कि चिंता से रहित हो कर करो । अगर बुरे कर्म के परिणाम की चिंता करोगे तो आप कर्म करने से डर जाओगे और जब डरोगे तो बुराई से डरोगे और सत्कर्म करने लग जाओगे । अगर सभी लोग अच्छे कर्म करने लगे तो देश में व्यभिचार, भ्रष्टाचार और बलात्कार की सुनामी कैसे आएगी ? फिर यह देश रसातल में कैसे जाएगा ? देश को नेस्तनाबुद करने के लिए इस का बर्बाद होना जरुरी है । इसी लिए बेखौफ हो कर बिना कर्म फल कि चिंता किए बस बुरे कर्म बरो और बुराई के मसीहा बन जाओ । क्यों कि कर्म करने के बाद भी कर्म फल की प्राप्ति पद और पावर मे पहुंच के कारण आप को मनचाहा मिलेगा । अगर बुरे भी कर्म करो और सब निषेधित कार्य करते जाओ तब भी पैसे के बल पर आप कानून के शिकंजे में नहीं आओगे । उल्टे कानून ही आपकी मूठ्ठी में आ जाएगा । क्यों कि ईस देश का कानून जिस की लाठी उस की भैंस जैसी ही है । ईसी लिए सारे बुरे कर्म करते जाओ पर कर्म फल या परिणाम क चिंता न करो । आशा तो और बिल्कुल न करो । क्यों कि जैसा बोओगे वैसा काटोगे वाला कुदरत का नियम अब फेल हो चूका है । अब मनवांछित फल ही मिलेगा ।

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