Wed. Nov 14th, 2018

काठमांडू के कृष्ण मन्दिर में भक्तों की भीड़, कान्हा रे तू राधा बन जा, भूल पूरुष का मान. : विजेता चौधरी

विजेता चौधरी, काठमाण्डू, भाद्र ९ |
आज श्री कृष्ण जन्माष्टमी है । प्रत्येक वर्ष भाद्र कृष्ण अष्टमी के दिन मनाई जानेवाली श्रीकृष्ण जनमाष्टमी पर्व में भगवान श्रीकृष्ण के पूजा आराधना कर आज के दिन को जन्माष्टमी त्योहार की तरह मनाने का चलन रहा है ।

krishna mandir
ललितपुर के कृष्ण मन्दिर में आज सुवह से ही भक्तजनों की भीड़ लगी हुई है ।
संस्कृतिविदों का मानना है भगवान श्रीकृष्ण का जन्म द्वापर युग के अन्त के तरफ भाद्रकृष्ण अष्टमी के मध्यरात में हूआ था । उक्त पावन दिन के स्मरण स्वरुप आज के दिन जन्माष्टमी मनाया जाता है ।
कृष्ण जन्म की कथा भी रोचक  हैं । कंस के अत्याचार से मानव जाती को मुक्ति दिलाने हेतु वासुदेव तथा देवकी के आठवें गर्भ से भगवान विष्णु के आठवें अवतार के रुप में आज ही के दिन भगवान श्रीकृष्ण को जन्म लेने का धार्मिक विश्वास रहा है ।
इतना ही नहीं भाई कंस के जेल में बन्दी जीवन विता रहीं देवकी के कोख से जेल में ही कृष्ण ने जन्म लिया था । वैसे तो कृष्ण भगवान के लिलाएँ भी जनमानस में असीम आनन्द व भक्तिभाव का श्रोत रहा है ।
भगवान कृष्ण के रास लिला तो अपरामपार है । जनजन में वयाप्त उक्त कथा को कौन नही सुनना चाहता है । संस्कृतिविद् डा. रेवतीरमण लाल बताते हैं, कृष्ण व सुदामा के खीस्से, गोबर्धन पर्वत को अपने एक अंगुली पर उठाने की कथा सहति निश्चल प्रेम, राग, विराग के साथ मातृत्व, छलियापन के कारण ही कृष्ण जनजन से जननायक के रुप में लोगों के मनमष्तिष्क में विद्यमान हैं ।
आज के दिन उपत्यका के पाटन मंगलबजार स्थित प्रसिद्ध श्रीकृष्ण मन्दिर, काठमाण्डू के पूर्वी स्थान गोठाटार में रहें नवतनधाम, उत्तर स्थान में रहें बुढानीलकण्ठ स्थित श्रीकृष्ण भावनार्मत मन्दिर लगायत देशभर के ही सभी कृष्ण मन्दिरों में भव्यता के साथ भगवान कृष्ण के पूजा आराधना किया जा रहा है ।
आज किर्तनभजन के साथ साथ भगवान की डोली सहित रथयात्रा, झांकी प्रर्दशन कर जन्माष्टी पर्व को हर्सोल्लास के साथ देश भर मनाया जा रहा है ।
आज के दिन विशेष तौरपर महिलाएँ वर्त रखती हैं तथा १२ बजे रात में श्रीकृष्ण ने जनम लिएँ थें उस समय को मध्यनजर कर पूजापाठ करने के पश्चात ही फलाहार करती हैं । ये वर्त पूरुष भी लेते हैं ।
ललितपुर के प्रसिद्ध श्रीकृष्ण मन्दिर में आज विशेष मेला लगता है ।

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