Mon. Nov 19th, 2018

काठ्माण्डू में आइएसआइ ने भारतीय प्रधानमन्त्री वाजपेयी की हत्या की साजिश रची थी।

कंधार में विमान अपहरण कांड एवं दिल्ली के लाजपत नगर बम विस्फोट में शामिल मेहराजुद्दीन ने खुफिया एजेंसियों के समक्ष स्वीकार किया है कि 2002 में नेपाल में आयोजित होने वाले दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय संगठनों के सार्क सम्मेलन में भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी सहित कई नेता आइएसआइ के निशाने पर थे।

खुफिया सूत्रों के मुताबिक, नेपाल में पाकिस्तानी दूतावास में बतौर वीजा सेक्शन आफिसर काम कर रहे अयूब उर्फ अरशद चीमा से भी मेहराजुद्दीन के संबंध थे, लेकिन 2001 में चीमा आरडीएक्स की भारी खेप के साथ नेपाल में पकड़ा गया। इसके बाद उसे देश से बेदखल कर दिया गया। चीमा के चले जाने से मेहराजुद्दीन की सार्क सम्मेलन में वाजपेयी व अन्य विशिष्ट लोगों पर हमले की साजिश धरी की धरी रह गई। मेहराजुद्दीन का नाम भारत द्वारा पाकिस्तान को सौंपी गई बीस मोस्ट वाटेंड आतंकियों की सूची में भी शामिल है।

गौरतलब है कि किश्तवाड़ पुलिस ने 13 सितंबर को जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग पर नेपाल से श्रीनगर जाने के दौरान मेहराजुद्दीन को गिरफ्तार किया था। मेहराजुद्दीन से पिछले चार दिनों से देश की प्रमुख खुफिया एजेंसियां एनआइए, सीबीआइ, मिल्ट्री इंटेलिजेंस व जम्मू-कश्मीर पुलिस पूछताछ कर रही हैं। लाजपत नगर में हुए बम विस्फोट में संलिप्त मेहराजुद्दीन से दिल्ली पुलिस ने सोमवार को पूछताछ की। जम्मू संभाग के पुलिस महानिदेशक दिलबाग सिंह का कहना है कि मेहराजुद्दीन से पूछताछ जारी है और उससे इन मामलों में कुछ महत्वपूर्ण सुराग मिलने की उम्मीद है।जम्मू से जागरण के संवाददाता ने यह जानकारी दी है ।

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