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काला दिवस मना तो सरकार और मधेशवादी दलों पर संकट का बादल मडराने लगेगा : चन्दन दुब्बे

चन्दन दुब्बे, जनकपुरधाम, १८ सितम्बर २०१८ | २०७४ साल ठीक चुनाव लड़ने से पहले तक अश्विन ३ गत्ते को काला दिवस के रूप में मनाने वाली पार्टी संघीय समाजवादी फोरम ने आखिर किस उपलब्धि को पाकर इस साल यानी अश्विन ३ गत्ते २०७५ साल को संविधान दिवस मनाने का निर्णय किया है ? क्या उपेन्द्रजी के मंत्री बनने और पार्टीको सरकार में सहभागिता करने की महत्वाकांक्षाओं के साथ पिछले वर्ष काला दिन मनाया गया था ? या फिर केन्द्रीय मन्त्री उपेन्द्रजी को काला झंडा दिखनेवाले राम मनोहर यादव की गैर न्यायिक हत्या की खुशी में इस बर्ष दीवाली मनाने का निर्णय लिया गया है ? उपेन्द्रजी की पार्टी के केन्द्रीय कार्यालय द्वारा अश्विन १ गत्ते को जारी विज्ञप्ति जिसके तहत संविधान दिवस यानी अश्विन ३ गत्ते को सरकार द्वारा घोषित कार्यक्रमो के अनुसार काला दिवस में शामिल नही होने का आदेश दिया है | तथा संबिधान दिवस मनाने का निर्णय किया है जिससे जनसाधारण में घोर आश्चर्य तथा आक्रोश का वातावरण बन गया है।

हालांकि फोरम नेपाल के प्रदेश न.२ की समिति ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर काला दिवस मनाने की घोषणा भी एक प्रेस विज्ञप्ति के जरिये किया है और फोरम इस विषय मे आन्तरिक विवाद में फँस गई है। इधर राजपा ने पुनः इसे काले दिन के रूप में ही मनाने की तैयारी की है | उधर सी के राउत ने भी इसी दिन “चलु जनकपुर भरू जनकपुर” के आह्वान के साथ इस दिन को काले दिवस के रूप में मनाने का आह्वान किया है। अगर मधेश के आवाम और युवाओं से बात की जाय तो लोग काले दिवस के पक्ष में निर्विवाद रूप से खड़े हैं। अगर सी के राउत के आह्वान पर जनकपुर में २०,००० (बीस हज़ार) लोगों की भी उपस्थिति हो जाती है तो फिर नेपाल सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती और मधेशवादी दलों के अस्तित्व पर एक गहरे संकट का बादल मंडराने लगेगा। के पी ओली नेतृत्व की नेपाल सरकार के विरुद्ध मधेशी युवाओं में जो घृणा है और मधेशी दल खासकर फोरम के विरुद्ध जो आक्रोश बढ़ रहा है उसका फायदा सीधे सीधे सी के राउत को होने की संभावना दिखाई पड़ता है। अगर समय रहते मधेशी दलों ने इस समस्या की गम्भीरता को नही समझा और यथास्थिति में चलते रहे तो राजनीतिक तौर पर इस गलती का बड़ा मुआबजा चुकाना पड़ सकता है। दूसरी तरफ नेपाल सरकार ने भी अगर समय इस परिस्थितियों का उचित व्यवस्थापन नही किया तो देश पुनः एक गम्भीर द्वंद का शिकार हो सकता है।

चन्दन दुब्बे (लेखक)

 

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राकेश झा
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राकेश झा

सहि विश्लेषण ….. देशको समय चक्र फेरिने गृहदशा को संकेत हो यो ….

राकेश झा
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राकेश झा

देश को गृहदशा फेरिने संकेत हो यो …..