Sun. Nov 18th, 2018

कितना सुरक्षित है नेपाल-भारत परिवहन

सुजित कुमार झा:र्सार्क सम्मेलन के दौरान जब २५ नवंबर को भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और नेपाल के प्रधानमंत्री सुशील कोइराला ने काठमाण्डू नई दिल्ली बस सेवा को हरी झंडी दिखाई तो न केवल दोनों देशों के यात्रियों को एक बडÞी राहत पहुँची बल्कि इस बस सेवा को व्यापार और पर्यटन के क्षेत्र में बडÞी सफलता माना जा रही है । लेकिन सवाल है कि आखिर यह यात्रा कितनी सुरक्षित होगी – क्या भारतीय रेल जैसी यात्रियों को सुरक्षा दे सकेगी भारतीय सरकार – क्यूँकि अनुभव बताते हैं- भारत में नेपाली यात्रियों से वैसा बर्ताब नहीं किया जाता जैसा नरेंद्र मोदी अपने भाषण में कहते हैं या फिर वो जानते हैं ।

kathmandu delhi bus
काठमाण्डू नई दिल्ली बस सेवा

काठमांडू से नई दिल्ली रूट की बात करें तो काठमांडू से चलकर नेपाल भारत की सीमा भैरहवा, सुनौली, गोरखपुर और लखनऊ के मार्ग से दिल्ली का है और नई दिल्ली से काठमांडू यमुना एक्सप्रेस हाईवे के मार्ग से आगरा, पिÞmरोजÞाबाद, कानपुर, लखनऊ के रास्ते सुनौली होते हुए नेपाल का है । अगर संक्षिप्त में कहे तो नेपाल से निकली बस नई दिल्ली तक भारत के राज्य उत्तर प्रदेश में ही रहेगी । अगर भारतीय इंटरटेनमेंट टेलीविजÞन सोनी की बात माने तो क्राइम पेट्रोल दस्तक के मुताबिक ज्यादातर अपराध उत्तर प्रदेश से ही जुडी होती है । ऐसे में कैसे मान लें कि किसी दूसरे देश से निकली सवारी को पर्ूण्ा रूप से सुरक्षा दी जा सकेगी –
यह कोई पहली मर्तबा नहीं है, काठमांडू से नई दिल्ली कापÞmी दिनों से ट्रेवलएजेंट और पर्यटक बस द्वारा बस सेवा उपलब्ध है और लोग आते जाते रहते हैं । लेकिन उनका मानना है कि बस सेवा नेपाली यात्रियों या फिर इसमें सपÞmर करने वालों सभी से रास्ते में सुरक्षा के नाम पर भारतीय सुरक्षाकर्मी न तो केबल डराते, धमकाते हुए पैसा वसूलते हैं बल्कि अभद्र बर्ताव भी करने से नहीं चूकते । हालाँकि यह समस्या भारतीय रेलवे में काफी दिनों से है लेकिन रेल में काफी लोग होने से ऐसा बर्ताव करना आसान नहीं होता । नियम के मुताबिक बस में यात्रा के दौरान बीच में किसी मुसाफिर को नहीं लिया जाएगा जिससे चोरी थम सकती है और यात्री आरामदायक सफर कर सकेंगे ।
भारतीय प्रधानमन्त्री मोदी के प्रथम नेपाल दौरे के बाद भारतीय पर्यटकों की भारी संख्या में बढÞोत्तरी हर्ुइ है और ऐसा लगता है कि अब सिर्फहवाई मार्ग और रेलवे सफर पर्याप्त नहीं होगा और लोग आपातकाल यात्रा नहीं कर पाएँगे । ऐसी स्थिति में बस सेवा जारी करने से नेपालियों में हर्षोउल्लास की कोई कमी नहीं है । हर कोई छोटी अवधि में अब दिल्ली के लालकिला, जंतरमंतर और आगरा के ताजमहल देखना चाहेंगे । भारतीयों के लिए भी पशुपतिनाथ दर्शन देने के लिए काठमाण्डू में सदैव विराजमान हैं । भारत नेपाल की दूरी भी अब घटती हर्ुइ नजर आती है । ऐसे में दोनों सरकार को इस सेवा को निरंतरता देने की आवश्यकता है, नहीं तो रक्सौल अमलेखगंज रेलवे की तरह ये बात भी एक इतिहास बन कर न रह जाए । भारत सरकार को भी उत्तर प्रदेश सरकार से बात करके नेपाल भारत परिवहन पर बिशेष निगरानी रखने के लिए बात करनी चाहिए । अगर हो सके तो किसी भी मुश्किल घडÞी में यात्रियों को स्थानीय पुलिस की मद्द लेनी चाहिए और भारतीय सुरक्षा की तरफ से भी यात्रियों को यात्रा के दौरान सम्भावित घटनाओं से निबटने के लिए सलाह देनी चाहिए । समय पर र्सतर्कता की आवश्यकता है, क्योंकि र्सतर्कता गई तो दर्ुघटना हर्ुइ ।
-लेखकः वरिष्ठ साँफ्टवेयर विश्लेषक है)

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