Tue. Oct 16th, 2018

किसी भी दल काे बहुमत नही‌ं, अगामी दिनाें में भी स्थायित्व की सम्भावना न्यून

काठमान्डू २० दिसम्बर

 

प्रतिनिधि सभा अाैर प्रदेशसभा सदस्य निर्वाचन के अन्तिम परिणाम से ये पता चल गया है कि केन्द्रीय संसद प्रतिनिधिसभा में किसी भी राजनीतिक दल को बहुमत नहीं मिला है।

नेपाल के संविधानअनुसार गत मंसिर १० अाैर २१ गते दाे चरण में हुए  प्रतिनिधिसभा अाैर प्रदेशसभा निर्वाचन में कुल २७५ सदस्यीय प्रतिनिधिसभा के लिए निर्वाचन हुअा था। निर्वाचन अायोग के तथ्यांकअनुसार पहले हुए निर्वाचित  (प्रत्यक्ष) अाैर समानुपातिक निर्वाचन प्रणाली की अाेर से मत परिणाम देखने पर किसी भी  दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है।

प्रतिनिधिसभा के प्रत्यक्ष की अाेर कुल १६५ निर्वाचन क्षेत्र मध्य नेकपा (एमाले) ८०, नेकपा (माओवादी केन्द्र) ३६, नेपाली कांग्रेस २३, राष्ट्रिय जनता पार्टी नेपाल ११ अाैर संघीय समाजवादी फोरम नेपाल १०, नयाँ शक्ति पार्टी नेपाल एक, नेपाल मजदूर किसान पार्टी एक, राष्ट्रिय जनमोर्चा एक अाैर राष्ट्रिय प्रजातन्त्र पार्टी एक तथा स्वतन्त्र एक स्थान मे‌ विजयी हुए हैं।

ये राजनीतिक दल समानुपातिक की अाेर प्राप्त  मत के आधार में एमाले ४१, नेका ४०, माओवादी केन्द्र १७, राष्ट्रिय जनता पार्टी नेपाल अाैर संघीय समाजवादी फोरम नेपाल छ/छ सिट पाने का प्रारम्भिक मत परिणाम है। निर्वाचन आयोग के प्रवक्ता नवराज ढकाल ने कहा है कि आयोग शीघ्र समानुपातिक का मत परिणाम के आधार में दल द्वारा प्राप्त  सीट सङ्ख्या बाँट कर  सार्वजनिक करेगी।

दाेनाें  प्रणाली के परिणामअनुसार प्रतिनिधिसभा में एमाले १२१ सीट सहित सबसे बडा दल बन रहा है। नेका ६३ सीटसहित दूसरा बडा दल , माओवादी केन्द्र ५३, राजपा नेपाल १७ अाैर संघीय समाजवादी फोरम काे १६ सीट प्राप्त हुअा है ।

संविधानअनुसार कूल २७५ सदस्यीय प्रतिनिधिसभा में बहुमत के लिए  १३८ सदस्य सङ्ख्या आवश्यक है। प्रतिनिधिसभा में इनमे‌ से १६५ प्रत्यक्ष अाैर ११० समानुपातिक निर्वाचन प्रणाली के लिए  निर्वाचन हुअा था। सरकार बनाने के लिए किसी एक दल काे बहुमत नहीं मिलने के कारण दाे दलाें की अावश्यकता हाेगी ।

देश माें संघीय लोकतान्त्रिक गणतन्त्र स्थापना के बाद अपनाए गए समानुपातिक निर्वाचन प्रणाली अन्तर्गत के निर्वाचन में किसी एक दल काे बहुमत मिलना कठिन है । इस स्थिति में राजनीतिक स्थायित्व की सम्भावना न्यून दिखती है । नेपाल का पुराना राजनीतिक इतिहास यही बताता है ।

 

 

 

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