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क्या है सिक्किमीकरण और फिजिकरण ? कैलाश महतो ( अपडेटेड )

sikimfiji
कैलाश महतो, परासी, ६ जनवरी |
क्या है सिक्किमीकरण और फिजीकरण ?
पौराणिक कथा अनुसार ८वीं शदी में पदमाशम्भ (ऋणपोचे) नामक बौद्ध भिक्षु के सिक्किम भ्रमण और भविष्यवाणी अनुसार सन् १६४२ में तिब्बत के खी वंश के पाँचवें पुस्ता के फनसोग नामग्याल ने सिक्किम का राजा बनने का सौभाग्य पाया । छोग्याल का मतलब बौद्ध धार्मिक पंडित राजा होता है । बुद्ध दर्शन के मार्ग पर सिक्किम राज चला रहे राजा और राज्य पर गोर्खालियों ने सन् १७१७ से १७३३ तक अन्धाधुन्ध आक्रमण करता रहा । उसके बाद भी गोर्खालियों ने सन् १७९१ तक सिक्किम और सिक्किमवासियों पर आक्रमण करता रहा । गोर्खालियों के अत्याचार से हैरान सिक्किम की अवस्था और अपने आन्तरिक सुरक्षा पर चिन्ता करते हुए चीन ने सन् १७९१ में सेना का एक टुकडा सिक्किम भेज कर गोर्खालियों को खदेडा और सिक्किम को बचाते हुए उसपर अपनी पकड बनाये रखा ।
तिब्बतियों से हार खाने तथा सिक्किम के तराई मैदानों पर सन् १८१४ तक भी बेवजह के आक्रमण और दादागिरी करने के कारण बाध्य होकर सिक्किम ने भारत में राज कर रहे तत्कालिन अंग्रेजों की सहायता ली । अंग्रेजों ने नेपालियों को सिक्किम से खदेडने के साथ ही मधेशियों के सहयोग से मधेश से भी खदेड भगाया और उसी वर्ष के सन्धि अनुसार मधेश के जमीन पर न आने के वादा के साथ अंग्रेजों से सलाना दो लाख रुपये सहयोग लेने की नेपालियों ने सहमति की । गौर करें तो गोर्खालियों के बद्तमिजी और अत्याचारों के कारण ही शान्त और सौम्य सिक्किम को भी अंग्रेजों का पनाह लेना पडा जो कालान्तर में लाख उपाय करने के बावजुद अंगे्रज शासित सिक्किम को अंग्रेज शासित रहे आजाद भारत ने जनमत संग्रह के लोकतान्त्रिक मार्ग से भारत में मिला लिया ।
वास्तव में नेपाली शासक सिक्किम के आजादी या भलाई के पक्ष में नहीं, अपितु सिक्किम उसके नापाक हर्कतों को नहीं मानने और भारत को स्वीकार करने का ही पीडा और कुढन है नेपालियों में आजतक । जो सिक्किम आज भारत के सबसे स्वच्छ और ओर्गानिक उत्पादन में सर्वश्रेष्ठ राज्य है, वह भारत में ही रहने में खुश है, और उसके बारे में उल्टा और गलत तर्क पेश कर मधेशियों को अपने आजादी के रास्ते से भटकाने के नाकाम कोशिशें कर रहा है नेपाली शासक ।
नेपाली शासकों को यह बखूबी मालूम है कि जिस फिजी और उसके फिजीकरण का वे बेहुदा प्रचार करते हंै, वह भी अंग्रेजों का उपनिवेश रहा । विश्व में चिनी उत्पादन के क्षेत्र में अब्बल रहे फिजी में अंगे्रजों ने भारतीयों को भारत से ठेकेदार मजदुर के रुप में ले गये और वे फिजी में ही स्थायी बसोबास बना लिए । उसमें भारतीय लोगों का कोई दोष नहीं है । सन् १९९७ में बने नये संविधान के अनुसार उसी वर्ष सम्पन्न आम चुनाव में फिजी के नागरिक रहे महेन्द्र चौधरी के नेशनल फेडरेशन और भारतीय मूल के लोगों द्वारा ही संचालित लेवर पार्टीयों को वहाँ के कूल ७१ सीटों में ३७ सीटें मिलीं । वहाँ के संविधान ने ही मूल फिजिसियनों के लिए ३१ और ४० अन्य सभी के लिए बाँट रखी है । वहाँ के करीब ८ लाख रहे जनसंख्या में ४०% भारतीय हैं । उसी के अनुसार ४०% प्रहरी और प्रशासन में भी भारतीय लोग हैं ।
ध्यान देने लायक बात यह भी है कि वहाँ के संविधान ने ही भारतीय मूल के नागरिकों को आर्थिक, व्यापारिक, नागरिक, सामाजिक, शैक्षिक आदि अधिकारों के साथ राजनैतिक और संवैधानिक अधिकार भी मुहैया कराती है ।
नेपालियों के आरोपों को ही माने तो भारतीय मूल के फिजिसियन नागरिकों को वहाँ के संविधान द्वारा ही प्रदत्त सारा अधिकार होने तथा अंगे्रजी शासक लर्ड कर्जन और जॉन स्ट्रैची तथा नेपाली शासक ओली और बामदेवों के भाषा में ७ जुन–२००० के इण्डिया टुडे अनुसार भारतीय मूल के फिजिसियन लोगों ने “फिजी कोई राष्ट्र नहीं, केवल फिंजियाली प्रान्त है और पारम्परिक फिंजियाली राज्य संघ है” कह देने से मूल फिजिसियनों ने नहीं माना और सन् १९९७ में प्रधानमन्त्री बने महेन्द्र चौधरी को सन् २०००, मइ १९ को अपदस्त कर सकता है तो “नेपाल न कहिल्यै राष्ट्र थियो, न छ र न हुने बाला छ” जैसे बकबास करने बाले ओली और बामदेव लगायत नेपाली अन्ध राष्ट्रभतिm का गीत गाने बाले निर्लज्ज नेपाली नेता, बुद्धिजिवी तथा लेखकों को मधेशी क्यूँ मानेगा ?
भारतीय मूल के लोगों को फिजी के संविधान ने संविधानतः अधिकार देने के बावजुद जब फिजी के मूल बासियों को चेतना आया, इतिहास को जाना तो उसके आधार पर प्रधानमन्त्री रहे महेन्द्र चौधरी को उसके ४०% के सुरक्षाकर्मियों तक ने सुरक्षा नहीं दे पायी तो मधेश में उदण्ड औपनिवेशिक शासन चला रहे नेपाली मधेश अब कब छोडेगा… ? अब मधेश और मधेशियों को भी अपना इतिहास और प्रमाण मिल चुके हैं ।

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मुकुन्दg-one pathak Recent comment authors
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g-one pathak
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g-one pathak

पृथ्वीनारायण शाहको बिस्तारवादी बोल्ने वाला कैलाश महतो नेहरुका बच्चा हें. भारत ने कास्मिर सिक्किम सब खाया. लिम्बुवान, तमुवान, नेवा बोलनेवाला तु कैलाश महतो भारतको बोल उसने कितने राज्यको निगाला ?

मुकुन्द
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मुकुन्द

यो पनि भारतिये द्लाल हो इन्दिया बृतिस को नियेन्त्रन मा हुदा नेपाल ले गर्दा भारत स्वतन्त्र भयेको हो लेखक