Sat. Sep 22nd, 2018

ख़ुद प्यासी सी, इक साकी हूँ; मैं हुलाकी हूँ ।

गंगेश मिश्र
मैं, हुलाकी हूँ;
°°°°°°°°°°°°

बेबस राग;

बेताला, ताल में गाती;
हक़ के लिए, लड़ती;
विधवा सी, काकी हूँ;
मैं हुलाकी हूँ;
राजनीति की, बिसात पर;
बिछती रही;
मुद्दा बनती रही, पर;
सुनवाई को, बाकी हूँ;
मैं हुलाकी हूँ।
ख़त ढोती थी;
ख़बर, पहुँचाती थी;
अब ख़बर हूँ, मैं;
बे-ख़बर सभी;
ख़ुद प्यासी सी, इक साकी हूँ;
मैं हुलाकी हूँ ।
गंगेशकुमार मिश्र
आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.

Leave a Reply

avatar
  Subscribe  
Notify of