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गुल्जार–ए– अदब व्दारा मासिक गजल गोष्ठी

Guljare 25 Guljare Magh 25 Four Guljare Magh 25- Twoनेपालगन्ज,(बाँके) पवन जायसवाल, माघ २५ गते ।
बाँके जिला के गुल्जार–ए– अदब नेपालगन्ज ने स्थानीय महेन्द्र पुस्तकालय में शनिवार को मासिक गजल गोष्ठी सम्पन्न किया है ।
मासिक गजल गोष्ठी के प्रमुख आतिथि अवधी साँस्कृतिक विकास परिषद् बाँके के अध्यक्ष सच्चिदानन्द चौवे, उर्दू साहित्यकार हाजी मोहम्मद अन्जुम के अध्यक्षता में सम्पन्न हुई कार्यक्रम में र्उदू साहित्यकारों में सैययद असफाख रसूल हाशमी, मोहम्मद अमीन ख्याली, मोहम्मद यूसुफ आरफी, मौलाना नूर आलम मेकरानी,  मोहम्मद मुस्तफा अहसन कुरैशी, मोहम्मद जमील अहमद हाशमी, सदाब कादरी, मेहताब खान लगायत उर्दू साहित्यकारों ने अपनी– अपनी शैर वाचन किया ।
मासिक गजल गोष्ठी कार्यक्रम को संचालन अदब के सचिव मो. मुस्तफा अहसन कुरैशी ने किया था । अदब ने बि.सं.२०३३ साल श्रावण १ गते से नियमित मासिक गजल गोष्ठी की आयोजन  करते आ रही है ।
इसी तरह फाल्गुन महीनें के अन्तिम शनिवार के दिन “साहिल भी एतवार के काबिल नही रहा” के मिश्ररे में शैर वाचन करेंगें अदब के सचिव अहसन ने जानकारी दी ।
कार्यक्रम में अवधी सा“स्कृतिक विकास परिषद् के अध्यक्ष सच्चिदानन्द चौवे ने वाचन किया गजल ः–…………………………………….
जहा“ होता था प्रभु वन्दन, वहा“ घुंघुरु की छन–छन है
जहा“ जंगल में मंगल था, वहा“ गोली की दन– दन है
जहा“ सोने का प्याला था, वहा“ मिट्टी का वरतन है
कभी जो शाने गुलशन था, वही महरुमे गुलशन है
महकते थे जहा“ पर फूल, बेला अरु चमेली के
कभी गुलजार मधुवन था, वही सुनसान उपवन है
जहा“ नदियों के कल– कलसे, मधुर संगीत उठता था
वहा“ उन्मुक्त नदियों पर, वना मानव का वन्धन है
जहा“ पर फूलेत–फलते–महकते थे हुरित पादप
जहा“ कल तक था अलिगुञ्जन, वहा“ मानव का क्रन्दन है
कभी करते मोहब्बत थे, दिलों अरु जान से अपनी
जहा“ दिल का सर्मपण था, वहा“ तन का  सर्मपण है
जहा“ आपस में था सदभाव, अरु मजबूत थे रिश्ते
वही अब हो रही तकरार, रिश्तों में विभज्जन है
जहा“ ‘आनन्द’ था घर–घर, नहीं कोई था रंजोगम
वहीं मंगाई के मारे सिसकता आज जनजन है ।……..

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