Tue. Dec 11th, 2018

घर की मुर्गी दाल बराबर : बिम्मी कालिंदी शर्मा ( व्यग्ंय)

 बिम्मी कालिंदी शर्मा,वीरगंज |निर्मला पंत के बलात्कार और हत्या को सौ दिन से ज्यादा हो चुके है । सरकार भूसे के ढेर से सुई को खोजने जैसा अपराधी की तलाश कर रही है । पर अपराधी तो गोद में बच्चा गाँव मे ढिढोंरा जैसा ही हो गया है । सरकार को मालूम है अपराधी कहाँ और कौन है पर उसके गिरेबान में हाथ डालने से डर रही है खैर पीएम ने कहा ही है अपराधी का पता लगाने में १२ साल भी लग सकते है । अब १२ साल तक शांति से बैठ जाएं । हाँ तब तक नेकपा एमाले के एक नेता की बेटी को मिस वल्र्ड में जितवाने के लिए जरुर वोटिंग करे । अब निर्मला तो घर की मुर्गी दाल बराबर हो गई है । उस के न्याय के लिए क्या बात करना और विरोध करना । निर्मला के माता पिता थोडे ही न नेकपा एमाले के नेता हैं ? अब जब कि महिला हिंसा विरुद्ध १६ दिन का अंतराष्ट्रीय अभियान भी शुरु हो चुका है ।
सर्वसाधारण नागरिक की ईच्छा निर्मला के अपराधी को पकड़ कर दंडित करवाना है । पर सरकार के कान में जूं तक नहीं रेंग रही हैं । वास्तव में यह सरकार बहरी है या इस के पास कान ही नहीं है । इसी लिए न निर्मला के लिए मांगी जा रही न्याय को न सुन पा रही है न अपराधी को ही देख पा रही है । यह सरकार धृतराष्ट्र कि तरह ही अंधी है । धृतराष्ट्र अपने सौ पुत्रों के मोह में अंधा था यह सरकार अपने नेता और कार्यकर्ताओं के मोह में अंधी हो गई है । इसी लिए तो निर्मला के गम को भुला कर उस को न्याय न दे पाने में सरकार के चेहरे में न कोई शिकन है न कोई पछतावा । इसी लिए तो सरकारी संयत्र और सारे नेकपा एमाले के नेतागण अपने प्रिय नेता की बेटी को मिस वलर््ड में जितवाने के लिए हाथ धो कर वोटिगं में लगे हुए हैं और दूसरों को आग्रह कर रहे हैं वोटिंग करके नेपाल की बेटी को जिताने के लिए । यदि श्रृखंला खतिवडा मिस बल्र्ड में नहीं जीती तो देश का अपमान हो जाएगा । देश का अभी भी कौन सा नाम है ? अपने ही घर में निर्मला को न्याय न दे पाने वाली सरकार श्रृखंला खतिवडा को मिस बल्र्ड में जितवाने के लिए किस मुँह से वोटिंग कर रही है या अन्य को वोटिंग के लिए आग्रह कर रही है ? तनिक भी लज्जा नहीं है सरकार को । घर में अपनी ही बेटी को न्याय न दे पाने के कारण भीगी बिल्ली बनी हुई सरकार अतंराष्ट्रीय मंच पर शेर बन कर दहाड़ना चाहती है । पर देखना यह है कि यह कागज का शेर कितनी देर तक दौडेÞगा या दहाडेÞगा ?
मिस वल्र्ड का खिताब जीत कर लाने से सरकार के दामन में लगे हुए सारे दाग मिट जाएगे या देश का मान बढ़ जाएगा और लोग इस खुशी में निर्मला को न्याय देने की बात भूल जाएँगे और सरकार का विरोध नहीं करेंगे । शायद इसी सोच के साथ सरकार नेकपा एमाले के नेता विरोध खतिवडा की बेटी श्रृखंला खतिवडा को जिताने के लिए जी जान से लगी है । जब बाप का नाम ही विरोध है तो इस में देश के सर्वसाधारण नागरिक क्यों और किस लिए समर्थन करेगें ? इसी लिए सभी जब तक निर्मला को न्याय नहीं मिलेगा तब तक विरोध करेगें । और यह उनकी ईच्छा या अधिकार है कि वह विरोध करें । निर्मला को घर की मुर्गी दाल बराबर मान कर गटक गए । निर्मला के पिता का मानसिक संतुलन भी डगमगा गया है । जब किशोर बेटी का बलात्कार और उस की हत्या हो जाए तो किस मातापिता का मानसिक संतुलन ठीक रहेगा ?यदि निर्मला जिंदा भी रहती तो यही समाज प्रश्न पूछ, पूछ कर और उस को नोच, नोच बेहाल कर देता । एक प्रकार से सोचा जाएतो ठीक ही हुआ की निर्मला को मार दिया गया । इस मुर्दा समाज में वह जी कर भी क्या करती ?जहां न न्याय मिलता है न सम्मान ?इसी लिए जो गरीब, बेबस और लाचार हैं उनको तो मर ही जाना चाहिए । क्या गजब तमाशा हो रहा है इस देश में महिंला हिंसा विरुद्ध के १६ दिन के अभियान के अंतर्गत ही देश के सचेत नागरिक निर्मला के लिए न्याय की भीख मांग रहे है और सरकार खुद मिस बल्र्ड में श्रृखंला खतिवडा को जितवाने के लिए वोट । माँग दोनों ही रहे है कोई

 

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