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चुनाव होने का कोई आसार नहीं दिख रहा है : सुरेन्द्र प्रसाद गुप्ता (मुफस्सल की आवाज)

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राजबिराज, २५ मार्च | लोकतंत्र की मजबूती के लिए चुनाव की आवश्यकता होती है । देश में १९ वर्ष पूर्व स्थानीय तह का चुनाव हुआ था । उसके पश्चात् कर्मचारियों के भर में अब तक स्थानीय निकाय चलता आ रहा है । इसीलिए स्थानीय लोगों को अपनत्व देने के लिए चुनाव की आवश्यकता तो है, लेकिन आवश्यकता के बावजूद फिलहाल जिस हालात में चुनाव होने जा रहा है, सम्भवतः चुनाव होने का कोई आसार नहीं दिख रहा है । इसलिए भी कि मधेशी मोरचा का कहना है कि जब तक हमारी मांगे पूरी नहीं हो जाती, तब तक किसी भी कीमत पर हम चुनाव को नहीं मानेंगे । इसी प्रकार मौजूदा स्थानीय संरचना को भी मोरचा मानने को तैयार नहीं है । ऐसी स्थिति में अगर समग्रता की बात की जाए, तो चुनाव का कोई अर्थ नहीं रह जाता । इसीलिए मोरचा को साथ लेकर चुनाव करने की आवश्यकता है । इस प्रकार जब मोरचा को साथ लेकर चुनाव करने की बात की जाती है, तो उनकी मांगों को भी पूरी करने की आवश्यकता है । जबकि उनकी मांगों को दरकिनार कर सिर्फ चुनाव करबाने की बात की जा रही है । एमाले मधेश विरोधी प्रचार–प्रसार करने में लगी हुई पार्टी है । इधर नेपाली कांगे्रस और माओबादी केन्द्र द्वारा जिस तरह का समझौता किया गया था, वह समझौता भी पूर्ण नहीं किया जा रहा है । फिलहाल सप्तरी में ५ मधेशी सपूतों की शहादत हो गई है । इसलिए भी ऐसी स्थिति में अगर चुनाव करवाया जाता है, तो मुझे लगता है कि मधेशी जनता उस चुनाव को स्वीकार नहीं करेगी । और कहीं ऐसा न हो कि स्थिति और भयावह हो जाए । बहरहाल यह जरुरी है कि मधेशियों की जायज मांगों को पूरी करे उसके बाद ही चुनाव की बात की जाए, तभी समग्रता में एकता की बात होगी अन्यथा इस चुनाव का कोई अर्थ नहीं रह जाएगा ।

(सुरेन्द्र प्रसाद गुप्ता महेन्द्र विन्देश्वरी बहुमुखी कैम्पस, राजविराज के लेक्चरर हैं ।)

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