Sat. Sep 22nd, 2018

जय गोपाला … जय नंदलाल आदि उद्घोष से विराटनगर का वातावरण भक्तिमय

माला मिश्रा बिराटनगर।  जय कन्हैया लाल की हाथी घोड़ा पालकी, जय गोविन्दा जय गोपाला, राधे-राधे कृष्णा-कृष्णा आदि उद्घोष के साथ धिरकते लाखों श्रद्धालु। हर तरफ अध्यात्मिक माहौल।
हर किसी में रथ को डोर छूने की मची थी होड़। राधा-कृष्ण की युगल जोड़ी सवार रथ विराटनगर के तिरपैनी स्थिति मंदिर परिसर से निकलकर पूरे नगर का भ्रमण किया। इस दौरान रथ के साथ विभिन्न आकर्षक झांकिया व वाहनों का काफिला देखते ही बनता था। इससे पहीले  मुख्यमंत्री शेरधन  राई सहित अतिथिियो ने  गुव्व्वा्रा उड़ा     उद्घघटन किया ।
श्रद्धालुओ के प्रत्यक्ष दर्शन हेतु इस रथ यात्रा को कई जगहों पर रोकी गयी। रथ के साथ-साथ विभिन्न समुदाय का नृत्य व झांकी लोगों को बरबस अपनी ओर खींच रहा था। रथ के साथ कृष्ण, सुदामा, राधा, यशोदा भेष में कलाकार तथा राधा-कृष्ण के जोड़ी में बाल कलाकार ने सबका मन मोह लिया। उद्योगपति, व्यापारी महिला, बच्चे, वृद्ध, युवा सभी भक्ति रस में गोता लगाते नजर आये। ऐसा लग रहा था कि मानों सारा शहर सड़कों पर उतर आया हो नेपाल पुलिस के वरीय पदाधिकारी स्वयं सुरक्षा व्यवस्था की मानीटरिंग करते नजर आये। मोरंग पुलिस के अनुसार इस रथ यात्रा में एक हजार सुरक्षा कर्मी लगाये गये थे। इसमें सादे लिवास में महिला व पुरूष कर्मी भी शामिल थे। इधर मुख्य बाजार में महिला मंडल सहित विभिन्न सामाजिक संस्थाओं द्वारा श्रद्धालुओं की सेवा के लिए स्टॉल लगाकर पानी आदि की व्यवस्था की गयी थी। बच्चों के बीच चॉकलेट का भी वितरण किया गया।


इस दौरान विभिन्न भजन मंडलियों द्वारा प्रस्तुत किये गये गीत व भजन से शहर का वातावरण भक्तिमय बना रहा। इस रथ यात्रा में नेपाली सांस्कृति की झलक भी मिल रही थी। इस ऐतिहासिक रथ यात्रा में बिहार के कई जिलों से भी श्रद्धालु पहुंचे थे।
बिराटनगर स्थित राधाकृष्ण मंदिर का स्थापना 1931 में हुआ था । सज्जन पौडेल ,सोमराज पौडेल उर्फ मुखिया , कृष्णा पौडेल ने जमीन दान दी थी जहाँ मंदिर का स्थापना की गई और खटयात्रा का शुभारंभ किया गया । पंडित  इंद्रलाल भट्ट ने मंदिर का स्थापना कर इस धार्मिक आयोजन का शुरुआत किया था जो  19 67  में खट यात्रा रथयात्रा में परिणत  हुआ जो हर वर्ष समारोहपूर्वक मनाया जाता है । इस वर्ष  प्रदेश सरकार ने सरकारी छुट्टी भी दिया जिस कारण से भी श्रद्धालु का हजूम देखते ही बन रहा था । रथयात्रा का सुरक्षा में नेपाल पुलिस ,आर्म्स पुलिस , नेपाली सेना , राष्ट्रीय अनुसंधान बल सहित कई वरीय अधिकारी मौजूद थे । रथ का डोरी  तानने में नेपाली सुरक्षकर्मी के अलावा स्वयंसेवक लगाए गए थे ताकि रथ नियंत्रण में रहे । रथयात्रा को  भव्य और सभ्य बनाने में रथयात्रा समारोह समिति के अध्यक्ष बाबूराजा ओझा सहित समिति उप समिति के सभी सदस्यगण सक्रिय दिखे ।

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