Sat. Sep 22nd, 2018

तमरा अभियान का निष्कर्षः राम मनोहर की हत्या, राष्ट्र के लिए कलंक

काठमांडू, १ सितम्बर । तराई–मधेश राष्ट्रीय अभियान (तमरा) ने कहा है कि राम मनोहर यादव को बर्दिया पुलिस ने अपने हिरासत में ही हत्या की है । तमरा अभियान के संयोजक जयप्रकाश गुप्ता ने शनिबार एक विज्ञप्ति प्रकाशित करते हुए कहा है– ‘मधेसी राजनीतिक कार्यकर्ता राम मनोहर यादव की निधन पुलिस हिरासत में ही हुई है, यह समान्य घटना नहीं है, पुलिस हिरासत में यातना देने के कारण उनकी निधन हुई है । राज्य की ओर से की गई इस जघन्य अपराध को जितना भी निन्दा किया जाए, वह कम ही है ।’

प्रकाशित विज्ञप्ति में आगे कहा है–

पुलिस हिरासत में रहे किसी भी व्यक्ति की जीवन रक्षा संबंधी कानुनी और मानवीय दायित्व राज्य का होता है । राम मनोरह यादव एक राजनीतिक कार्यकर्ता थे । स्वास्थ्य मन्त्री तथा संघीय समाजवादी फोरम के अध्यक्ष उपेन्द्र के विरुद्ध में काला झण्डा प्रदर्शन करते वक्त उनको पुलिस ने गिरप्mतार कर हिरासत में रखा था । उनकी संलग्नता अथवा आवद्धता जो किसी से भी हो, लेकिन वह स्पष्ट है, वह राजबन्दी थे ।
हिरासत में रहते वक्त उनके लिए समुचिच उपचार की व्यवथा नहीं की गई । मृत्यु निश्चित होने के बाद ही उनको उम्बुलेन्स में रखकर नेपालगंज की ओर ले गया और रास्ते में ही उनकी निधन हो गई । उन की हत्या की गई है । मधेसी राजनीतिक प्रदर्शनकारी को यातना देना, उनके प्रति सदैव असहिष्ुण व्यवहार रखना और सीधा गोली प्रहार करना राज्य की नीति है, जिस की निरन्तरता में यह घटना घटी है । तराई मधेश राष्ट्रीय अभियान के विचार में इस हत्या से सरकार, मानव अधिकारवादी और न्याय प्रशासन की चेहरे पर एक पुनः कलंक का टीका लगी है ।
स्मरणीय है, उपप्रधानमन्त्री उपेन्द्र यादव सम्मिलित कार्यक्रम में काला झण्डा दिखाने के कारण ही राम मनोहर यादव को गिरफ्तरा किया गया था, उनके विरुद्ध राज्य विप्लव का मुद्दा पंजीकृत करने की तैयारियां हो रही थी । मन्त्री यादव के निर्देशन में ही उनको गिरफ्तार किया गया था । स्मरणीय यह भी है कि एक कार्यकर्ता ने पूर्व प्रधानमन्त्री झलनाथ खनाल को एक चांटा मारा था, दूसरे प्रधानमन्त्री डा. बाबुराम भट्टराई के ऊपर आक्रमण की गई थी, सिरहा में स्वयं उपेन्द्र यादव के ही कार्यकर्ताओं ने पूर्व प्रधानमन्त्री प्रचण्ड के ऊपर भौतिक आक्रमण किया था, इन सभी घटनाओं में खनाल, भट्टराई और प्रचण्ड की पहल में अभियुक्त को मुद्दा नचलाने के लिए आग्रह किया गया । जब कि उपेन्द्र यादव ने अपने ही समुदाय के मधेसी ऊपर मुद्दा पंजीकृत न करने के लिए, यातना न देने के लिए पुलिस प्रशासन को कोई भी दबाव नहीं दिया । समय की चेतना उपेन्द्र यादव से इस हत्या के बदले अपनी हिसाब लेगी । मधेश भर उपेन्द्र यादव के विरुद्ध सशक्त शान्तिपूर्ण विरोध के लिए तमरा अभियान आह्वान करता है ।
राम मनोहर यादव की हत्या के ऊपर छानबिन मांग करना अर्थहीन है । इस मुल्क में उनकी आत्मा को कभी भी न्याय मिलनेवाला नहीं है । उनकी आत्मा की शान्ति के लिए सम्पूर्ण मधेसी को एक होकर आतंककारी सरकार और सत्ता समर्पण मुद्दा बसिर्जनवादी मधेसी दलों के विरुद्ध संघर्ष को आगे बढाना चाहिए ।

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