Sat. Nov 17th, 2018

दो नम्बर प्रदेश अधुरा है, उसे पहाड से जोड़ना चाहिए : माधव ढुंगेल

काठमांडू, १ सितम्बर ।
राज्य पुनसंरचना (संघीय राज्य का सीमांकन) सम्बन्धी विषयों को लेकर राजनीतिक वृत्त में गर्मागर्म बहस जारी है । नयाँ संविधान जारी करते वक्त निर्धारण किया गया सात प्रदेश की सीमांकन प्रति असन्तुष्टी जताते हुए कुछ मधेशवादी और जनजाति राजनीतिक पार्टियों ने लम्बे समय तक आन्दोलन भी किया । आज उसी विषयों को सम्बोधन करने के लिए संविधान संशोधन की बात भी हो रही है । ऐसी ही अवस्था में नेकपा एमाले के युवा नेता एवं वैकल्पिक केन्द्रिय सदस्य माधव ढुंगेल ने कहा है कि संविधान संशोधन करने का बजाह क्या है ? वह अभी तक स्पष्ट नहीं हो रहा है । उनका मानना है कि वास्तविक समस्या और आवश्यकता को मध्यनजर करते हुए संविधान संशोधन की बात अभी नहीं हो पा रही है । नेता ढुंगेल का मानना है– अभी हाल के ‘दो नम्बर प्रदेश’ का सीमांकन अधुरा है, उसको पूर्ण करने के लिए दो नम्बर प्रदेश को पहाड से जोड़ना चाहिए ।

madhav dhungel
राष्ट्रिय युवा परिषद् के कार्यकारी उपाध्यक्ष भी रहे ढुंगेल ने हिमालिनी से हुई बातचित में कहा है– ‘आर्थिक समृद्धि का प्रमुख आधार प्र्राकृतिक साधन–स्रोत ही है । और नेपाल के लिए कृषि, पर्यटन, जलस्रोत, जडिबुटी, खनिज और वन हो सकता है । लेकिन दो नम्बर प्रदेश में कृषि योग्य जमीन के अलवा और कुछ भी नहीं है ।’ उन्होंने आगे कहा– ‘अगर दो नम्बर प्रदेश को भी अन्य प्राकृतिक संशाधन से परीपूर्ण करना चाहते है तो उसको पहाडी भू–भाग से जोड कर संघीय राज्य का सीमांकन करना चाहिए ।’
नेता ढुंगेल का यह भी मनना है कि मधेशी जनता ने कभी भी हिमाल, पहाड और तराई को अलग–अलग करने के लिए नहीं बोला है । लेकिन मधेश के कुछ नेताओं ने व्यक्तिगत स्वार्थ के कारण इस मुद्दा को ‘व्ल्याकमेलिङ’ के तरह आगे बढाया है, जिसके चलते समस्या जटिल दिखाई देता है । नेता ढुंगेल के अनुसार मधेशी जनता चाहती है कि सेना, पुलिस और प्रशासन में उनका भी समान सहभागिता हो और आर्थिक विकास में उनका भी हिस्सेदारी रहे । उन्होंने आगे कहा– ‘लेकिन जनता की इसी चाहना और मनोभावना को गलत प्रयोग करते हुए कुछ नेताओं ने सीमांकन में जोड़कर मुद्दा को गलत रास्ते पर ले गए हैं भावनात्मक रुप में जनता को भडकाया है ।

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