Sat. Apr 20th, 2019

धनतेरस के इस अवसर पर चली गई जो साँस खरीदूँ? पद दल या अधिकार खरीदूँ या सत्ता के हकदार खरीदूं : मुकेश झा

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उम्मीद खरीदूं आश खरीदूं

राजनीति के बकवास खरीदूं

सत्ता पर जाने के खातिर

कहीं से कुछ लाश खरीदूं

धनतेरस के इस अवसर पर

चली गई जो साँस खरीदूँ?

पद दल या अधिकार खरीदूँ

या सत्ता के हकदार खरीदूं

चहुंदिश जय जय के खातिर

समाचार पत्रकार खरीदूँ

धनतेरस के इस अवसर पर

चली गई कुछ आश खरीदूँ?

बिखर गए परिवार खरीदूँ

टूट गए घरबार खरीदूँ

अपनो का मैं प्यार खरीदूँ

सपनो का संसार खरीदूँ

धनतेरस के इस अवसर पर

किसका मैं उपकार खरीदूँ?

हर कुछ बिकता दिखता है

जब असमंजस पर सोच रहा हूँ

जीवन के मूल्यों की खातिर

जज्बाती आधार खरीदूँ

अगर बिकता हो कहीं पर

परमात्मा का प्यार खरीदूँ

परमात्मा का प्यार खरीदूँ।

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