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धनुषा जिला प्रशासन कार्यालय द्वारा मधेसी होने का प्रमाणपत्र नष्ट

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डा.मुकेश झा, जनकपुर, 29 कार्तिक । सर्व साधारण से सम्बंधित समस्त कागजातों को सुरक्षित रखना किसी भी राष्ट्र के निकायों की दायित्वों में महत्वपूर्ण माना जाता है। जनता और राज्य के बीच हुए हरेक कार्य महत्वपुर्ण ही होता है भले ही कार्य देखने में छोटा हो या बड़ा। परन्तु नेपाल सरकार इस बात को नही मानती। अपने ही देश के जनता के प्रमाणों की तथ्यांक को रखना आवश्यक नही समझा जाता और उसे नष्ट कर दिया जाता। देश के लिए अगर जनता महत्वपुर्ण है तो उससे सम्बंधित हरेक प्रमाण और तथ्यांक महत्वपूर्ण होना चाहिये। अगर राज्य के नजर में जनता से जुड़े तथ्यांक महत्वपुर्ण नहीं है तो जनता का कोई मोल नही है यह समझा जाना चाहिये।
नेपाल सरकार ने नेपाल के मधेशियों के लिए जिला प्रशासन कार्यालय से मधेसी होने का प्रमाणपत्र देने का नियम बनाया है, जिससे मधेसिओं को जो राज्य के बिभिन्न अंगो में आरक्षण मिलता है उसमे साझेदारी मिल सके। परन्तु जिला प्रशासन कार्यालय धनुषा में जितने भी मधेसिओं ने वहां से मधेसी होने का प्रमाण पत्र लिया है उनका तथ्यांक नष्ट कर दिया जाता है।

क्या इससे यह प्रमाणित नहीं होता कि मधेसिओं को पहचान का प्रमाणपत्र देना सरकारके लिये कोई औचित्य नहीं रखता?
सुचना अधिकार के नियम तहत जब जिला प्रशासन कार्यालय से विधिवत निवेदन दे कर यह जानने का प्रयास किया गया कि मधेस में कितने मधेसिओं ने मधेसी होने का प्रमाणपत्र लिया है तो जिला प्रशासन ने जो जवाब दिया वह किसी भी सचेत नागरिक के लिए विस्मित करने वाला है। धनुषा जिला प्रशासन कार्यालय के छाप सहित सफ़ेद कागज पर यह जवाब दिया गया कि इस जिला में रहने वाले व्यक्तियों ने नागरिकता प्रमाणपत्र के प्रतिलिपि सहित सम्बंधित निकाय के सिफारिस सहित मधेसी प्रमाणपत्र पाने के लिए विधिवत निवेदन देने पर सम्बन्धित व्यक्ति को मधेसी मूल का है कहकर प्रमाणित किया गया एवम् उनके कागजातों का प्रतिलिपियों का अभिलेख बहुत ज्यादा होने पर उन कागजातों का फाइलिंग किया जाना आवश्यक नही होने से उन कागजातों को नष्ट कर दिया जाता है।
देश के एक महत्वपुर्ण क़ानूनी निकाय का ऐसा गैर जिम्मेवारी पूर्ण कार्य को शायद ही कोई सही कह सकता है ! क्या कार्यालय को वास्तव में फाइलिंग करने में दिक्कत आई या सिर्फ मधेसी से सम्बंधित होने के कारण दिक्कत हुई? क्या मधेस से कितने लोगों ने प्रमाणपत्र लिया इसकी जानकारी रखना सरकार को आवश्यक नही है? अगर ऐसा है तो कल नागरिकता और पासपोर्ट के बारे भी सरकार यही कर सकती है। दूसरी शंका यह की जा रही है की बहुत से पहाड़ी मूल के व्यक्तियों ने मधेसी प्रमाणपत्र ले कर मधेसी के लिए आरक्षित जगह पर जाने के लिए जिला प्रशासन से मधेसी प्रमाण पत्र लिया और बिवाद होने के भय से जिला प्रशासन कार्यालय ने तथ्यांक ही नष्ट कर दिया, क्यों की ऐसा देखा गया।
देश के सरकारी निकाय, वह भी जिला प्रशासन कार्यालय द्वारा अपने ही जनता का तथ्यांक नष्ट करना निन्दनीय एवम् भर्त्सना योग्य कार्य है। परन्तु जिस कार्यालय में यह कार्य हुवा और जिस प्रशासक द्वारा यह कार्य करबाया गया उसे अभी तक कानून के दायरे में नही लाया जाना और भी ज्यादा निंदनीय है। उम्मीद है धनुषा जिला के अलावा और दूसरे जिला कार्यालयों में ऐसा घृणित कार्य न हुवा हो। वैसे जब नेपाल में बड़े बड़े अधिकारियों के फ़ाइल “भूकम्प के कारण” गुम हो जाते हैं तो मधेसिओं का तथ्यांक नष्ट होना बड़ी बात नहीँ।

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