Sat. Dec 15th, 2018

नए राजदूत नई चुनौती

  नेपाल के लिए नए भारतीय राजदूत जयन्त प्रसाद ने अपना कार्यभार संभाल लिया है। भारतीय विदेश मंत्रालय में विशेष सचिव रहे प्रसाद ने अपने नेपाल आगमन पर कहा कि नेपाल और भारत का संबंध विशिष्ट है और इस संबंध को नई ऊंचाई तक पहुंचाना ही उनकी प्राथमिकता होगी। नेपाल की राजनीति में भारतीय प्रभाव की चर्चा हमेशा ही यहां होती रही है और भविष्य में भी होती रहेगी। ऐसे में नए राजदूत के तौर पर जयन्त प्रसाद के सामने शान्ति प्रक्रिया और संविधान सभा के अलावा नेपाल के राजनीतिक दलों के बीच संबंध को सुधारना भी एक चुनौती के रूप में रहेगी।
वैसे इस संबंध में भारत सरकार भी यही नीति है कि नेपाल की शान्ति प्रक्रिया जल्द से जल्द पूरी हो, राजनीतिक दलों के आपसी सहमति में सेना का समायोजन हो और जल्द से जल्द संविधान का भी निर्माण हो। नए राजदूत प्रसाद ने भी कहा है कि शान्ति प्रक्रिया और संविधान निर्माण को लेकर भारत नेपाल को हर संभव सहयोग देता आया है और आगे भी इसकी निरन्तरता बनी रहेगी।
१९७६ में भारतीय विदेश सेवा में प्रवेश करने वाले जयन्त प्रसाद अब तक भारतीय विदेश मंत्रालय के पब्लिक डिप्लोमेसी विभाग में विशेष सचिव के रूप में अपना योगदान दे रहे थे। इससे पहले वो अफगानिस्तान में राजदूत के रूप में अपना सफल कार्यकाल पूरा कर चुके हैं। विदेश मंत्रालय में अपने कार्यकाल के दौरान जयन्त प्रसाद अल्जेरिया के भी राजदूत रह चुके हैं। इसके अलावा जीनिवा स्थित यूएन के दफ्तर में भारत के स्थाई प्रतिनिधि के रूप में भी अपनी सेवा दे चुके हैं। ब्रुसेल्स स्थित यूरोपीय यूनियन में काँउन्सलर, यूएन में भारत के तरफ से प्रथम सचिव, और प|mान्स स्थित भारतीय दूतावास में द्वितीय सचिव के रूप में ही काम कर चुके हैं।
र्    नई दिल्ली स्थित भारतीय विदेश मंत्रालय में जयन्त प्रसाद ने अमेरिका डिवीजन के प्रमुख तथा विदेश मंत्रालय के ही मल्टिलेटेरल इकाँनाँमिक रिलेशन्स के भी प्रमुख के रूप में बखुबी अपनी जिम्मेवारी निर्वाह कर चुके हैं। जयन्त प्रसाद को २००५-२००७ तक यूएन के महासचिव के सल्लाकार समिति के सदस्य के रूप में काम करने का मौका मिलाहै ।
नेपाल में उनका अगमन ऐसे समय हुआ जब यहाँ नई सरकार गठन की प्रक्रिया चल रही थी । ऐसे में सबका ध्यान भारतीय राजदूत पर जाना स्वभाविक था । लेकिन यह पहली बार है, जब भारतीय राजदूतावास को नेपाली मीडिया ने इस मामले में नहीं घसीटा है । राजनीतिक दलों के नेताओं से मुलाकात में भारतीय राजदूत राष्ट्रीय सहमति पर ही जोडÞ देते नजर आए ।

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