Sat. Nov 17th, 2018

नया जंगबहादुर राणा का आगमन के लियें पूजा पाठ

laxmi-ganeshनेपालगन्ज,(बाँके) पवन जायसवाल, असोज ६ गते ।
बाँके जिला के नेपालगन्ज में शीर्ष राजनीतिक दलों ने संविधानसभा चुनाव को सर्वसम्मत कराने के लियें दवाव देनें के उद्देश्य से शुक्रवार को कलस और गणेश  का पूजा किया।
बर्दिया जिला के गुलरिया नगरपालिका– ६ के निवासी राकेशकुमार शर्मा ने चुनाव को सर्वसम्मत बनाने के लियें राजनीतिक दलों को दवाव स्वरुप बाँके जिला धम्वोझी चौक में कलस और गणेश मुर्ती का पूजा किया गया । एक पक्ष कह रहा है चुनाव कराकर ही छोडेगें लेकिन दुसरा पक्ष चुनाव न होने देनें के लियें जुटे हुयें है इस लियें मुठभेड का वातावरण सिर्जना किया गया है यह कहते हुयें चुनाव को सर्वसम्मत बनाने के लियें शर्मा का मांग है ।
चुनाव को सर्वसम्मत अगर नही बना पायें तो उस का परिणाम सर्वसाधरण और निर्दोष व्यक्तियों को सहना पडेगा कहते हुयें नया जंगबहादुर राणा का आगमन का कामना करने के लियें दिप, कलस और गणेश का मुर्ती रखकर  पूजा किया गया था ।
सरकार ने दुसरा संविधान सभा की मिति भी घोषणा कर चुकी है । ने.क.पा.–माओवादी (वैध पक्षधर) समेत ३२ दलों ने चुनाव बहिष्कार किया है । इस लियें २०७० साल भादौं महीनें के २८ गते सर्लाही जिला के मलंगवा नापी शाखा में बम विष्फोट में सर्वसाधारण और निर्दोष नागरिकों ही घायल हुयें विगत द्वन्द्वकाल में भी सर्वसाधारण और निर्दोष नागरिक अपाङ्ग, घायल और मारे भी गयें ।
इसी तरह अब होने वाले दुसरे संविधान सभा निर्वाचन में भी सर्वसाधारण और निर्दाष नागरिक अपाङ्ग, घायल और मरने तथा राष्ट्र में मुठभेड, विद्रोह और तनाव का वातावरण सिर्जना होने जैसे लग रहा है इस लियें नया जंगबहादुर राणा का आगमन के लियें कामना करने के लियें दिया, कलश और गणेश का मूर्ती रखकर पूजा किया गया ।
नया जंगबहादुर राणा कार्यक्रम का शुरुवात मकवानपुर जिला के हेटौँडा से गत श्रावण १६ गते शुरुवात किया गया, पर्सा जिला के वीरगंज में श्रावण २९ गते, बर्दिया जिला के गुलरिया में असोज २ गते, इसी बाके जिला के नेपालगंज धम्बोझी चौक में असोज ४ गते किया गया और काठमाण्डँंै जिला के बसन्तपुर में असोज ९ गते किया जाएगा स्वतन्त्र नेपाली नागरिक राकेश कुमार शर्मा ने बताया ।
राष्ट्रीय अखण्डता, एकता, सार्वभौमसत्ता और प्रजातन्त्र रक्षा के लियें नया“ जंगबहादुर राणा का आवश्यकता । किसी  किसी का जंगबहादुर राणा निरंकुश और तानाशाह कहकर तर्क भी हो सकता है लेकिन हमने प्रजातान्त्रिक नया जंगबहादुर राणा कहा है । दुसरे नेपाली नागरिकों ने मनन करें, कि नेपाल के राजनीतिक पार्टी वा दलों के नेताओं तानासाह और निरंकुशवादी नही है और? नेताओं के शासन कालों में भी  पत्रकार, शिक्षकों और व्यापारीयों आदी जैसे सर्वसाधारण और निर्दाेष नागरिकों मारे गयें ? नेतायों ने  अपना सिर्फ गोरू का बाह्र टक्का का हठ करके संविधान नही बन पाया और आज तक  राष्ट्र ने निकास ही पाने का भी अवस्था नही है । फिर भी अब होने वाला दुसरा  संविधान सभा निर्वाचन में मुठभेड और तनाव होने का स्थिति दिखाई पड रहा है ।
हमारे देश में राष्ट्रीयता होने वाले नेताओं का स्वर्गारोहण हो चुका है स्वः पूर्व प्रधानमन्त्री मंरिचमान सिंह रहें । दुसरे दो स्वर्गीय नेताओं स्व. नेता मदन भण्डारी और स्व. नेता जीवराज आश्रीत थे  । लेकिन उन लोगों को हमारे ही देश के नेताओं ने नही चाहा । हमारा राष्ट्र सिक्किम और अफगानिस्तान होने अच्छा नया“ जंगबहादुर राणा का ही शासनकाल होना अच्छा है शर्मा ने बताया ।

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