Mon. Oct 15th, 2018

निर्वाचन असफल करने की साजिश

० अमरेश जी, नेपाली काँग्रेस गणतन्त्र मे विश्वास करती है, इस बारे में आप क्या कहेगें –
– विलकुल सच है। नेेपाली काँग्रेस हमेशा राजतन्त्र के विरोधी रही है और है। इस के बहुत सारे उदारहण हैं। आप जनकपुर घटना को ही ले सकते हैं। नेपाली काँग्रेस के कार्यकर्ता दर्ुगानन्द झा ने गणतन्त्र के लिए ही वर्षों पहले राजा महेन्द्र पर बम फंेका था।
० राजतन्त्र के अन्त्य हुए सात वर्षबीत चुके, लेकिन गणतन्त्र संस्थागत नहीं हुआ, इस का दोषी कौन है –madhesh khabar
– ऐसी बात नहीं है। हम सबोंको समझना होगा कि हम गणतन्त्रवादी हंै। कुछ त्रुटी हो सकती है। जहाँ तक संस्थागत की बात है किसी भी देश में गणतन्त्र संस्थागत होने में समय लगता है। गणतन्त्र को संस्थागत करने में कहीं न कहीं हम सब पीछे पडÞ रहे हंै। लेकिन विश्वास है यह भी जल्द ही हो जाएगा।
० क्या अगहन ४ गते को चुनाव सम्भव है –
– मुझे पुरा विश्वास है अगहन ४ गते किसी भी हालत में चुनाव होगा। और इसके लिए सभी राजनीतिक दल सहमति मे आऐंगे।
० किसी कारणवश चुनाव नहीं हुआ तो –
– चुनाव तो निश्चित है। अगर नहीं हुआ तो गणतन्त्र खतरा मे पडÞ सकता है। राष्ट्रपति के साथ किसी भी प्रकार की दर्ुघटना घट सकती है। देश अन्धकार और आराजकता में प+mस सकता है।
० अमरेश जी, एक तरफ नेता चुनाव की बात कर रहे हैं और दूसरी तरफ पर्ूव राजा ज्ञानेन्द्र धार्मिक भ्रमण के नाम पर जनता के बीच आने का प्रयास कर रहे हैं, आप क्या कहेंगे –
– यह बहुत बडÞी विडम्बना है। पर्ूव राजा और राजावादी कभी भी चुनाव के पक्ष मे नहीं होंगे। शाह का भ्रमण धार्मिक नहीं राजनीतिक भ्रमण है। वे चुनाव विफल करने के प्रयास में लगे हैं। राजसंस्था संघीयता विरोधी होती है। संविधानसभा के चुनाव ही राजतन्त्र को जडÞ से उखाडÞ कर फेंक सकता है। तर्सथ चुनाव के लिए दबाव बनाया जाए, आम जनता से मेरा यही हार्दिक आग्रह है।
० आप कैसे कह सकते हैं कि पर्ूव राजा का यह भ्रमण धार्मिक नहीं राजनीतिक है –
आप जनता को कुछ कहना चाहंेगें –
– जनता से कुछ भी छुपा नहीं है। मं खासकर मधेशी बन्धुओं से कहना चाहूँगा कि मधेशियों के लिए सबसे पहले संविधान निर्माण आवश्यक है। अपने अधिकारों को सुनिश्चित करने के लिए चुनाव का वातावरण बनना चाहिए और उसके लिए हम सभी मिलकर अभी से दवाव डÞालें। राजा का भ्रमण गणतन्त्रवादियों को फोडÞने के लिए हो सकता है। किसी भी जाल में नहीं फसें और राजा के चक्रव्यूह का खुल कर विरोध करें।
-जनकपुर सम्वाददाता कैलाश दास के साथ हर्ुइ बातचीत)

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