Sat. Apr 20th, 2019

नेपाल के पहले राजा मनु थे जिन्होंने सत्ययुग में यहां राज किया था : डा.श्वेता दीप्ति

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प्राचीन नेपाल (मिथकीय युग)

भारत और नेपाल का मिथकीय युग एकसाथ शुरू होता है । हिंदू मान्यताओं एवं धर्मग्रन्थों के अनुसार नेपाल की संस्कृति और सभ्यता का इतिहास मनु से आरम्भ माना जाता है । इतिहासकारों के अनुसार मनु ही नेपाल के पहले राजा थे, जिन्होंने सत्ययुग में यहां राज किया । तब नेपाल सत्यभूमि के नाम से जाना जाता था । त्रेतायुग (सिल्वर युग ) में नेपाल को तपोवन तथा द्वापरयुग (ताम्र युग ) में इसे मुक्तिसोपान भी कहा जाता था । कलियुग (लौहयुग ) यानी मौजूदा समय में इसे नेपाल कहा गया । सत्ययुग में सौर्य वंश ने नेपाल की सभ्यता व संस्कृति के विकास में भरपूर योगदान किया । आज का सौर्य कैलेंडर और उस पर आधारित त्योहार इसी वंश की देन हैं ।
पहाड़ों और जंगलों से आच्छादित नेपाल  तत्कालीन तपस्वियों यथा– कण्व, विश्वमित्र, अगत्स्य, वाल्मीकि, याग्यवलक्य व दूसरे ऋषियों की तपस्थली थी । भारत के राजा दुष्यंत ने नेपाल के ही कण्व ऋषि की पुत्री शकुन्तला से शादी की थी । उसी के पुत्र भरत के नाम से आज का भारत है । विभिन्न हिंदू धर्मग्रंथों में नेपाल की चर्चा है । जनकपुर के न्यायप्रिय राजा जनक का भी विवरण इन्हीं ग्रंन्थों में मिलता है । माना जाता है कि रामायण की रचना यहीं के सप्तगंडकी नदी के तट पर की गई । महर्षि वेदव्यास यहीं पैदा हुए थे ।
नेपाल के दमौली (व्यास नगर) में व्यास गुफा है, जो इस अवधारणा की पुष्टि करती है । इसी तरह महाभारत में उल्लिखित महाराज विराट भी नेपाल के विराटनगर के राजा थे । ये सारे तथ्य इस बात के सबूत हैं कि मंजूश्री के कांठमांडो घाटी में आने से काफी पहले नेपाल का अस्तित्व था । स्वयंभू पुराण में वर्णित है कि चीन से कांठमांडो आकर मंजूश्री ने नागदह नामक विशाल झील के इर्दगिर्द लोगों को बसाया । उसने मंजूपत्तनम नामक शहर बसाया और धर्मांकर को राजा बनाया । इसके बाद से नेपाल का इतिहास कांठमांडों के इर्दगिर्द घूमता है । इसके बाद यहां कई राजवंशों ने शासन किया । ये हैं– आहिर या गोपाल, किरात, लिच्छवी, मल्ल और शाह । कृपया पढें

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