Sat. Apr 20th, 2019

नेपाल पिता की जय हाे

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  व्यग्ंय……….बिम्मी शर्मा
जैसे भारत माता है वैसे ही नेपाल भी कभी नेपाल माता हुआ करता था । पर अब नागरिकता में विवाद के चलते नेपाल पिता हो गया है । क्यों कि मां के नाम से उस के बच्चों को नागरlकता देने में सत्ता में बैठे पिता लोगों को दिन में ही तारे नजर आ रहे हैं । इसी लिए मां के नाम से नागरिकता देने पर यह देश भांजा, भाजिंयों का हो जाएगा । गोया पडोसी देश के भांजा भांजी जैसे तैयार बैठे हो यहां की नागरिकता लेने के लिए । जैसे कि उन के देश में कोई ठिकाना न होने के कारण वह फुटपाथ में पडे रहते हैं और यहां की नागरिकता मिलते ही उन सब को रहने के लिए महल ही मिल जाएगा । नेपाली मानसिकता इतनी घिसीपिटी और दकियानुसी हो गई है कि वह अपने देश को सोने की लंका ही समझते है जिसे लूटने के लिए पडोसी देश ताक में रहते हैं । जिस देश की करीब एक करोड आवादी बेरोजगारी की वजह से खाडी के देशों में रोजगार के लिए जा चुकी है । जिस देश में बेरोजगारी और महंगाइ सुरसा के मुंह की तरह फैल रही है । जहां अपने देश की भाषा से ज्यादा दूसरे देशों की (जापान, कोरिया वगैरह) भाषा सीखने के लिए लाईन लगी रहती है । उस देश में कोई क्यों कर बैठने आएगा और नागरिकता भी लेगा ? किस को पागल कुत्ते ने काटा है भई ? नेपालियों को यह भ्रम है कि उन का देश बुद्ध और सगरमाथा का होने के कारण सभी यहां आने और रहने के लिए लालायित रहते है । ईसी लिए मां के नाम से नागरिकता की व्यवस्था संविधान में होते ही नेपाली महिला किसी विदेशी से शादी कर लेगी और अपने पति के साथ ही भविष्य में पैदा होने वाले बच्चे को भी इस देश की नागरिकता दिलवा कर देश का भार बढवाएगी ? नेपाली पुरुषाें को अपनी योग्यता और ल्याकत पर भरोसा ही नहीं हैं इसी लिए उन्होने अपने दिमाग में एक रेडिमेड विचार को फिक्स कर लिया है कि यहां कि महिला विदेशी से ही शादी करेगी उनसे नहीं ? कितनी ज्यादा हीनतावोध है इस देश के पुरुषों मे कि उन्हें लगता है कि मां के नाम से नागरिकता देते ही यह देश ननिहाल बन जाएगा और वह मामा या नाना बन जाएगें । और के नाम से उसकी औलाद को नागरिकता मिलते ही वाे चिडीया की तरह फुर्र से उड कर विदेश चली जाएगी और वहां किसी विदेशी से शादी कर लेगी जिस का अपना कोई घरवार नहीं होगा । और वह अपनी पत्नी का पल्लू पकडे उसके मायके का देश आ जाएगा और नागरिकता ले कर यहीं जम कर बैठ जाएगा ? जैसे कि नेपाल कि लडकियां इतनी बेवकुफ है कि एक सडकछाप को अपना जीवन साथी बना लेगी ? जिस के साथ यहां कि लडकियां शादी करेगी उसका अपना घरवार होगा ? उसका अपना नौकरी या कारोवार भी होगा ही । क्या वह सब कुछ छोडछाड कर अपनी पत्नी के साथ मुर्ख की तरह यहां चला आएगा ? यहां पर ऐसा क्या आकर्षण है कि कोई विदेशी अपना देश और परिवार सब छोड कर यहां की नागरिकता ले लेगा ? यदि यह देश इतना ही आकर्षक और समृद्ध होता तो इस देश के करीब एक करोड नागरिक विदेश पलायन क्यों होते ? क्यो वह विदेश में कब्र खोद्ने या शौचालय साफ करने जैसा  काम करने के लिए भी तैयार हो जाते है पर अपने देश में रहना नहीं चाहते ? जिस देश के युवाओं में कोरिया, जापान या खाडी देशों में रोजगारी में जाने या रोजगार पाने के लिए रात, रात भर लाईन लगी रहती है । जहां की अर्थ व्यवस्था दश वर्षीय माओवादी द्धन्द्ध के कारण पूरी तरह चरमरा चुकी है उस देश में कोई दूसरे देश का नागरिक क्यों आएगा नागरिकता ले कर हमेशा रहने के लिए ? इसी लिए यह देश देश माता नहीं पिता है । भले ही सभी नौ महीना मां के गर्भ मे रह कर जन्म लेते हो पर सोच, विचार और कार्यशैली से यह पूरी तरह पिताओं का देश है । यहाँ के लोगों की सोच में पिता है, देश के सत्ता में पिताओं का राज है । मां के नाम से नागरिकता देते ही इन पिताओं को यह लगता है कि वह दोयम दर्जे के नागरिक हो जाएगें और मां या महिला उनसे उपर यानी की प्रथम दर्जे की हो जाएगी । इसी से इस देश के पिता डरे हुए हैं कि कहीं इन का डिब्बा ही गोल न हो जाए । इसी लिए जिस मां के गर्भ से पैदा हुए हैं उसी को लात मारने से भी यह लोग पीछे नहीं हटेगें । इसी लिए अब से इस देश को नेपाल माता या नेपाल माता की जय कर इस की जयजयकार करना बदं कर देनी चाहिए । अब नेपाल पिता बोल कर जय जयकार करनी चाहिए । क्यों कि यहां के पिता जिस मां के गर्भ से पैदा हुए है उसी को अपमान करने से भी पीछे नहीं हटने वाले । पैदा करती है मां, बच्चे का पिसाब और पैखाना सब साफ करती है मां, बच्चे को उठाने, खिलाने पिलाने और सुलाने का सब काम करती है मां । बच्चे की बीमारी या तकलीफ में रात, रात जाग कर उस का ख्याल रखती है मां । लेकिन जब अपने ही कोख के जाए का परिचय दुनिया को देने के लिए उसके नागरिकता में मां को स्थान देनें में इतनी कोताही । यदि किसी बच्चे का पिता न हो या पिता ने न अपनाया हो तब जन्म देने वाली मां के नाम से उस बच्चे को नागरिकता देनें में इतनी झझंट क्यों ? क्या मां इस देश की नागरिक नहीं हैं ? अपने सतांनो पर उसका कोई हक नहीं है ? क्यों इस देश की सत्ता में पिता की मानसिकता काविज है ? क्यों इस देश की सत्ता कभी मां बन कर नहीं सोचता कि मां भी इस देश की नागरिक है और पिता के होने या न होने पर मां के नाम से उसके बच्चों को नागरिकता मिलनी ही चाहिए । दोयम दर्जे के मानसिकता वालें लोगों द्धारा बनाया गया इस देश के संविधान में महिलाओं को भी दोयम दर्जे का नागरिक बनाया गया है । इसी लिए यह पिताओं का देश है, मां हासिए पर चली गई हैं । अब से हर जगह इसको नेपाल आमा या नेपाल माता नहीं नेपाल बुवा या पिता बोलना चाहिए और स्कूल, कलेज के विद्यार्थियों को नेपाल पिता की जय पढाना चाहिए । इस की शुरुवात यहीं से कर ले । यह लेख पढ्ने वाले सभी मिल कर बोले नेपाल पिता की जय हो ।

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