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नेपाल–भारत मैत्री समाज द्वारा वर्तमान सरकार की प्राथमिकता और चुनौती विषयक कार्यक्रम अायाेजित

‘भारत के साथ मित्रवत संबंध विस्तार के अलावा कोई विकल्प नहीं’
काठमाडू, २८ मार्च ।

परराष्ट्र विज्ञ, राजनीतिज्ञ और बुद्धिजीवियों को कहना है कि अब इतिहास को भूलकर भी भारत के साथ मित्रवत संबंध विस्तार करने का दूसरा कोई भी विकल्प नहीं है । प्रधानमन्त्री केपीशर्मा ओली की भारत भ्रमण के पूर्वसन्ध्या में नेपाल–भारत मैत्री समाज द्वारा बुधबार काठमांडू में आयोजित ‘वर्तमान सरकार की प्राथमिकता और चुनौती’ विषयक विचार गोष्ठी में बोलते हुए वक्ताओं ने कहा है कि नेपाल–भारत दोनों देशों को मिलकर ही आगे बढ़ना है, दूसरा कोई भी विकल्प नहीं है । कार्यक्रम की अध्यक्षता समाज के अध्यक्ष  श्री प्रेम लश्करी ने किया ।
कार्यक्रम के प्रमुख अतिथि एवं परराष्ट्रमन्त्री प्रदीप ज्ञावली ने कहा कि २१वी शताब्दी के अनुसार विश्व जगत के लिए स्वीकार्य और समानता की आधार में नेपाल–भारत संबंध विस्तार होना चाहिए । विभिन्न देशों के कुटनीतिज्ञों के समक्ष मंगलबार प्रधानमन्त्री ओली द्वारा सार्वजनिक वर्तमान सरकार की ६ प्राथमिकता पर चर्चा करते हुए परराष्ट्रमन्त्री ज्ञावली ने कहा– ‘सार्वभौम सत्ता और खण्डता सरकारी पहली प्राथमिकता है । उसके बाद प्रजातन्त्र के प्रति प्रतिबद्धता, स्थिरता, शान्ति, भ्रष्टाचारों का अंत तथा सुशासन सरकार की प्राथमिकता है । इसी प्राथमिकता के आधार पर वर्तमान सरकार की विदेश नीति तय होगी ।’
इसीतरह पूर्व परराष्ट्रमन्त्री तथा राष्ट्रीय प्रजातन्त्र पार्टी (प्रजातान्त्रिक) के अध्यक्ष डा. प्रकाशचन्द्र लोहनी ने कहा कि अब नेपाल–भारत संबंध आर्थिक मुद्दों के आधार पर आगे बढ़ना चाहिए । डा. लोहनी ने कहा– ‘नेपाल–भारत बीच व्यापार में उच्च असन्तुलन है । कुल आयात–निर्यात में ९२ प्रतिशत आयात होता है और सिर्फ ७ प्रतिशत निर्यात । यह नेपाल के लिए तो चिन्ताजनक है ही, भारत के लिए भी चूनौतीपूर्ण है । इसीलिए ऐसी असन्तुलन को सन्तुलित बनाने के लिए भारत के पास राष्ट्रीय एजेण्डा और स्वार्थ होना चाहिए ।’ डा. लोहनी ने प्रधानमन्त्री ओली से आग्रह किया कि भारत भ्रमण में जाते वक्त वह भी इस मुद्दा को उठावें और समस्या समाधन के लिए पहल शुरु करे । उनका कहना है कि नहीं तो नेपाल आर्थिक रुप में आगे नहीं बढ़ सकता ।
कार्यक्रम को सम्बोधन करते हुए नेपाली कांग्रेस के नेता तथा पूर्वमन्त्री एवं राजदूत दीप कुमार उपाध्याय ने कहा कि वर्तमान सरकार शक्तिशाली है, इसीलिए इसके पास अवसर और चुनौती दोनों है । उन्होंने कहा कि अब सरकार इस तरह काम करें, जो जनता अनुभूति कर सके । सामाजिक अभियान्ता तथा बुद्धिजिवी डा. सुन्दरमणि दीक्षित को कहना है कि सरकार के पास अब बोलने का नहीं, काम करने का समय आ गया है । उन्होंने कहा– ‘नेपाल और भारत दोनों देश में अभी शक्तिशाली प्रधानमन्त्री हैं । अब मोदी और ओली चाहते हैं तो कुछ भी कर सकते हैं । डा. दीक्षित का मानना है कि जंगबहादुर राणा के बाद नेपाल में पहली बार ओली शक्तिशाली प्रधानमन्त्री के रूप में आगे आए हैं ।
इसीतरह कार्यक्रम को सम्बोधन करते हुए पूर्वराजदूत प्रो. जयराज आचार्य ने कहा कि सरकार की प्रथम प्राथमिकता विकास और आर्थिक समृद्धि संबंधी मुद्दा को लेकर होना चाहिए । प्रधानमन्त्री ओली द्वारा जारी ६ सुत्रीय प्राथमिकता पर चर्चा करते हुए उन्हों ने कहा– ‘हमारे प्रधानमन्त्री ने आर्थिक विकास संबंधी मुद्दा को ६ नम्बर बुंदा में रखा है । लेकिन मेरे खयाल से तो इस मुद्दा को १ नं. पर रखना चाहिए था । क्योंकि आर्थिक समृद्धि बिना कोई भी राष्ट्र सुरक्षित नहीं हो सकता ।’ उनका कहना है कि भारत और नेपाल दोनों देशों के लिए प्राथमिकता आर्थिक विकास ही है, इसीलिए दोनों देशों को साथ–साथ आगे बढ़ना चाहिए ।
पूर्वमन्त्री तथा सासद् हृदयेश त्रिपाठी को कहना है कि अब प्रतिबद्धता करना नहीं है, पुराने प्रतिबद्धता पूरा करने का समय आ गया है । उन्होंने कहा– ‘अब कोई भी नयां प्रतिबद्धता की आवश्यकता नहीं है । पूराने ही प्रतिबद्धता की ओर झांक लीजिए और उस को कार्यन्वयन कीजिए, वही काफी है ।’ सांसद त्रिपाठी का कहना है कि नेपाल–भारत संबंध को सिर्फ राजनीतिक दृष्टिकोण से देखना ठीक नहीं है, सामाजिक, सांस्कृतिक तथा जनस्तर के बीच जो संबंध है, उसको भी खयला रखना चाहिए ।
कार्यक्रम को सम्बोधन करते हुए नेकपा माओवादी केन्द्र के नेता तथा सांसद देवेन्द्र पौडेल ने कहा कि राजनीतिकस्तर में नेपाल–भारत के बीच जो अविश्वास है, उसको हल करना चाहिए । उन्होंने कहा– ‘जब नेपाल के मन्त्री तथा प्रधानमन्त्री भारत जाते हैं तो नेपाल की जनता शंका की दृष्टिकोण से देखते हैं लेकिन चीन अथवा अन्य देशों की भ्रमण में जाते हैं तो ऐसा नहीं होता । सिर्फ भारत के प्रति ही नेपाली जनता क्यों सशंकित हैं ? इसके संबंध में भारत क्या कहता है ? अब ऐसी आशंका खत्म होनी चाहिए, इसके लिए पहल करना होगा ।’ उन्होंने कहा कि अब इतिहास में जितनी भी गलती हुई है, उसको भूल कर नयां संबंध विस्तार करना चाहिए । सांसद पौडेल ने आगे कहा– ‘नेपाल में कुछ महत्वपूर्ण राजनीतिक एवं कुटनीतिक निर्णय किया जाता है तो कहा जाता है कि इसमें दिल्ली क्या कहती है ? उसका समर्थन रहेगा या नहीं ? भारत हो या चीन, अथवा बंगलादेश नेपाल स्वतन्त्र रुप में अपना संबंध विकास करना चाहती है ।’
कार्यक्रम के अंत में भारतीय राजदूत माननीय मनजीव पूरी ने कहा कि शक की कोई वजह नहीं है । भारत हमेशा से नेपाल के साथ है । नेपाल के हर विकास के कदम पर नेपाल को भारत का पूरा सहयोग मिलेगा । किसी भी योजनाओं को लेकर भारत सकारात्मक है । नेपाल के पर्यटन में भारत प्रत्यक्ष तौर पर सहयोगी है । सबसे अधिक भारतीय पर्यटक नेपाल आते हैं और भारत ने हमेशा इसे बढावा दिया है जो नेपाल के आर्थिक विकास में सहयोगी सिद्ध होता है ।
डा. प्रवीण मिश्र ने मधेश के मुद्दो को उठाते हुए कहा कि वर्तमान सरकार की सबसे बड़ी चुनौती मधेश समले का समाधान करना है । सरकार अगर शक्तिशाली है तो उसे यह सिद्ध करना होगा ।
कार्यक्रम में हरिवंश झा, डा. प्रविण मिश्र, पुरुषोत्तम ओझा, ज्ञानचन्द्र आचार्य, हिसिला यमी ने भी वर्तमान सरकार की प्राथमिकता और चुनौती के संबंध में अपनी–अपनी धारणा व्यक्त किया ।

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