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नेपाल–भारत संबंधः नयां चुनौती के लिए परम्परागत नीति काफी नहीं हैः राणा

                                                        पशुपति शमशेर राणा, अध्यक्ष, राष्ट्रिय जनता पार्टी, (प्रजातान्त्रिक)

काठमांडू, जनवरी २८ । भारतीय प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी एक सफल प्रधानमन्त्री के रुप में परिचित हो रहे हैं, उनका कार्यकाल सफल बन रहा है । अर्थात् मोदीजी आर्थिक तथा राजनीतिक मुद्दों पर सफल बन रहे हैं । भारत नेपाल का एक दोस्त है, पड़ोसी राष्ट्र है, उसकी सफलता हमारे लिए भी लाभदायक बन सकता है । क्योंकि भारत सफल हो जाता है तो उसका लाभ नेपाल भी ले सकता है ।
नेपाल और भारत के बीच सदियों से सामाजिक तथा सांस्कृतिक संबंध रहा है, जो राजनीतिक शक्ति से अधिक मजबूत है । लेकिन कभी–कभार आपसी संबंध में कुछ वैमनस्यता भी दिखाई देता है । इसके पीछे हमारे बीच रहे मजबूतीयां भी है । क्योंकि जो नजदिक होते हैं, उसके बीच कभी–कभार आपसी मतभेद भी होता है । हां, नेपाल और भारत के बीच सामाजिक तथा सांस्कृतिक संबंध तो मजबूत है, लेकिन आर्थिक तथा राजनीतिक दृष्टिकोण से कुछ असमझदारी दिखाई देता है । जिसके चलते भी हमारे यहां नकारात्मक टिका–टिप्पणियां होती है । मुझे लगता है कि अब इस तरह की टिप्पणियां भी सम्बोधन होना चाहिए ।
नेपाल–भारत संबंध को और मजबूत बनाना है तो अर्थ–राजनीतिक प्रभाव के बारे में बहस होना चाहिए । परम्परागत सामाजिक और सांस्कृतिक संबंध ही अब नेपाल और भारत को आगे नहीं बढ़ा पाएगा । अब नीतिगत और नयां संबंध विस्तार में जोर दोना पड़ेगा । क्योंकि नेपाल–भारत बीच जो नयां चुनौती दिखाई दे रहा है, उसको सामना करने के लिए परम्परागत नीति काफी नहीं है ।

(भारत के ६९वें गणतन्त्र दिवस के अवसर पर नेपाल भारत मैत्री समाज द्वारा काठमांडू में आयोजित कार्यक्रम में व्यक्त विचारों का संपादित अंश)

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