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नेपाल–भारत सम्बन्ध पर विकास मञ्च द्वारा वृहत विचार गोष्ठी


काठमांडू, १६ मार्च । नेपाल–भारत विकास मञ्च ने नेपाल–भारत सम्बन्ध पर एक विचार गोष्ठी आयोजन किया है । ‘वर्तमान परिवेश में नेपाल–भारत सम्बन्ध’ शीर्षक में आयोजित विचार–विमर्श कार्यक्रम में वक्ताओं ने नेपाल–भारत सम्बन्ध के विभिन्न आयाम पर चर्चा की । वक्ताओं का कहना है कि नेपाल–भारत सम्बन्ध को अधिक मजबूती प्रदान करने के लिए नए सिरे से सोचना जरुरी है ।
कार्यक्रम में हिमालिनी मासिक पत्रिका के सम्पादक डा. श्वेता दीप्ति ने ‘सांस्कृतिक रिश्तों की गहरी नींव है नेपाल और भारत के सम्बन्धों में’ शीर्षक से एक कार्यपत्र प्रस्तुत किया । कार्यपत्र में नेपाल–भारत बीच के समान सांस्कृतिक–धार्मिक–सामाजिक सम्बन्ध ऐतिहासिक–राजनीतिक सम्बन्ध, व्यापारिक तथा आर्थिक सम्बन्ध और सम–सामयिक विविध समस्याओं के बारे में चर्चा की गई थी । इसी कार्यपत्र पर आधारित रहकर विभिन्न वक्ताओं ने अपनी–अपनी धारणा व्यक्त की ।
कार्यक्रम के प्रमुख अतिथि संघीय समाजवादी फोरम नेपाल के अध्यक्ष उपेन्द्र यादव ने कार्यक्रम को सम्बोधन करते हुए कहा कि दोंनों देशों के रिश्ते बहुआयामिक है, जो दुनियां में कम मिलता है । भारत और नेपाल के बीच खून का भी रिश्ता है, ऐसी चर्चा करते हुए अध्यक्ष यादव ने आगे कहा– ‘आज की आवश्यता इन रिश्तों को बना कर रखना है और अन्य सम्वेदनशील मुद्दों को सुलझाकर आगे बढ़ना है । फोरम अध्यक्ष ने कहा है कि भारत अपनी सुरक्षा सम्वदेनशीलता के प्रति सजग है, उस सम्वेदनशीलता को सम्बोधन नेपाल को करना चाहिए और भारत को भी नेपाल की समस्याओं पर ध्यान देना आवश्यक है ।


अध्यक्ष यादव ने कहा कि अब रोटी–बेटी सम्बन्ध का नारा देकर दो देशों को आगे नहीं बढ़ाया जा सकता । उन्होंने कहा– ‘अब विकास में साझेदारी होनी चाहिए । भारत की तरक्की का नेपाल को भी फायदा होना चाहिए ।’ उनका मानना है कि शान्ति और स्थायित्व के लिए भारतीय सहयोग अपरिहार्य है । पूर्व पराष्ट्रमन्त्री भी रहे अध्यक्ष यादव ने आगे कहा– ‘रिश्तों को छोटी सोच के साथ नहीं बल्कि खुले दिल से देखना चाहिए ।’
इसीतरह कार्यक्रम को सम्बोधन करते हुए नेकपा एमाले के सचिव योगेश भट्टराई ने कहा कि जिस तरह भारतीय जनता को अपनी स्वतन्त्रता प्यारी है, उसी तरह नेपाल को भी अपनी स्वतन्त्रता प्यारी है । भारत की आजादी में नेपाली नेताओं की योगदान पर चर्चा करते हुए सचिव भट्टराई ने कहा कि नेपाल के लोकतान्त्रिक व्यवस्था के सुदृढीकरण में भारत का समर्थन रहा है । लेकिन उनका मानना है कि खुली सीमा कभी कभी रिश्ते को ठंडा करती है । सचिव भट्टराई ने आगे कहा– ‘हम अपने मित्र राष्ट्र के प्रति मित्रता रखना चाहते हैं और इसके लिए हमारी सरकार प्रतिबद्ध हैं ।’ दोनों देशों के नागरिक लाखों की संख्या में एक दूसरे देश में रोजगार कर रहे हैं, इस बात पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा– ‘२१वीं शताब्दी में भी हमें यह देखना होगा कि हमारे नागरिक भारत की सुरक्षा से आवद्ध हैं, इसका मूल्यांकन भारत को करना होगा ।’


इसीतरह नेकपा माओवादी केन्द्र के नेता शक्ति बस्नेत ने कहा कि नेपाल–भारत बीच जो सामाजिक तथा सांस्कृतिक सम्बन्ध है, उसको कायम रखते हुए राजनीतिक रुप से नयां सिरे से सम्बन्ध विकसित करना होगा । उनका मानना है कि खुली सीमा क्षेत्र के कारण नेपाल–भारत सम्बन्ध में कोई भी समस्या न आए । इसतरह नेपाली कांग्रेस के नेता तथा पूर्व पराष्ट्रमन्त्री डा. प्रकाशशरण महत का कहना है कि किसी भी विदेश नीति सडक से निर्देशित नहीं होना चाहिए । नेपाल के कुछ राजनीतिक पार्टी की ओर लक्षित करते हुए उन्होंने कहा– ‘नेपाल में कुछ ऐसे राजनीतिक पार्टी भी हैं, जो अपने क्षणिक राजनीतिक लाभ के लिए भारत को अनावश्यक गाली देते हैं और सम्बन्ध में विरोधाभाष पैदा करते हैं । उनका कहना है कि दो देशों के आपसी सम्बन्ध कुटनीतिक माध्यम से हल करना चाहिए । डा. महत ने कहा– ‘अगर हम लोग दिल खोल कर अपनी–अपनी समस्या एक दूसरे के समक्ष रखते हैं तो समस्या और आशंका नहीं रहेगी । उनका मानना है कि भारत की सुरक्षा सम्बेदनशीलता को सम्बोधन करना नेपाल की कर्तव्य है और भूपरिवेष्ठित राष्ट्र नेपाल की समस्या को सम्बोधन करना और उसकी अधिकार दिलना भारत की कर्तव्य है ।
कार्यक्रम कें विशिष्ठ अतिथि नेपाल स्थित भारतीय दूतावास के डीसीएम डा. अजय कुमार ने कहा कि नेपाल का विकास और आर्थिक समृद्धि के लिए भारत हरदम सहयोग के लिए तैयार है । भारतीय प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी का कथन ‘सबका साथ, सबका विकास’ पर चर्चा करते हुए उन्होंने आगे कहा– ‘अगर हम लोग मिलकर आगे बढ़ते हैं तो हमारी विकास और प्रगति भी साथ साथ आगे बढ़ सकती है ।’


कार्यक्रम को सम्बोधन करते हुए राष्ट्रीय जनता पार्टी के नेता तथा सांसद् लक्ष्मणलाल कर्ण ने कहा कि नेपाल–भारत सम्बन्ध राजनीतिक और कूटनीतिक सम्बन्ध में सीमित नहीं है । उनका मानना है कि सामाजिक और सांस्कृतिक रूप में नेपाल–भारत की जनता के बीच हजारों साल का सम्बन्ध हैं, जहां राजनीतिक सीमाएं बाधक नहीं है । लेकिन उन्होंने कहा कि अभी आकर राजनीतिक कारण कुछ समस्या दिखाई दिया है । विशेषतः वैवाहिक नागरिकता सम्बन्धी प्रसंग को लेकर उन्होंने कहा– ‘भारत से जो बेटी हमारे बहु बनकर आती है, उनको नागरिकता तो दिया जाता है, लेकिन अधिकार नहीं । इसीलिए भारत के जो व्यक्ति नेपाल के संविधान को जानती है, वह भारतीय अपनी बेटी और बहन को नेपाल में शादी नहीं करते ।’ सांसद कर्णका मानना है कि इस तरह का नागरिकता और अधिकार सम्बन्धी विभेद अन्त होना चाहिए ।
कार्यक्रम नेपाल भारत विकास मञ्च के सभापति रामकिशोर सिंह के सभापतित्व में सम्पन्न हुआ था ।

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