Sun. Oct 21st, 2018

पटना में मौत की संक्रांति: गंगा में धंसी अोवरलोड नाव, अबतक सत्रह शव निकाले गए

patana
*पटना.मधुरेश*14 जनवरी।- विश्व के पैमाने पर प्रकाशोत्सव की सफलता को लेकर बधाई की पात्र बनी बिहार सरकार और सीएम नितीश कुमार के माथे पर आज शनिवार की शाम एक बड़ा कलंक लग गया।राजधानी पटना मकर संक्रांति के दिन बड़े हादसे का गवाह बना। पटना स्थित गंगा नदी के एन आई टी घाट के समीप शनिवार की देर शाम हुए हुए नाव हादसे में चालीस से ज्यादा लोग डूब गये। एनडीआरएफ टीम की मदद से इस हादसे में लापता लोगों में से अबतक सत्रह लोगों के शव बरामद किये जा चूके हैं। इस हादसे में मृतकों की संख्या बढ़ने का भी अनुमान है। इतने बड़े नाव हादसे ने प्रशासन के सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल कर रख दी है। मकर संक्रांति के अवसर पर गंगा दियारा में आयोजित पतंग महोत्सव में शामिल होने गए हजारों लाेग बोट का पाथ-वे धंस जाने के कारण वहां कड़ाके की ठंड में फंस गए। उन्हें ला रही एक नाव भी एनआइटी घाट पर डूब गई, जिसमें करीब चालीस लोगों के डूबने की आशंका है।

फोटो~रात के अंधेरे में हादसे के शिकार लोगों को नदी में तलाशती एनडीआरएफ की टीम।
फोटो~रात के अंधेरे में हादसे के शिकार लोगों को नदी में तलाशती एनडीआरएफ की टीम।

खास बात यह है कि प्रशासन के आला अधिकारी नेताओं के दही-चूड़ा भोज में इतने व्यस्त हो गए कि उन्हें घटना की गंभीरता का भान तक नहीं हुआ। लचर प्रशासनिक व्यवस्था के बीच लोग किसी तरह दियारा से निकलकर ओवरलोड नौकाओं में आते रहे। इन्हीं में से एक नौका डूब गई। अभी भी दियारा में सैकड़ों लोग कड़ाके की ठंड में फंसे हुए हैं। घटना को देखते हुए चार दिनों तक चलने वाले पतंग महोत्सव को रद्द कर दिया गया है।

*?दो घंटे बाद पहुंचे डीएम-एससपी*

विलंब से शुरू हुए राहत व बचाव अभियान को लेकर लोगों में आक्रोश है। इस बीच दस लोगों को पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल लाया गया है, जिनमें एक महिला की मौत हो चुकी है। डीएम संजय कुमार अग्रवाल घटना स्थल पर पहुंच चुके हैं।

*?घटना-स्थल पर तनाव*

घटनास्थल पर भारी भीड़ उमड़ पड़ी है। स्थानीय लोग व इलाके में रहने वाले छात्र उमड़ पड़े हैं। माहौल तनाव का है। स्थानीय लोगों की मानें तो नाव पर डेढ़ सौ से अधिक लोग सवार हो गए थे।

*?घटनाक्रम, एक नजर*

मकर संक्रांति के अवसर पर पटना के दियारा में पतंग महाेत्सव की परंपरा रही है। लेकिन, इस बार वहां अव्यवस्था का आलम रहा। दियारा का बोट पाथ-वे धंस जाने के कारण वहां गए हजारों लाेग कड़ाके की ठंड में फंस गए। प्रशासन ने उन्हें निकालने की गंभीर कोशिश नहीं की। इस बीच लोग ओवरलोड नौकाओं में लौट रहे हैं।

प्रशासन का दावा है कि उन्हें निकालने के लिए युद्ध स्तर पर प्रयास जारी है। लेकिन दिन ढ़लने के साथ ठंड बढ़ती जा रही है, जिससे अभी भी वहां फंसे सैकड़ों लोगों की परेशानी बढ़ गई है। उनमें बच्चे-बूढ़े व महिलाएं भी शामिल हैं।

इस बीच दियारा से लौटती एक नाव शनिवार देर शाम एनआइटी घाट के पास गंगा में डूब गई। नाव अचानक नदी में धंस गई। इसके बाद दर्जनों लोग तैरकर बाहर निकले, लेकिन प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि अभी भी करीब तीन दर्जन लोग लापता हैं। उन्हें निकालने के लिए एनडीआरएफ या एसडीआरएफ की टीम मौजूद नहीं थी।

विलंब से आरंभ राहत व बचाव कार्य के दौरान अभी तक आठ लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है, जबकि एक महिला समेत सत्रह लोगों के मौत की आधिकारिक पुष्टि हो चुकी है।

यहां खास बात यह भी है कि प्रशासन ने पूरे घटनाक्रम को हल्के में लिया। पहले यह बताया गया कि छह लोग डूबे, जिन्हें बचा लिया गया। बाद में घटना की भयावहता सामने आई। नाव हादसे के बाद जगी सरकार ने घायलों का मुक्कमल इंतजाम करने के साथ ही राहत एवं बचाव कार्य तेज कर दिया है। सीएम नीतीश कुमार ने नाव हादसे पर दुख व्यक्त करते हुए इसके जांच के आदेश दिए हैं। इस हादसे के बाद सूबे की प्रमुख विपक्षी पार्टी भाजपा सरकार पर हमलावर हो गयी है। विरोधी दल के नेता डा. प्रेम कुमार ने घटना स्थल का दौरा करने के बाद पीएमसीएच पहुंच कर घायलों का हालचाल लिया। मिडिया से बातचीत में उन्होंने सरकार पर लापरवाही बरतने का आरोप लगाया। डा. कुमार ने कहा कि सरकार सिर्फ अपनी ब्रांडिंग में लगी है। उन्होंने सवालिया लहजे में कहा कि दियारा में जब आयोजन बड़ा था तो इंतजाम मुक्कमल क्यूं नहीं हुआ। उन्होंने सरकार से नाव हादसे में लापता लोगों की खोज तेज करने तथा घायलों के समुचित इलाज की मांग की है।

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