Thu. Nov 15th, 2018

“पाकिस्तान भूटान या नेपाल नहीं है” परवेज मुसर्रफ की उक्ति पर नेपाल चुप क्यों : श्वेता दीप्ति

खुश रहो, क्योंकि उनके जेब भरे हुए हैंश्वेता दीप्ति, १९-०१६,  (सम्पादकीय,अक्टूबर अंक),
शारदीय नवरात्र की छटा हर ओर बिखरी है, बाजारों में, मंदिरों में और हमारे जेबों पर भी । व्यापारी मनोनुकूल पैसे वसूल कर रहे हैं और सरेआम हमारी जेबों पर डाका डाल रहे हैं । किन्तु कहीं कोई पाबन्दी या चौकसी सरकार की ओर से नहीं दिख रही है । घर जाने वाले चाहे अनचाहे दोगुना किराया देकर भी जाने के लिए बाध्य हैं, आखिर कर भी क्या सकते हैं ? जिस तरह हर वर्ष पर्व आता है उसी तरह जनता के ठगे जाने का मौसम भी आता है और जानबूझकर लोग ठगे भी जाते हैं । खैर, यह तो आम बात है ।

Shweta Deepti
श्वेता दीप्ति

इससे परे देश की दशा की बात करें तो कुछ खास बातें नजर नहीं आएँगी क्योंकि न तो राजनीति में संलग्न नेताओं ने कोई परिवर्तन किया है और न ही जनता की स्थिति में कोई बदलाव आया है । समाचार पत्रों में अगर चर्चा का विषय कुछ बन रहा है तो वह है आए दिन होने वाली सड़क दुर्घटनाएँ । हर रोज जानें जा रही हैं किन्तु सम्बन्धित निकाय असक्षम बना हुआ है ।
आतंकवाद के नाम पर नेपाल सरकार की खामोशी चिन्ताजनक है । क्या शासनतंत्र को अपनी सुरक्षा व्यवस्था पर इतना यकीन है कि इस ज्वलन्त समस्या से वह अपने आपको अलग रखना चाह रहा है । भारत में हुए आतंकी हमले के बाद जहाँ विश्व उसके साथ खड़ा है वहीं नेपाल अपना पल्ला झाड़े हुए है । जिसतरह भारत अपनी सुरक्षा को लेकर चिंतित है और सम्पूर्ण विश्व को आतंकवाद से लड़ने के लिए एक कर रहा है क्या वहाँ नेपाल की कोई भूमिका नहीं है ? देर से ही सही भारत में हुए उरी हमले पर नेपाल ने भी यूएनए में अपनी आपत्ति जतायी है । गौर तलब है कि परवेज मुसर्रफ की उक्ति कि “पाकिस्तान भूटान या नेपाल नहीं है” इस पर भी कोई सवाल नहीं उठा, फिर भी चुप्पी है । कम से कम उनकी ओर से जो उग्र राष्ट्रवाद के पोषक हैं । यहाँ तो सीधा सवाल नेपाल के स्वतंत्र अस्तित्व से सम्बद्ध था ।
मधेश आन्दोलन अपनी बरसी मना रहा है, किन्तु हाथ उसके अब भी खाली हैं । संविधान संशोधन का सवाल आज तक हल नहीं हो पाया है और एमाले सिर्फ पहाड़ को लेकर चलने की मंशा में दिखाई दे रहा है । वर्तमान सरकार के नौ महीने बहुत जल्द पूरे होने वाले हैं और परिणाम सिफर है—क्या हुआ जो तुम्हें कुछ मिला नहीं, खुश रहो, क्योंकि उनके जेब भरे हुए हैं ।
हिमालिनी की ओर से महाल्या की अशेष शुभकामनाएँ ।


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Dr sanjay kr sah
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Dr sanjay kr sah

What nepali politician can do wothout speech so they may thought it’s better to keep quiet