Thu. Nov 15th, 2018

प्रदेश चाहिए, या देश ?

प्रदेश चाहिए, या देश ?
गंगेश मिश्र
ज़रा ठहरो !
फ़ैसला कर लो;
प्रदेश चाहिए,
या देश ?
या यूँही दौड़ते,
भागते रहोगे;
अंधे घोड़े के मानिन्द।
लगाम रखो हाथ में,
निष्ठा हो साथ में;
धीरता हो,
दृढ़ता हो,
वीरता हो, सारथी।
भर पेट भोजन,
पेट भरा,
अलमारी में,
नोट ख़रा।
तब तो हो चुका,
पा चुके अधिकार।
भूख जगाओ,
प्यास बढ़ाओ,
चलो मिल कर साथ,
स्वार्थ त्याग,
मुट्ठी बन;
तन की आहूति, को तत्पर।
तब तय करना,
प्रदेश चाहिए,
या देश ?

आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.

Leave a Reply

avatar
  Subscribe  
Notify of