Mon. Dec 17th, 2018

प्रदेश सांसद् महतो का आक्रोशः संघीय सरकार की नश्लीय चिन्तन के कारण सम्झना की जान चली गई

काठमांडू, २४ सितम्बर । प्रदेश नं. २ के सांसद् उपेन्द्र महतो ने दावा किया है कि संघीय सरकार की विभेदकारी नीति और नश्लीय चिन्तन के कारण ही सम्झना दास की निधन हो गई है । उन्होंने कहा है कि अगर संघीय सरकार घटना के प्रति संवेदनशील रहता तो सम्झना की जान बच सकती थी । स्मरणीय है, गत भाद्र २६ गते रौतहट जिला चन्द्रपुर नगरपालिका निवासी जादोलाल दास की दो बेटियों (सम्झना दास और सुस्मिता दास) के ऊपर रात के समय में एसिड आक्रमण हुआ था । शरीर में एसिड लगने से गम्भीर घायल दोनों को उपचार के लिए अस्पताल भर्ती की गई थी, लेकिन उपचार के दौरान ही आइतबार रात में १६ वर्षीय सम्झना ने दम तोड़ दी । इसी घटना को लेकर प्रदेश नं. २ के सांसद् केन्द्र सरकार के प्रति आक्रोशित बन गए हैं ।


प्रदेश सांसद उपेन्द्र महतो ने अपने फेशबुक स्टाटस में लिखे हैं– ‘२०७१ चैत्र १० गते सीमा बस्नेत और संगीता मगर के ऊपर बसन्तपुर में एसिड आक्रमण हुआ था, उस वक्त सरकार ने सम्पूर्ण खर्च देकर उपचार किया था । लेकिन आज प्रधानमन्त्री कार्यालय में पीडित पक्ष की ओर से घटना संबंधी विवरण पंजीकृत करते हुए सहयोग के लिए मांग किया गया, हफ्तो हो गया है, लेकिन अभी तक संघीय सरकार ने कोई भी सुनुवाई नहीं की है । क्या यह संघीय सरकार की नश्लीय भेदभाव नहीं है ?’
नेता महतो ने यह भी उल्लेख किया है कि गत शनिबार ही प्रदेश नं. २ के मन्त्री राम नरेश राय और उनकी ओर से पीडित किशोरी को उपचार के लिए ५०–५० हजार दिया गया था और थप सहयोग के लिए बचन दिया गया था ।
घटना में गम्भीर घायल १३ वर्षीय सम्झना की बहन सुस्मिता की उपचार कीर्तिपुर अस्पताल में जारी है । पीडित युवती के पिता जदोलाल ने एसिड आक्रमण करनेवालों को फांसी की मांग किया है । साथ में उन्होंने यह भी कहा कि उनके ऊपर राज्यक की ओर से कोई भी सहयोग नहीं मिल रही है ।
एसिड आक्रमण करनेवाले स्थानीय युवक रामबाबु पासवान को पुलिस ने गिरफ्तार किया है । सम्झना ने कहा था कि पासवान ने उनके साथ यौन संबंध ने प्रस्ताव किया था, लेकिन अस्वीकार किया । अनुमान है कि यौन प्रस्ताव अस्वीकार करने पर ही पासवान ने ऐसी हरकत की है ।

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