Wed. Oct 17th, 2018

प्रबुद्ध समूह नेपाली पक्ष द्वारा खतरनाक प्रस्ताव पेश, मधेश पर फिर खतरा

नेपाल भारत प्रबुद्ध समूह के नेपाली सदस्य

काठमांडू, ८ अक्टूबर | चर्चा में, खतरनाक प्रस्ताव :

नेपाल की ओर से नेपाल-भारत प्रबुद्ध समूह (ईजीपी) नेपाली पक्ष द्वारा मधेश को लक्षित करते हुये एक खतरनाक प्रस्ताव पेश किया गया है | लिखित रूप में पेश किया गया प्रस्ताव में नेपाल भारत की सीमा को भी पूर्णव्यबस्थित करने को कहा गया है | जिससे की अब भारत में जाने पर भिसा भी लग सकता है | स्पष्ट है कि इसका सबसे बड़ा असर मधेश पर ही पड़ेगा | पिछला ओली सरकार द्वारा तैयार की गई मधेश निति को ही नेपाली पक्ष द्वारा नेपाल-भारत प्रबुद्ध समूह (ईजीपी) की बैठक में पेश की गई है | हलाकि दोनों पक्ष द्वारा इस विषय पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी जा रही है | लेकिन दिल्ली में चर्चा में आई खबर अनुसार इसपर बैठक में जमकर बहस हुई | खबर अनुसार भारतीय पक्ष के एक सदस्य ने इस विषय को पब्लिकली सार्बजनिक बहश करवाने पर जोड़ दिया | लेकिन नेपाली पक्ष सार्बजनिक बहश करवाने से पीछे हट गयें | और इस विषय पर आंतरिक विचार विमर्ष कर के ही आने वाले बैठक में लाने पर जोड़ दिया है | नेपाल की ओर से लिखित रूप में सीमा को व्यबस्थित करने का प्रस्ताव पहली वार पेश किया गया है | नेपाल-भारत प्रबुद्ध समूह (ईजीपी) नेपाली पक्ष के सदस्य में बिदेश निति एक्सपर्ट भेष बहादुर थापा , पूर्व मन्त्री नीलाम्बर आचार्य, कानून बिद राजन भट्टराई तथा अख्तियार दुरूपयोग के पूर्व आयुक्त सूर्यनाथ उपाध्याय हैं | भारतीय पक्ष के सदस्य में कानूनविद भगत सिंह कोसियर , पूर्व राजदूत जयंत प्रसाद , प्रो.बीसी उप्रेती तथा महेन्द्र प्र. लामा हैं |

नेपाल और भारत के बीच में १९५० की शान्ति तथा मैत्री संधि को पुनरावलोकन होने की बात यहाँ की मिडिया में बताई जा रही है | इस सम्बन्ध में पिछले मगंलवार और बुधवार को नई दिल्ली में नेपाल-भारत प्रबुद्ध समूह (ईजीपी) की बैठक हुई थी | बैठक में दोनों पक्ष द्वारा संधि को पुनरावलोकन करने पर सैद्धान्तिक सहमति होने की बात बताई गई है | संधि को पुनरावलोकन के लिए नेपाली पक्ष द्वारा रखे गये प्रस्ताव पर कुछ और अध्ययन करके इसे अंतिम रूप देने पर भारतीय पक्ष सहमत हुई है | ६६ वर्ष पहले हुई इस संधि पर नेपाल की ओर से कुछ दफा में संशोधन भी रखा गया है | नेपाल ने अपनी और से पहली बार ऐसा संशोधन रखा है | इससे पहले भारत की ओर संधि संशोधन का प्रस्ताव ठोस रूप से लेन को कहा जा रहा था | नेपाली प्रबुद्ध समूह के सदस्य राजन भट्टराई ने भारतीय पक्ष इस पर सहमति होना नेपाल की महत्वपूर्ण उपलब्धि बताई है | उनके अनुसार संधि संशोधन का विषय अब एक कदम आगे बढ़ा है |

 

 

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C.N. Khadga
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C.N. Khadga

पहाडी शासकवर्ग हमेशा से मधेशियों के प्रति पुर्वाग्रही रहा है जिसके चलते हर समय मधेशियों दु:ख पहुचाने के लिए कुछ न कुछ प्रयास करते हि रहते हैं । नेपाल – भारत के बिच विसा लगाने का सोच इसि का एक कडि है । खुला सिमा के चलते मधेशियों को भारतिय बाजारों से सुविधा मिलती है वह पहाडी शासक देख नहीं सकते और मधेश के जनता का सिमावर्ती भारतियों के साथ रहे पारम्परिक पारिवारिक सम्बन्ध के परम्परा को तोड मधेशियों को कमजोर करने कि साजिस रच रहे हैं ।

C.N. Khadga
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C.N. Khadga

यह प्रवुद्ध वर्ग (EPG) समावेशी नहोने पर हमने पहले ही इसका विरोध करते हुवे इसमे आधा मधेशी विद्वानो को रखने का माग किया था । क्योंकि सभी नेपाल-भारत संधी अधिकतर मधेश से संबंधित है । पर ऐसा नहि हुवा । पहाडी शासकवर्ग हमेशा से मधेशियों के प्रति पुर्वाग्रही रहा है जिसके चलते हर समय मधेशियों को दु:ख पहुचाने के लिए कुछ न कुछ प्रयास करते हि रहते हैं । नेपाल – भारत के बिच विसा लगाने का सोच इसि का एक कडि है । खुला सिमा के चलते मधेशियों को भारतिय बाजारों से जो सुविधा मिलती है वह पहाडी शासक… Read more »