Mon. Sep 24th, 2018

प्रेमचंद की जयंती: धनिया, होरी, घीसू …आज भी सब वहीं के वहीं खड़े हैं…

अशोक मिश्र | महाराष्ट्र का एक बड़ा हिस्सा विदर्भ कहलाता है, जो कि आर्थिक और सामाजिक दृष्टि से बेहद पिछड़ा हुआ है। इसकी एक वजह यह भी है कि इस संभाग में बड़े उद्योग नहीं है। विदर्भ ही वह हिस्सा है, जहां से आए दिन किसान आत्महत्या की खबरें उनकी दारुण स्थिति को बयां करती हैं। 31 जुलाई को हिंदी के महत्वपूर्ण कथाकार प्रेमचंद की जयंती है। प्रेमचंद एक ऐसे लेखक रहे, जिन्होंने किसानों के दुख-दर्द को अपनी रचनाओं में सबसे अधिक उकेरा है।

हालात जस के तस हैं, जरा भी नहीं सुधरे हैं…

जाहिर है कि प्रेमचंद की मृत्यु के आठ दशक बीतने के बाद भी किसानों के हालात जस के तस हैं, जरा भी नहीं सुधरे हैं। यही कारण है कि प्रेमचंद की रचनाएं आज भी प्रासंगिक और पठनीय हैं। प्रेमचंद ने लगभग तीन सौ कहानियां लिखीं और 14 छोटे-बड़े उपन्यास लिखे। उनका पूरा जीवन गांव के एक किसान मजदूर की तरह बीता। बनारस के गांव लमही में 31 जुलाई 1880 को जन्में मुंशी प्रेमचंद का वास्तविक नाम धनपत राय था। प्रेमचंद दुनिया में आज भी हिंदी के सबसे बड़े उपन्यासकार के रूप में प्रसिद्ध हैं। प्रेमचंद का निधन 8 अक्टूबर 1936 को हुआ था।

उनका जीवन ही संघर्षों से भरा रहा…

ग्रामीण समस्याओं, विषमताओं, आर्थिक दुष्चक्र में फंसे लोगों, साहूकार से पिसते किसानों और जमींदारों की मार और बेगार से पीड़ित किसानों, ग्रामीण जनजीवन का जो खाका उन्होंने उकेरा वह किसी अन्य कथाकार की कहानियों में नहीं मिलता, क्योंकि उनका जीवन ही संघर्षों से भरा रहा, इसलिए उन्हें सारे पात्रों से सहानुभूति रही और उन्होंने बड़ी ईमानदारी के साथ उसे चित्रित किया है।

‘गोदान’ को विश्व के सर्वश्रेष्ठ उपन्यासों में से एक

उनके अंतिम प्रकाशित उपन्यास ‘गोदान’ को विश्व के सर्वश्रेष्ठ उपन्यासों में से एक माना गया। ‘निर्मला’, ‘रंगभूमि’ तथा ‘कायाकल्प’ प्रेमचंद के अन्य चर्चित उपन्यास हैं। ‘कर्बला’,‘संग्राम’ तथा ‘प्रेम की वेदी’ नामक नाटक भी प्रेमचंद ने लिखे हैं, जिनमें ग्रामीण जीवन की झांकी है।

सामंतशाही की क्रूरता

इन सबमें लोगों पर होने वाले अत्याचार, पाप, भ्रष्टाचार और मक्कारी का चित्रण है तथा दूसरी ओर अफसरशाही, सामंतशाही की क्रूरता को भी उघाड़ा गया है। प्रेमचंद की कहानियों के पात्र और संवाद आज भी जीवंत हैं। आज भी धनिया, होरी, घीसू कहीं भी किसी भी गांव में देखे जा सकते हैं।

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