Sat. Nov 17th, 2018

प्रोटोकल तोडकर जपानी प्रधानमन्त्री पहुँचे मोदी का स्वागत करने

Modi aabeनई दिल्ली। भूटान, ब्राजील और नेपाल का दिल जीतने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को दोपहर डेढ़ बजे ओसाका एयरपोर्ट पहुंचें। यहां पर उनकी आगवानी के लिए पहले से ही जापान के प्रधानमंत्री मौजूद थे। यहां से वह क्योटो जाएंगे, जो यहां से करीब चालीस किमी दूर है।

मोदी की पांच दिन की इस यात्रा से दोनों देशों को काफी उम्मीदें हैं। उम्मीद है कि मोदी जापान यात्रा में रिश्तों की एक नई इबारत लिखेंगे। प्रधानमंत्री सीधे जापान की अध्यात्मिक नगरी कहे जाने वाले क्योटो शहर पहुंचेंगे। यहां जापानी प्रधानमंत्री शिंजो अबे खुद मोदी का स्वागत करेंगे। यहां मोदी रिश्तों की एक नई परिभाषा लिखेंगे, विकास का नया पैमाना गढ़ेंगे।

यहां पर होने वाली बातचीत से पहले यह साफ कर दिया गया है कि भारत अपने परमाणु सिद्धांतों की समीक्षा नहीं करेगा। इस दौरान होने वाली वार्ता में दोनों देशों के बीच ढांचागत विकास के मुद्दे पर अधिक जोर दिया जाएगा। इसके अलावा उम्मीद यह भी है कि दोनों देशों के बीच रक्षा और परमाणु ऊर्जा पर भी कोई समझौता हो जाए।

पांच दिन की इस यात्रा में मोदी पुरानी दोस्ती का रंग और गाढ़ा करेंगे। जापान से एफडीआइ दोगुना करने की कोशिश करेंगे। भारत के पास जमीन है और जापान के पास तकनीक। मोदी इसे जोड़कर मेड इन इंडिया का सपना पूरा करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ेंगे।

प्रधानमंत्री मोदी ने जापान की जो उड़ान भरी है। ये उड़ान सिर्फ नरेंद्र मोदी की ही नहीं, उनके साथ देश की तमाम उम्मीदों और संभावनाओं की भी उड़ान है। मोदी की जापान यात्रा दोनों देशों के लिए लिए काफी अहमियत रखती है। नेपाल और भूटान की तरह मोदी जापान का दिल भी जीतना चाहेंगे। जापान के प्रधानमंत्री शिंजो अबे को जापानी भाषा में ट्वीट करके उन्होंने इसकी शुरुआत कर दी है।

भारत के प्रधानमंत्री और साथ ही एक दर्जन से ज्यादा भारतीय इस्पात, उर्जा और आईटी क्षेत्र के उद्योगपतियों की आज से क्योटो में शुरू हो रही यात्रा से जापान और भारत दोनों को ही काफी कुछ हासिल करना है। दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाएं एक-दूसरे की पूरक हैं, जहां जापान में संपन्नता और तकनीकी साम‌र्थ्य है। वहीं भारत में प्राकृतिक संसाधन और अपनी अर्थव्यवस्था को आधुनिक बनाने की क्षमता है।

अभी तक दोनों आपसी हित के मुद्दों पर ज्यादा कुछ सफलता अर्जित नहीं कर सकें हैं। इसकी थोड़ी वजह तो विदेशी निवेश के प्रति भारत की प्रतिबंधात्मक नीतियां और थोड़ी वजह यह है कि जापानी कंपनियों ने अब तक चीन पर ध्यान केंद्रित कर रखा है। विश्लेषक मोदी की प्रधानमंत्री शिंजो अबे से मुलाकात को कुछ महत्वपूर्ण समझौतों के नजरिये से देखते हैं और परमाणु ऊर्जा उत्पादन प्रौद्योगिकी में सहयोग के क्षेत्र में लंबे समय से प्रतीक्षित करार की संभावना जताते हैं। m.jagran.com

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