Sat. Sep 22nd, 2018

फोरम नेपाल पर्सा में नेतृत्व विवाद ?

वीरगंज, ३ जुलाई । कुछ दिन पहले समाचार आया कि संघीय समाजवादी फोरम नेपाल (पर्सा) जिला नेतृत्व को लेकर पार्टी के भीतर विवाद हो रहा है । फोरम नेपाल सम्बद्ध कुछ राजनीतिक कार्यकर्ताओं को कहना है कि पर्सा जिला अध्यक्ष तथा प्रतिनिधिसभा सदस्य प्रदीप यादव पर जिला नेतृत्व परिवर्तन का दवाब पर रहा है । जिला से प्राप्त जानकारी अनुसार पर्सा निर्वाचन क्षेत्र नं. ३ से निर्वाचित सांसद हरिनारायण रौनियार जिला में नेतृत्व परिवर्तन के पक्ष में हैं | आपको ज्ञात होगा की वर्तमान में प्रदीप यादव वहाँ के अध्यक्ष हैं । जानकारी अनुसार कुछ दिन पहले पार्टी अध्यक्ष उपेन्द्र यादव को वीरगंज ले जाकर भी इसके सम्बन्ध में विचार–विमर्श की गई है ।
लेकिन सांसद हरिनारायण रौनियार कहते हैं कि यह गलत अफवाह है, जिला नेतृत्व परिवर्तन संबंधी कुछ भी बहस नहीं हो रहा है । उनका मानना है कि संविधानतः पुराने संरचना अनुसार बनाया गया जिला और जिला पार्टी संचरना का अब कोई भी मायने नहीं है । उन्होंने कहा कि पार्टी को भी संविधान के अनुसार नयां संरचना में ले जाने की जरुरत है, इसीलिए इसके सम्बन्ध में बहस हो रहा है, जिला नेतृत्व परिवर्तन के लिए नहीं ।
जिला नेतृत्व परिवर्तन सम्बन्ध में सार्वजनिक समाचार एवं विवाद और उसकी वास्तविकता को लेकर हिमालिनी ने सांसद रौनियार के साथ कुछ सवाल किया, उसका सम्पादित अंश यहाँ प्रस्तुत हैं–

व्यक्ति परिवर्तन की बात नहीं है, सिस्टम परिवर्तन की बात है

हरिनारायण रौनियार (सांसद्, पर्सा)

पार्टी की पुराने विधान के अनुसार जिला सभापति, क्षेत्रीय सभापति और नगर तथा गांव कमिटी की परिकल्पना है, इससे पहले उसी के अनुसार पार्टी संरचना बनाया गया । अब वह विधान नहीं है । पार्टी को भी संघीय संरचना अनुसार ही ले जना हैं, यह हमारी विधान में स्पष्ट लिखा है । इसीलिए सिर्फ पर्सा जिला में ही नहीं, सभी जिलों में विचार–विमर्श हो रही है कि अब हम लोग कैसे पार्टी को संघीय संरचना के अनुसार ले जा सकते हैं ? यही प्रश्न पर्सा जिला के सवाल में भी उठा है । लेकिन यह जिला अध्यक्ष प्रदीप यादव को हटा कर वहां किसी दूसरे व्यक्ति को रखने के लिए नहीं ।
इसीलिए संविधान के परिकल्पना अब अनुसार पार्टी संचरना भी निर्माण करना है । अर्थात् अब गांव कमिटी, नगरपालिका कमिटी और प्रदेश कमिटी होगा । जिला कमिटी अब सिर्फ समन्वय समिति के रुप में रहेगा । ऐसा करना नेतृत्व परिवर्तन की बात नहीं है, सिस्टम परिवर्तन की बात है । जितने भी जिला में पार्टी की जिला कमिटी है, उसको नयां संरचना, नयां सिस्टम में रुपान्तरण करना है । हां, अभी जिला समन्वय समिति नहीं है, उसका गठन करना है । वह भी तदर्थ समिति के रुप में । कुछ समय के बाद पार्टी महाधिवेशन होनेवाला है, उस समय तक जिला समन्वय समिति रहेगा, आपसी सहमति के आधार में काम किया जाएगा । उसमें व्यक्ति कोई भी हो सकता है । इसीलिए फिर भी कहता हूं, वहां व्यक्ति परिवर्तन की बात नहीं हो रही है, सिस्टम परिवर्तन की बात हो रही है । इसीलिए निराधार हला के पीछे पड़ने की जरुरत नहीं है, पार्टी का विधान ही संशोधन हो गया है तो उसको कार्यान्वयन करना ही चाहिए । यह आज की आवश्यकता है ।

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