Wed. Sep 26th, 2018

बिम्सटेक, नेपाल “ओमेन पारलियामेन्टेरियन्स फोरम”के लिए आगे बढ़े : चन्दा चौधरी

नेपालको बिम्सटेक से अधिक फायदा लेना चाहिए

बिम्सटेक अर्थात बहुपक्षीय प्राविधिक तथा आर्थिक सहायता के लिए बंगाल की खाडी के देशो का प्रयास (बिमस्टेक) इस का एेतिहासिक सम्मेलन कुछ ही हफ्ते पहले नेपाल के काठमाण्डु मे सम्पन्न हुआ है । जिस पर विश्व की निगाहे अटकी हुई थी । और अभी तक राष्ट्रीय एवं अन्तराष्ट्रीय स्तरो पे बिम्सटेक की चर्चा कायम है । अपनी अपनी प्रतिक्रयाएँ लोग बाहर कर रहे है । कुछ लोग सवाल तो यह भी कर रहे हैं कि बिम्सटेक सार्क के बिकल्प के रुप मे तो नही स्थापित होगा ? यह अलग बात है कि कुछ लोग बिम्सटेक को सार्क के बिकल्प के रुप मे देखते हैं | यह कितना उचित या अनुचित होगा ? परंतु यह स्पष्ट है कि बिम्सटेक दक्षिण एसिया एवं दक्षिण पुर्बी एसिया के सर्वपक्षीय विकास का आधार एवं साझा स्थल है । जिसमे विश्व के २२ प्रतिशत जनसंख्या का वास है । जो की सीधी तौर पर लाभान्वित हो सकते हैं बिम्सटेक के जरिए ।
कहा जाता है कि विश्व में जब क्षेत्रीय राजनीति का दौरान शुरु हुअा तो विभिन्न संगठन का निर्माण हुअा था । जैसे कि अमेरिका, यूरोप विश्व के आर्थिक राजनीति का नेतृत्व करता था । और समग्र एसिया उस परिदृष्य मे भी नही आता था । परंतु एसिया को भी यह लगने लगा की जब तक एक जुट हो कर साझा संकल्प नही लिया जायगा तब तक बिकास की सपना देखने का भी अधिकार नही है एसिया को । परंतु यह काम भी उतना आसान न था न है । जैसे की हम जानते है समग्र एसिया विविधता से भरा हुअा जगह है । इतना ही नही यहा धार्मिक कट्टरता, गरीबी, पिछडापन और आतंकवाद ने जडे गाड रखी है । और इन्ही जटिलताओ से छुटकारा प्राप्त करने हेतु इस बार की बिम्सटेक सम्मेलन मे सम्मिलित सभी राष्ट्रो को संकल्प लेते हुवे भी दिखा गया जो की अति प्रशंसनीय है । और इस मे भारत का खुले हृदय की जितनी तारिफ करे उतनी कम । भारत के प्रधानमन्त्री श्री नरेन्द्र मोदीजी ने कहा कि बिम्सटेक मे आबद्ध एेसा एक भी देश नही जिसने आतंकवाद, ड्रग ट्राफिकिंग और ‘ट्रांस नेसनल’ अपराध का सामना न किया हो । और यह एक कडबा सच भी है । साथ ही दक्षिण एसिया मे महिलाओ की अवस्था क्या है यह विदित ही है । और इसी अवस्था को गंभीरता पुर्वक लेते हुवे मोदीजी का यह प्रस्ताव की बिम्सटेक के भीतर एक “ओमेन पारलियामेन्टेरियन्स फोरम” अर्थात महिला सांसदो के फोरम गठन होना आवश्यक है । क्या यह कम बडी बात है महिलाओ के लिए ? मै तो कहुंगी की नेपाल को इस मे सक्रिय पहलकदमी लेना चाहिए, यथाशीघ्र ।
अब चर्चा करे बिम्सटेक के भीतर नेपाल की सम्भावनाओ की । बिम्सटेक मे आए राष्ट्राध्यक्ष मध्ये म्यानमार एवं श्रीलंका के राष्ट्रपति का लुम्बनी भ्रमण क्या महज उनका व्यक्तिगत भ्रमण के रुप मे लेना चाहिए ? हमे पता ही है की कुछ ही महिने पहिले भारतीय प्रधानमन्त्री मोदीजी ने जानकी मंदिर और मुक्तिनाथ का दर्शन किया तो उसके बाद वहाँ भारतीय तिर्थालुओ की कतार लगनी शुरु हो गयी और आज के दिन तक भारतीय धार्मिक तिर्थालु दोनो धार्मिक स्थलो का दर्शन करते आए हैं । और उससे देश की अर्थतन्त्र को मजबुती ही प्रदान कर रहे है । उसी तरह म्यानमार और श्रीलंका के बौद्ध धर्माबलंम्बियो का ध्यान भी नेपाल की ओर खिचा गया है । जिसे कि धार्मिक पर्यटन के प्रबर्धन होने की भरपूर संभावना दिखाई दे रही है । सही मायने मे इसे यह भी पता चलता है की नेपाल चाहे तो अपार जनसंख्या बाले देश भारत के हिन्दु–बौद्ध और विश्व के बौद्ध धार्मिक पर्यटकाें को अाकर्षित कर देश के अर्थतन्त्र को मजबूत कर सकती है । क्यूँ की नेपाल मे पशुपतिनाथ, जानकी मंदिर, मुक्तिनाथ और लुम्बनी जैसी ऐसी बिरासत है जिससे देश का कायापलट हो सकता है परंतु करना तो हमे ही होगा । और बिडंबना यह है कि हम समय समय पर अन्धराष्ट्रवाद के दौर का शिकार हो जाते है । बिम्सटेक अन्तिम दिन मोदीजी ने भारतीय सरकार के सहयोग मे निर्मित नेपाल–भारत मैत्री धर्मशाला का उदघाटन करते वक्त यह कहा था की नेपाल के समृद्धि के लिए भारत हरवक्त कांधा मिला कर चलने को तैयार है । और हमारे प्रधानमन्त्री ओलीजी की तरफ से मोदीजी को लुम्बनी भ्रमण के लिए आमन्त्रित करने का उद्घोष सराहनीय कदम के रुप मे लेना चाहिए । जिसका कारण है भारतीय प्रधानमन्त्री आजतक नेपाल मे जिस भी धार्मिक स्थलो का भ्रमण किया है वे सभी जगहो‌ पर पर्यटक की संख्या मे बृद्धि ही हुइ है । यह खुद ओलीजी ने मोदीजी से साझा किया था ।
विकास की संभावनाओ पे और भी नजर डाले । पिछले बार जब मोदीजी आए थे तो जनकपुर से उन्होने रामायण सर्किट निर्माण का उदघोष कर विकास पथ और भारत नेपाल सम्बन्ध को एक नया ढंग से आगे बढाने का संकल्प लिया था । और बिम्सटेक सम्मेलन से उनके तरफ से “बुद्ध सक्रिट” का निर्माण कर बिम्सटेक के सातो देशो को बिकास की सर्किट पे चलाने का संकल्प वाकइ  हम सब के लिए फायदेमन्द है । और विश्व को चौकाने बाली बात है । गौरतलब है की आज के उत्तरआधुनिक युग आर्थिक विकास का युग है जो की बिना “कनेक्टिभिटी” के सम्भव नही । रामायण और बुद्ध सर्किट विकास के लिए अति अर्थपुर्ण कनेक्टिभीटी है । और यह दोनो सर्किट से बिम्सटेक सम्मिलित राष्ट्रो का पहचान भी उजागर होगा विश्वमान पटल पर ।
कहा जाता है कि– ‘संघे शक्ति’, अर्थात एकता में ही बल होता है । एक दौर था जब अमेरिकन सदी होता था । अब की एक्किसवीं सदी को अगर एसिया की सदी बनाना है तो हमे एकजुट हो कर आर्थिक विकास की ओर बढना ही होगा । उसी का एक आयाम है बिम्सटेक और इस बार की उत्साहपुर्ण सम्मेलन से एसियन युग का प्रारम्भ होना सम्भव सा दिख रहा है ।
यद्यपि, विकास के सबसे बडे अबरोधक तत्व । याने की आतंकवाद । जिसका न कोइ मजहब होता है न वतन । और विश्व मे इसने तांडब मचा रखा है । और एसिया मे कुछ ज्यादा ही । परंतु आतंकवाद को जड से उखाड फेकने की जिस तरह से संकल्प लिया गया है उसमे हमे पूरा कर दिखाना है ।
नेपाल के सन्दर्भ मे कहा जाय तो । कुछ निराशा जनक कदम उठाया गया है । बिम्सटेक के बाद भारत नेपाल के बीच ‘ज्वाइन्ट मिलिट्री अभ्यास’ की जो सहमति थी उससे नेपाल का पीछे हटना देश के लिए अच्छी बात नही । ऐसा अभ्यास विश्व के कइ राष्ट्रो मे सामान्य है । परंतु न जाने अपने आप को बडे दल कहने वाली नेपाली की पार्टियाें को क्या हो गया । खैर हमे यह विश्वास अवश्य है की नेपाल जल्द ही आत्मालोचना कर इस ‘ज्वाइन्ट मिलिट्री अभ्यास’ को आगे बढाएगी ।

और अन्त मे बिम्सटेक को भू राजनीतिक कुप्रभाव के कारण सार्क थोडा बहुत सुस्त सा नजर वश्य दिख रहा है । परंतु सार्क की भी एक अपनी गरिमा है । सार्क सम्मलिति कुछ देश मे आए राजनीतिक परिवर्त से लगता है सार्क भी अब सक्रियता की ओर बढ पाएगा । हलांकी अभी ही इस मे विश्वस्त हाेने के लिए उतना आधार नही दिख रहा है ।
ओर भौगोलिक हिसाब से छोटे और आर्थिक हिसाब से कमजोर हमारा देश किसी तरह की भुराजनीति के कुतत्वो की चपेट मे न पडे तो ही अच्छा है । हाल ही मे नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी के नेता पुष्प कमल दहाल ने हिन्दुस्तान टाईम्स पत्रिका मे अनतरवार्ता देते हुवे कहा है की नेपाल के आर्थिक बिकास के लिए भारत का कोई विकल्प नही, इस यथार्थ को संजोग कर हमे बिम्सटेक से अधिक फायदा लेना चाहिए ।


चन्दा चौधरी
संघिय सांसद, राष्ट्रीय जनता पार्टी नेपाल
अध्यक्षः नेपाल–भारत महिला मैत्री समाज

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