Wed. Nov 21st, 2018

बीरगंज और विकास : सवाल ही सवाल

हिमालिनी ने गौरवपूर्ण अपने बीस वर्ष पूरे किए । देश के हर विषय को हिमालिनी ने समेटा है और उसे पाठकों तक पहुँचाने की कोशिश की है, चाहे वह राजनीति के पेंच हो, मधेश आन्दोलन की आग हो, भूकम्प की त्रासदी हो या बाढ का कहर हो हिमालिनी ने सही तथ्यों को लाने और पाठकों तक पहुँचाने की कोशिश की है । बाधाओं की परवाह न करते हुए यह अपने कर्मपथ पर हमेशा अग्रसर रही । देश संघीयता में प्रवेश कर चुका है । इस बदलते परिवेश में, अपने बीस वर्ष के अंतिम महीने में हिमालिनी ने एक कोशिश की, तराई के उस शहर से जुड़ने की जो तराई को ही नहीं सम्पूर्ण नेपाल को गति देता है । वीरगंज मधेश का दिल ही नहीं, देश की घड़कन भी है । जिसका थमना देश की गति को रोक देने की क्षमता रखता है । यह बात देश मधेश आन्दोलन के समय समझ चुका है, बावजूद इसके सरकार कितनी गम्भीर है वीरगंज के विकास के लिए ? इस ज्वलंत प्रश्न के साथ हम वीरगंजवासी के समक्ष गए ।
देश की औद्योगिक नगरी बीरगंज जो एक नजर में दिखता है वो हैं वहाँ की बदहाल सड़कें, धूल धुसरित वातावरण जो दिल खोलकर आपका स्वागत करता है और साथ ही सरकार की अनदेखी को भी बयाँ कर जाता है । कई सत्र में हमने वहाँ के प्रतिनिधियों से अलग–अलग बातें की वीरगंज की दशा और दिशा पर ।
इसी क्रम में उद्योगपतियों एवं नेताओं के अलावा लायन्स क्लब के सदस्यों से आबद्ध होने की कोशिश की । सभी चिंतित और भविष्य के प्रति आशान्वित होकर एक उम्मीद को लेकर और साथ ही एक अव्यक्त आक्रोश के साथ हमारे समक्ष थे । पहला सत्र हमारा वहाँ से चयनित उन जनप्रतिधियों के साथ था, जो अगले पाँच वर्षों के लिए वीरगंज ही नहीं सम्पूर्ण वारा पर्सा के विकास का दायित्व वहन करने वाले हैं । सभी का मानना था कि वीरगंज को जो राज्य से मिलना चाहिए था वो आज तक हासिल नहीं हुआ । बीरगंज को जो बजट मिलना चाहिए वो तो मिलता नहीं, जो देते हैं उसका भी आज तक सदुपयोग नहीं हो पाया है । एक स्वर में उनकी प्रतिबद्धता थी कि संसद में हम अपनी जोरदार आवाज उठाएँगे बजट की माँग करेंगे और बीरगंज को ही नहीं सम्पूर्ण जिला को विकास की राह पर ले जाएँगे । ठाडी के मामले में उनका आक्रोश जाहिर हुआ इस आवाज के साथ कि ठाडी दो नम्बर का था और दो नम्बर का ही रहेगा ।
उद्योगपतियों की चिन्ता कछ ज्यादा अलग नहीं थी । अच्छी सड़कें, आवागमन की सहजता, शिक्षा, स्वास्थ्य के साथ ही सीमा पर होने वाली असुविधा को उन्होंने सामने रखा और कहा कि इस मामले में भारत सरकार और नेपाल सरकार को गम्भीरता से पहल करने की कोशिश करनी चाहिए । उनका मानना था कि बीरगंज देश की आर्थिक रीढ है जिसे मजबूत किया जाना इस क्षेत्र का ही नहीं सम्पूर्ण देश के विकास से आबद्ध है । साथ ही उनका मानना था कि राजधानी जहाँ भी बने हम स्वागत करते हैं पर आर्थिक राजधानी अर्थात अर्थ से जुड़े निकाय को बीरगंज में ही रखा जाना चाहिए और बीरगंज को औद्योगिक कारीडोर सरकार को तत्काल घोषित करना चाहिए ।
तीसरी बैठक हमारी लायन्स के सदस्यों उमेश साह कानु (अध्यक्ष), रामेश्वर प्रसाद गुप्ता, आर.एस. खेतान, विजय कुमार गुप्ता, मनोज बाउली, कमलेश अग्रवाल, संजय केडिया आदि कई लायन से हुई । वीरगंज के विकास के साथ ही वहाँ सबसे अधिक चिन्ता स्वास्थ्य संस्थान को लेकर थी । नारायणी उपक्षेत्रीय अस्पताल की बदहाली, सीसीयू की व्यवस्था का ना होना, प्रसूति गृह में कम बिस्तर का होना, हृदयघात और किडनी सम्बन्धी बीमारी के इलाज की सही व्यवस्था का ना होना ये सारी बातें वृहत रूप में सामने आईं जिनका निदान यथाशाीघ्र सरकार को करना चाहिए यह उनकी माँग थी । शिक्षा और स्वास्थ्य इन दोनों का सही विकास ही सम्पूर्ण जिला को विकसित कर सकता है यह उन सबकी धारणा थी ।
निष्कर्षतः इस पूरी परिचर्चा में यह बात स्पष्ट हुई कि जो बीरगंज सरकार को सबसे अधिक कर देता है उसी बीरगंज की बदहाली की ओर सरकार ने कभी ध्यान नहीं दिया । रक्सौल और बीरगंज को जोड़ने वाले पुल की ऐसी खस्ता हालत है कि अगर वो बाधित हुआ तो बेवजह ही नाकाबंदी हो जाएगी इसलिए उस पर सरकार को सोचने की नहीं कार्य करने की आवश्यकता है । सरकार को इस क्षेत्र पर बिना किसी पूर्वाग्रह के ध्यान देना चाहिए । हिमालिनी टीम को सबने स्नेह और सहयोग दिया, साथ ही हिमालिनी बीरगंज से दैनिक पत्रिका के रूप में निकले यह भी उनकी इच्छा थी ।
– संपादक

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