Fri. Sep 21st, 2018

बेटी रोटी के सम्बन्ध पर परिचयपत्र और राहदानी का प्रहार

 

बीरगंज-रक्सौल सीमा , photo jahangast
काठमाडौँ– नेपाल–भारत की सीमा खुली रखनी है या बंद इस विषय पर जोर शोर से चर्चा शुरु हो गई है । एक पक्ष का मानना है कि इस खुली सीमा को बंद कर दिया जाय क्योंकि इसकी वजह से अपराध में बढोत्तरी हो रही है वहीं एक पक्ष है जिनका मानना है कि नेपाल भारत सम्बन्ध के बीच दोनों देशों का एक मजबूत आधार है रोटी बेटी का सम्बन्ध साथ ही रोजगार और व्यवसाय की निर्भरता और इसके लिए सीमा का खुला रहना आवश्यक है । नेपाल–भारत प्रबुद्ध समूह के द्वारा तैयार प्रतिवेदन में इस विषयपर बृहत चर्चा की गई है । स्रोत के अनुसार प्रबुद्ध समिति का मानना है कि सीमा को बंद कर दिया जाय । 
वैसे अभी यह प्रतिवेदन सरकार के समक्ष पेश नही किया गया है स्वतन्त्र युवा प्रजातान्त्रिक सङ्घ नेपाल द्वारा बुधबार राजधानी में आयोजित ‘खुला सीमाना ः अवसर र चुनौती’ विषयक अन्तरक्रिया कार्यक्रम में सीमाविज्ञ बुद्धिनारायण श्रेष्ठ ने दावा किया है कि प्रबुद्ध समूह के प्रतिवेदन मेें नेपाल–भारत सीमा बन्द कर के राहदानी तथा परिचयपत्र जारी करने की सिफारिश की गई है । कहा जा रहा है कि प्रबुद्ध समिति के सदस्य सीमा पर जाकर स्थानीय से बातचीत कर इस निष्कर्ष पर पहुँचे हैं कि सीमा को बंद कर दिया जाय और राहदानी तथा परिचयपत्र जारी किया जाय । कार्यक्रम में यह कहा गया कि सीमा को काँटा और तार से बंद किया जाय ऐसा करने से अपराध में कमी आएगी । कार्यक्रम में डेनमार्क के लिए पूर्वराजदूत विजयकान्त कर्ण का मानना था कि यह बिलकुल अव्यवहारिक है । ऐसा करने से पहले मधेश की सभीसमस्याओं का समाधान करना आवश्यक है । उन्होंने कहा कि अपराध खुली सीमा की वजह से नहीं बल्कि आपराधिक मानसिकता की वजह से होती है । और यह क्या गारन्टी है कि सीमा को घेर देने के बाद कोई आपराधिक घटना नहीं होगी । उन्होंने कहा कि ‘पाकिस्तानी आतङ्कवादी भटकल और टुण्डा भारत से गाड़ी पर चढ कर नहीं बल्कि हवाई जहाज से आए थे । आखिर यह कैसे सम्भव हुआ । जबकि एयरपोर्ट पर सुरक्षा व्यवस्था होती है । यह तो खुली सीमा की वजह से नहीं हुआ है । क्या इसका जवाब सरकार के पास है ? भारत के लिए नेपाली पूर्वराजदूत दीपकुमार उपाध्याय ने भी कहा कि इस निर्णय से पहले गहन अध्ययन की आवश्यकता है । यह इतना सहज नहीं है । उन्होंने कहा कि खुली सीमा हमें अवसर और चुनौती दोनों देती है इससे फायदा कैसे लिया जाय यह हम पर निर्भर करता है । परराष्ट्रविज्ञ प्रद्युम्न विक्रम शाह ने कहा कि आने जाने पर रोक लगाने के बजाय व्यवसायिक दृष्टिकोण से कडाई करनी चाहिए । कूटनीतिज्ञ इन्द्रकुमारी अधिकारी का मानना था कि परिचयपत्र जारी किया जाना चाहिए । सीमाविद् बुद्धिनारायण श्रेष्ठ ने दावा किया कि नेपाल में चीनी निवेशबढ रहा है और वो नेपाली भाषा सीखकर खुली सीमा का फायदा लेकर भारत जा सकते हैं ।
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