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भारत में नागरिकता के लिए सात साल की अवधि-एक भ्रामक प्रचार : डा.मुकेश झा

 sambidhan

डा.मुकेश झा,जनकपुर ,१० दिसिम्बर | विदेशी के साथ वैवाहिक सम्बन्ध के बाद नागरिकता के लिए सात साल की अवधि की आवश्यकता एक भ्रामक प्रचार ।संचार माध्यम को भ्रामक समाचार फैलाने से बाज आना चाहिए । कहा जाता है की सत्ता के ठेक्केदार लोग अपनी बेशुमार धन, दौलत की आड़ मे दुनियां को अपने ईशारे पर नचाना चाहते हैं । नेपाल के खस शासक लोगों की कहानी भी कुछ इसी तरह की है। आजकल वे एक ही काम करने मे लगे हुए हैः भारत की निन्दा करना और नेकपा (एमाले), उस की जेब के पत्रकार एवं उस के पक्षधर पत्रिका इस कार्य मे खूब रुचि भी ले रहे हैं ।जब भी अंगीकृत नागरिकता की बात उठती है तो व्यंग्यवाण और बेतुके इलजाम लगने शुरु हो जाते हैं । राष्ट्रीय मीडिया कहलाने वाले सञ्चार संस्थान आजकल नेपाल के संविधानको दुनियां का सब से उत्कृष्ट संवैधानिक ग्रन्थ सिद्ध करने मे जी जान लगाए हुए है ।

अपने को भला और दूसरों को बुरा साबित करने के चक्कर मे वो इस कदर डूबे हैं कि भारतीय संविधान मे जिन चीजों का जिक्र भी नहीं है उसे हवाला देते हुए भारतको कानुनी रुप से कमजोर साबित करने की नाकामयाव कोशिश कर रहे है । उन के रिपोर्ट के अनुसार भारतीय संविधान कहता है कि कोई भी विदेशी नागरिक जो भारतीय नागरिक के साथ वैवाहिक बन्धन मे बन्धेगा उसे भारत मे सात वर्ष रहना होगा और शादी के सातवीं सालगिरह मनाने के बाद ही उस विदेशी महिला या पुरुष को भारतीय नागरिकता प्रदान की जाएगी । लेकिन ताज्जुब की बात यह है कि भारतीय संविधान मे ऐसी कोई धारा का जिक्र कहीं भी नहीं है । हो सकता है कि भारतीय संविधान के निर्माता बाबा साहब डा. भीम राव अम्वेदकर १९४९ मे कुछ लिखना भुल गये हों और नेपाली पत्रकारों एवं सत्ताधारियों को सोते हुए सपने मे यह बताया हो कि भारतीय संविधान के बारे मे जो कुछ मैं लिखना भूल गया था उस को तुम दुनियां के सामने लाओ । नश्लवादी सोच से ग्रसित लोग यह नही देखते कि समाचार कितना तथ्यमूलक है । उन के दिमाग में बस एक ही बात जमी हुई है कि भारत की निन्दा जितनी हो सके ज्यादा से ज्यादा की जाय । आश्चर्य तो तब होता है जब राष्ट्रीय स्तर के नेपाली अखबारों के पन्ने भ्रामक समाचारों से रंगीन होते हैं । इसी तरह से एक समाचार पत्र ने भारतीय संविधान का हवाला देते हुए यह बात लिखा है कि भारत मे शादी के सात साल बाद ही किसी भी विदेशी नागरिक को नागरिकता दी जाती है परन्तु उस ने यह नहीं बताया है कि संविधान के किस धारा मे इस बात का जिक्र है । इस तरह के गलत तथ्य परोसने के पीछे सिर्फ एक ही मकसद हैः नेपाल भारत के संबन्धों को बिगाड़ना ।

जब लेखक ने दक्षिण एशिया के संविधान तथा दण्ड संहिता के उपर निरन्तर कलम चलाने वाले पत्रकार जिवेश झा से वात की तब एक और तथ्य सामने आया । उन्होंने कहा कि“मैने दक्षिण एसिया की संवैधानिक ग्रन्थों का तुलनात्मक अध्ययन किया है जो कि विभिन्न राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय समाचार पत्रों मे प्रकाशित है । लेकिन मेरी स्टडिज और भारतीय संविधान के धाराओं मे ऐसी किसी भी बात का जिक्र नहीं है । ये सब मनगढन्त बातें हैं । झुठ बोलना और झुठ लिखना नेपाल के शासक और संचारकर्मियों की पुरानी आदत है ।” हो सकता है नागरिक्ता के सात साल वाली बात दूसरी कानुनी संहिता मे दी गई हो परन्तु अल्पज्ञ लोग संविधान और दूसरे कानुनी किताब को एक ही मानकर अपनी मनमर्जी से कलम चलाते रहते हैं। अधूरा ज्ञान कितनी खतरनाक होती है इस बात का शायद इनको अन्दाजा नहीं है । इस तरह के तुच्छ कार्य करने वाले अपने आप को हमेशा होशियार समझते रहतें है । लिखने की कला और छापने क लाईसेन्स मिलने का मतलब यह नहीं कि अनाप(शनाप लिखा और छापा जाए। राष्ट्रीय स्तर के पत्रिकाओं को अपने सम्मान का और देश की गरिमा का पूरा पूरा खयाल रखते हुए तथ्यमूलक समाचार ही संप्रेशन करना चाहिए । क्योंकि संचार माध्यम एक जिम्मेदार संस्था है और इसे बिना किसी पूव्राग्रह के समाचार सम्प्रेषण की शिक्षा दी जाती है जिसका निर्वाह आवश्यक होता है ।

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Sam
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Sam

Dr. Jha, Either You are ignorant or a great liar. Indian Foreign Ministry clearly states after 7 years only citizenship application can be lodged.
Check this site Indian Foreign Ministry
http://indiancitizenshiponline.nic.in/acquisition1.htm
See the detail:
Foreigners Division
Ministry of Home Affairs
Government of India
Persons who are married to a citizen of India and who are ordinarily resident in India for SEVEN YEARS (as mentioned at (a) above) before making application under section 5(1)(c). Application shall be made in.