Mon. Oct 22nd, 2018

भारत सरकार ने इस वर्ष 9500 किलोमीटर लंबी सड़कें बनाने तथा 18000 मेगावाट बिजली उत्पादन का लक्ष्य रखा है.

जब आर्थिक विकास के आंकड़े गोता लगाते दिख रहे थे और यह अवधारणा बन गई थी कि सरकार के निर्णय लेने की गति शून्य हो गई है तब चौतरफ़ा दबाव झेल रहे प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने बुधवार को कई अहम निर्णय लिए हैं.

उन्होंने खस्ताहाल आर्थिक व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए अहम क्षेत्रों में इसी वित्तीय वर्ष में दो लाख करोड़ रुपए का निवेश करने का लक्ष्य रखा है.

उन्होंने कहा कि लगातार आठ वर्षों तक विकास की ऊँची दर हासिल करने के बाद इस समय भारत की अर्थव्यवस्था भँवर में है.

अगले पाँच वर्षों में ढाँचागत क्षेत्रों में एक खरब डॉलर के निवेश की आवश्यकता बताते हुए मनमोहन सिंह ने कहा, “ऐसे कठिन समय में हमें निवेश की स्थिति सुधारने के अलावा निजी और सार्वजनिक क्षेत्र में व्यावसायिक माहौल ठीक करने के लिए हर संभव कोशिश करनी चाहिए.”

इस बैठक में लिए जाने वाले निर्णयों के संकेत भर से बाजार में माहौल बदलता दिख गया और सेंसेक्स ने 434 अंकों की छलांग लगाई, जो कि वर्ष 2012 की सबसे ऊँची छलांग है.

इससे पहले मनमोहन सिंह ने नेतृत्व वाली यूपीए सरकार पर नीतिगत निर्णय न लेने के गंभीर आरोप लगे थे और सोमवार को तो कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में अपनी ही पार्टी के सदस्यों से उलाहनाएँ सुननी पड़ीं थीं.

सड़क: कहा गया है कि इस वर्ष 9500 किलोमीटर लंबी सड़कें बनाई जाएंगी. यह पिछले वर्ष के मुकाबले 19 फीसदी से ज्यादा होगा जबकि सड़क क्षेत्र में होने वाले निवेश में 73.6 फीसदी की वृद्धि होगी.

इसके अलावा 4360 किलोमीटर लंबी सड़कों पर मरम्मत का काम होगा.

बिजली और कोयला : सरकार ने इस वर्ष अतिरिक्त 18000 मेगावाट बिजली क्षमता जोड़ने और बिजली उत्पादन में 6.2 फीसदी की वृद्धि करने का लक्ष्य रखा है.

कोल इंडिया को 47 करोड़ टन कोयला उत्पादन करने को कहा गया है. source bbc

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