Tue. Oct 23rd, 2018

भुपेन का नेपालि मन

ब्रहृमपुत्र के कवि’ भूपेन हजारिका ने ‘दिल हूम हूम करे’ और ‘ओ गंगा बहती हो’ में अपनी विलक्षण आवाज से भी लाखों लोगों को अपना प्रशंसक बना लिया।

अपने सर पे पहनने वाले टोपी में दो खुकुरी का प्रतीक चिन्ह रखने वाले भूपेन हजारिका हमेशा इसको नेपाली टोपी कहा करते थे। आसाम में रहने वाले नेपाली भाषी और नेपाली नागरिक से हमेशा ही आत्मीयता का संबंध रहा है उनका। बडे प्यार से नेपाली भाषी लोगों के कार्यक्रम में शिरकत करते थे और उनके लिए कार्यक्रम में गाना गाते थे।
असम के लोकसंगीत के माध्यम से हिंदी फिल्मों में जादर्ुइ असर पैदा करने वाले ‘ब्रहृमपुत्र के कवि’ भूपेन हजारिका ने ‘दिल हूम हूम करे’ और ‘ओ गंगा बहती हो’ में अपनी विलक्षण आवाज से भी लाखों लोगों को अपना प्रशंसक बना लिया। पेशे से कवि, संगीतकार, गायक, अभिनेता, पत्रकार, लेखक, निर्माता और स्वघोषित ‘यायावर’ हजारिका ने असम की समृद्ध लोक संस्कृति को गीतों के माध्यम से पूरी दुनिया में पहुंचाया। उनके निधन के साथ ही देश ने संस्कृति के क्षेत्र की एक ऐसी शख्सियत खो दी है, जो ढाका से लेकर गुवाहाटी तक में एक समान लोकप्रिय थी।
सादिया में १९२६ में शिक्षकों के एक परिवार में जन्मे हजारिका ने प्राथमिक शिक्षा गुवाहाटी से, बीए बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से और पीएचडी -जनसंचार) कोलंबिया विश्वविद्यालय से की। उन्हें शिकागो विश्वविद्यालय से फैलोशिप भी मिली।
अमेरिका में रहने के दौरान हजारिका जाने-माने अश्वेत गायक पाँल रोबसन के सर्ंपर्क में आए, जिनके गाने ‘ओल्ड मैन रिवर’ को हिंदी में ‘ओ गंगा बहती हो’ का रूप दिया गया, जो वामपंथी कार्यकर्ताओं की कई पीढिÞयों के लिए एक तरह से राष्ट्रीय गान रहा।र्
कई साल पहले एक राष्ट्रीय दैनिक को दिए साक्षात्कार में हजारिका ने अपने गायन का श्रेय आदिवासी संगीत को दिया था। दादासाहब फाल्के पुरस्कार विजेता हजारिका ने इस साक्षात्कार में कहा था कि मैं लोकसंगीत सुनते हुए ही बडÞा हुआ और इसी के जादू के चलते मेरा गायन के प्रति रुझान पैदा हुआ।
भूपेन दा को गायन कला उनकी मां से मिली है, जो उनके लिए लोरियां गातीं थीं। मैंने अपनी मां की एक लोरी का इस्तेमाल फिल्म ‘रुदाली’ में भी किया है। उन्होंने अपना पहला गाना ‘विश्व निजाँय नोजवान’ १९३९ में १२ साल की उम्र में गाया।
असमी भाषा के अलावा हजारिका ने ज्ञढघण् से ज्ञढढण् के बीच कई बंगाली और हिंदी फिल्मों के लिए गीतकार, संगीतकार और गायक के तौर पर काम किया। उनकी लोकप्रिय हिंदी फिल्मों में लंबे समय की उनकी साथी कल्पना लाजमी के साथ की ‘रुदाली’, ‘एक पल’, ‘दरमियां’, ‘दमन’ और ‘क्यों’ शामिल हैं।
हजारिका को ‘चमेली मेमसाब’ के संगीतकार के तौर पर १९७६ में र्सवश्रेष्ठ संगीतकार का पुरस्कार दिया गया। इसके अलावा उन्हें अपनी फिल्मों ‘शकुंतला’, ‘प्रतिध्वनि’, और ‘लोटीघोटी’ के लिए राष्ट्रपति पुरस्कार भी दिया गया। साल १९६७ से १९७२ के बीच असम विधानसभा के सदस्य रहे हजारिका को १९७७ में पद्मश्री से नवाजा गया।

bhupen hazarika

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