Sat. Feb 23rd, 2019

मधेशी दलों को अब शीघ्र ही जीत के नशे से निकलना जरूरी

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मधेश के दलों को अब शीघ्र ही जीत के नशे से निकल कर यह समझ लेना चाहिए कि वास्तव में वे अपनी साख मात्र बचा पाए हैं । असली संघर्ष तो सामने है जब उन्हें न केवल संगठित शक्तियों का सामना करना पड़ेगा वरन मधेश की दृष्टि से प्रतिगामियों से भी लड़ना पड़ेगा । इसलिए एकत्व के बल पर राजनीति की विसात सँभलकर चलनी चाहिए । महाभारत के भीम की तरह की विजयान्धता बहुत बड़ी नादानी होगी । ( कुमार सच्चिदानन्द सिंह के वाल से )

काँग्रेस और माओवादी केन्द्र की स्थिति को देखते हुए फिलहाल मधेशवादी दलों को भी आत्ममंथन की आवश्यकता है । जो परिणाम सामने है उसे देखते हुए मधेशवादी दलों को भी खुशफहमी से निकलना होगा क्योंकि पूरी तरह खुश होने की स्थिति अब भी नहीं है । कई मोर्चे पर गलती उनसे हुई है । ससफो और राजपा के विभाजन ने कमजोर किया और यही वजह है कि तीसरे पक्ष को आगे निकलने का अवसर मिल गया । अन्तर्घात ने भी मधेशवादी दलों को कमजोर किया वहीं टिकट के बँटवारे में लिए गए गलत निर्णय ने उनसे कई स्थानों को छीन लिया । पैसों के खेल ने जहाँ एक ओर किसी को मजबूत किया तो वहीं दूसरी ओर किसी के हाथ से कमान फिसल गई । आगे आने वाले समय के लिए उन्हें मिलकर तैयारी करनी होगी और क्षेत्र पकड़ना होगा नहीं तो मोहरे भी बदल जाते है. और चाल भी नाकाम हो जाती है । (डा.श्वेता दीप्ति के आलेख से)

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