Tue. Nov 20th, 2018

मधेश पर चुनावी आक्रमण, मधेशी नेता क्यों डगमगा रहें हैं : डा.अशोक महासेठ

डा. अशोक महासेठ

 डा.अशोक महासेठ, काठमांडू | लोकतन्त्र मे चुनाव आवश्यक ही नही, इसे लोकतन्त्र की आत्मा कह सकते हैं | इन दिनो मधेश पर चुनावी आक्रमण चौतर्फी रुप से चल रहा है | तथाकथित राष्ट्रीय मिडिया राष्ट्रीय जनता पार्टी नेपाल को चुनाव में जाने के लिए अभियान ही चल रही हैं | सरकार लोकतन्त्र की दुहाई के कारण चुनावी जाल वीछा दिया | नश्लवादी पार्टी के कुचक्र में मधेशवादी पार्टी फस चुकी हैं ,बजट भाषण द्वारा जाल मे चावल छीटने की तरह स्थानिय तह में करोंड़ो रुपया देने की बात कह कर ब्रह्मास्त्र भी फेक दिया गया है | इन सब कारणों से मधेश  का मसीहा कहनेवाला उपेन्द्र यादव जी भी फस चुके हैं | जिससे राजपा नेपाल के उपर और दबाब बढ़ गया हैं | विजय गच्छेदार की पार्टी तो पहले से ही अपने आप को मधेशवादी पार्टी नहीं मानते हैं | ६ दल के बीच एकीकरण के बाद वास्तवीक रुपसे एक मात्र राजपा नेपाल ही मधेशबादी पार्टी के रुप में रह गया है | अधिकांश मधेशी जनता इनके साथ्  है | जिस तरह से महाभारत में अभीमन्यु को अकेला चौतर्फी रुपसे घेरा डाल कर आक्रमण किया गया था और हत्या कर दी गई थी उसी तरह से आज राजपा नेपाल के उपर आक्रमण हो रहा हैं | फिरभी यह पार्टी चट्टान की तरह अटल तथा धैर्यवान हैं ,कोई हिला  नहीं पा रहा हैं ,सब के उपर भारी पड रहा है | इस पार्टी की पहली जीत तो यह है कि इनके कारण सरकार स्थानिय तह का चुनाव की तिथि परिवर्तन किया और आनेवाला समय में और भी परिवर्तन होने की सम्भावानाएं है | यहा तक की असोज मे न कहीं चुनाव की तिथि तय हो ?
          मधेश में नश्लवादी पार्टी आन्तरिक रुपसे चुनाव की तैयारी चाला रही है | मधेशी आदीजन का कमजोर करने बाला तथा मधेशियों को धोखा देनेवाली पार्टी संघीय समाजवादी फोरम भी चुनाव की तैयारी मे जुटी है | बजट भाषण के बाद शंका उत्पन हो गई है कि कहीं मधेशी जनता लोभ के कारण चुनाव मे नहीं चला जाय | अतः मधेशी जनता को इससे सचेत रहना होगा | क्यों सचेत  होना है ,इसके लिए दो प्रश्न हैं  :- ६० से अधिक मधेशी सपूत अपनी जान की कुर्बानी दे चुकी है | क्या इनका सपना यही था कि मधेश की अधिकार प्राप्त बिना ही चुनाव में सहभागी हो ,नहीं संबिधान बनने की समय ही से मधेश आन्दोलित हैं और शुरू से ही नेता लोग कहते आ रहे हैं कि जबतक संबिधान संशोधन नहीं होगा तब तक किसी भी प्रकार का चुनाव में सहभागी नहीं होंगें | तो फिर आज क्यों डगमगा रहे हो ? क्या चुनाव के बाद संबिधान संशोधन हो ही जाएगा ? इसकी विश्वसनीय आधार क्या हैं ?
   अतः हम सभी देश्वासियों से अपिल करना चाहते हैं कि  वीणा संबिधान संशोधन चुनाव मे नहीं जाय | मधेश अभी आग मे जल रहा हैं, कठीन समय से गुजर रहा हैं | हम तो कहते है कि जिस तरह सोना के आग मे डाल कर पकाया जाता है तो सोना की सारी अशुधियाँ जल कर राख हो जाती है और असली सोना प्राप्त होता है | उसी तरह से यह स्थानीय तह का चुनाव हैं , इसमे असली मधेशी जनता रह जायेगी | यह तो अग्नी परिक्षा के जैसा समय हैं | इसी लिए धैर्य रखें छोटी उपलब्धि को छोड  कर बडी उपलब्धी  के लिए आन्दोलन करते रहना होगा |                  

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