Fri. Feb 22nd, 2019

मधेस के लिए सर्वमान्य और सर्वग्राह्य भाषा हिन्दी : अजय कुमार झा

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अजय कुमार झा, जलेश्वर | (हिंदी एक दृष्टिकोण ) मधेस के लिए सर्व मान्य और सर्व ग्राह्य भाषा वह होगा जो हमारे किसान लोग भारत में जाकर बोलते हैं। जो हमारे मजदूर लोग पंजाव,दिल्ली,हरियाणा,विहार और अन्य जगह जाकर बोलते हैं। हमारे विद्वान् लोग काठमांडू में हिंदी में बोलकर अपने को गौरवान्वित महसूस करते हैं। राष्ट्रसेवक लोग नेपाल के पूरव से पश्चिम तक हिंदी को अभिव्यक्ति का माध्यम बनाकर सेवा कार्य में अपने को सहज पाते हैं। हमारे आध्यात्मिक संत सन्यासी और दार्सनिकगण हिंदी में प्रवचन करते हैं और श्रोता शिष्य भक्त और साधकों को श्रवण करने तथा गूढार्थ को समझने में हिंदी में सहज होता है ।सारे उच्चकोटी के विश्वस्तरीय साहित्य वेदका रहश्य उपनिषदों के तत्व भागवत के भावार्थ सर्वश्रेष्ठ ग्रन्थ गीता के गरिमागान पुराणो तथा कुरान बाइबल धम्मपद गुरुग्रंथ त्रिपिटक ताओ कवीर गोरख आदि हजारों रहश्यदर्शी ग्रंथों का समसामयिक विश्लेषण और विवेचन हिंदी के अलाबा अन्य किसी भाषा में उपलब्ध नहीं है। अतः ज्ञान विज्ञान, धर्म अध्यात्म, आयुर्वेद और सामवेद, संगीत और नृत्य, जडीबुटी से जीवन व्यवहार तक,प्रेम से परमात्मा तक,शुभ से सौभाग्य तक,हस्त रेखा से कुंडली तक,कृषि से व्यापार तक, तकनीक से बाजार तक का ज्ञान हमें हिंदी के अलावा अन्य भाषा में संभव नहीं है। मैं खड़ी हिंदी और बनारसी हिंदी की बात नहीं करता हूँ। इसलिए इसका नाम (मधेसी-हिंदी) भाषा रख कर विना विवाद के आगे बढ़ने का प्रयास किया जाय। ।

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