Thu. Oct 18th, 2018

मनमोहन ने देश को कहा अलविदा

manmohan_singh शवेता दीप्ति , एक नजर मनमोहन पर

काठमाणडू 17-o5-014 । आने वाले के साथ–साथ जाने वाले को भी सलाम करने की परम्परा है । भारत अपने दस साल पुराने प्रधानमंत्री को विदा कर रहा है । आज हर ओर मोदी की चर्चा है जो एक प्रखर व्यक्तित्व के मालिक हैं, वहीं मनमोहन सिंह एक शांत और सहज व्यक्तित्व रखते हैं । किसी भी पूर्वाग्रह से परे अगर मनमोहन जी पर एक सरसरी नजर डाली जाय तो भारत की जनता को उनसे उतनी शिकायत नहीं है, जितनी उनकी खामोशी से रही है ।

यह तो विश्लेषक भी मानते हैं कि भारत के विकास में उनके योगदान को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है । प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भारत ने उनके कार्यकाल में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है । विदेशों में भी इनकी छवि अच्छी है और इनका सम्मान भी है ।

विदा लेते हुए इस प्रधानमंत्री के लिए भारत की जनता में मिली जुली भावनाएँ हैं । उन्हें इनसे प्यार भी है और शिकायत भी है । मनमोहन जी के आर्थिक उदारीकरण की नीतियों के कारण भारत के काफी क्षेत्रों में तरक्की हुई है किन्तु अंत में ये नाकाम हो गए । उधर परमाणु मोर्चे पर आपने भारत को विश्व की अगली पंक्ति में ला खड़ा किया । देखा जाय तो अपने पहले कार्यकाल में आप जिस तरह  उभरे, दूसरे कार्यकाल में वह जगह कायम नहीं रख पाए जिसका खा,मियाजा आज काँग्रेस भुगत रही है । बावजूद इसके विश्लेषक मानते हैं कि पिछले दस साल के दौरान उच्च आर्थिक विकास दर बनाए रखना आपकी बड़ी उपलब्धि है । भारत में इस माहौल के कारण रोजगार और धन का सृजन हुआ । लोगों की आय का स्तर बढ़ा । यहाँ तक कि साल २००७ और २००८ के बीच उभरे वैश्विक आर्थिक संकट के दौरान भारत की स्थिति अन्य बड़े देशों के मुकाबले बेहतर रही । बहरहाल परिवर्तन सृष्टि का नियम है और यह आवश्यक भी है, नहीं तो खुदा होने का गुमां मानव को हो जाएगा । मनमोहन सिंह एक सौम्य, शांत और सहज प्रधानमंत्री के रूप में हमेशा याद रहेंगे । प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने शुक्रवार को आए चुनाव नतीजों का स्वागत किया है और भाजपा के नेतृत्व में बनने वाली देश की अगली सरकार को शुभकामनाएं दी हैं.

आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.

Leave a Reply

avatar
  Subscribe  
Notify of