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महामण्डलेश्वर हेमानन्द गिरि को सम्मान (फोटो फिचर सहित)

हिन्दू धर्म ज्ञान और विज्ञान है, कोई अन्धविश्वास नहींः हेमानन्द गिरि

लिलानाथ गौतम/ काठमांडू, १८ जनवरी ।

नेपाल विश्व हिन्दू महासंघ की सक्रियता में श्री अनन्त विभूषित महामण्डलेश्वर स्वामी हेमानन्द गिरि को नेपाल में स्वागत तथा सम्मान किया गया है । विहीबार काठमांडू में आयोजित एक कार्यक्रम के बीच पूर्व उपराष्ट्रपति परमानन्द झा के हाथों महामण्डलेश्वर गिरि सम्मानित हुई है । गिरि को हिन्दू तथा बौद्ध धर्मावलम्बी अन्य विभिन्न संघ–संस्था ने भी सम्मान किया है । हिन्दू दर्शन और अध्यात्मिक जगत के लिए नेपाल और भारत दोनों देश में परिचित नेपाली नारी महामण्डलेश्वर स्वामी हेमानन्द गिरि वही नारी हैं, जो सनातन हिन्दू व्यवस्था में ही पहली बार शंकाराचार्य के दावेदार के रुप में आगे आई है । महामण्डलेश्वर के रुप में गत साल स्थापित होने के बाद गिरि नेपाल और भारत दोनों देश में परिचित नाम है ।


सम्मान कार्यक्रम में बोलते हुए महामण्डलेश्वर गिरि ने कहा कि नेपाल ऐसा देश है, जो सिर्फ नेपाल और भारत के लिए ही नहीं, विश्व जगत के लिए एक अध्यात्मिक भूमि है । हिन्दू धर्म को ज्ञान और विज्ञान कहते हुए उन्होंने कहा– ‘लेकिन पश्चिमा संस्कृति का देखाव और हमारे कमजोरी के कारण आज युवा हिन्दू धर्म अन्तरनिहित ज्ञान और विज्ञान से विमुख होते जा रहे हैं । अब युवाओं को हिन्दू धर्म में जो ज्ञान और विज्ञान है, उसकी ओर आकर्षित करना चाहिए ।’ गिरि का कहना है कि हिन्दू धर्म में कोई भी अन्धविश्वास नहीं है, सिर्फ उसमें छिपा हुआ विज्ञान को जानने की आवश्यकता है । अध्यात्मिक जगत के लिए नेपाल को ‘गुरु राष्ट्र’ कहते हुए उन्होंने आगे कहा– ‘लेकिन दुःख की बात यह है कि आज नेपाल को धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र घोषित की गई है । अब उस को वापस कर पुनः हिन्दू राष्ट्र घोषणा करना चाहिए । इसके लिए युवाओं में हिन्दू धर्म में अन्तरनिहित विज्ञान के बारे में बताना होगा ।’


कार्यक्रम में बोलते हुए प्रमुख अतिथि तथा पूर्व उपराष्ट्रपति परमानन्द झा ने कहा कि नेपाल सामाजिक रुप में हिन्दू राष्ट्र है, लेकिन राजनीतिक रुप में भी इस देश को धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र घोषणा किया गया है । कार्यक्रम में उन्होंने कहा– ‘संविधान जारी करते वक्त हो या अन्य कोई राजनीतिक निर्णय करते वक्त, हमारे यहाँ बहुमत का कदर किया जाता है । प्रजातन्त्र का सौन्दर्य भी यही है । लेकिन नेपाल में ९४ प्रतिशत जनता ‘ॐकार’ परिवार के होते हुए भी संविधान जारी करते वक्त उन लोगों की भावना को कदर नहीं किया । उनका दावा था कि संविधान जारी करते वक्त किस तरह जारी हो गया, इसके बारे में उन को भी कुछ पता नहीं चला ।


कार्यक्रम को सम्बोधन करते हुए उपराष्ट्रपति झा ने महामण्डलेश्वर स्वामी गिरि को शंकाराचार्य पद प्राप्ति के लिए शुभाकामना दिया । उन्होंने कहा– ‘जिस तरह नेपाली नारी भारतीय नाट्य (सिनेमा) जगत में ऊँचे स्थान पर पहुँची है, उसी तरह अध्यात्मिक जगत में भी नेपाली नारी किसी से कम नहीं है, यह सन्देश महामण्डलेश्वर गिरि ने दी है । मैं कामना करता हूं कि शंकाराचार्य पद में भी उनको मिले ।’ कार्यक्रम के दूसरे अतिथि तथा हिमालिनी मासिक के प्रबन्ध निदेशक सचिच्चदानन्द मिश्र ने भी कार्यक्रम को सम्बोधन करते हुए महामण्डलेश्वर गिरि को शुभकामना व्यक्त किया ।


कार्यक्रम में नेपाल विश्व हिन्दु महासंघ के महासचिव रामनाथ मैनाली, उपाध्यक्ष विजय प्रकाश लगायत अन्य पदाधिकारी, वरिष्ठ फिल्मी कलाकार तथा निर्देशक नीर शाह लगायत वक्ताओं ने भी नेपाल को हिन्दू राष्ट्र बनाने के लिए जोड दिए । कार्यक्रम में आयोजक संस्था के उपाध्यक्ष विजय प्रकाश ने कहा कि नेपाल विश्व हिन्दू महासंघ नेपाल को पुनः हिन्दू राष्ट्र बनाने की अभियान में सक्रिय है । उन्होंने कहा ‘अभियान के दौरान महामण्डलेश्वर स्वामी हमानन्द गिरि को नेपाल में स्वागत और सम्मान करने का अवसर प्राप्त हुआ है ।’


स्मरणी है, स्वामी हेमानन्द गिरि का जन्म नेपाल के ही झापा जिला में हुआ था । भारत में रह कर अध्यात्मिक कर्म में सक्रिय होते हुए वह अपने को नेपाली नारी कहने में गर्व करती हैं । भारत उत्तराखण्ड स्थित बन्द्रीनाथपीठ वदरिकाश्रम के शंकराचार्य पद के लिए वह अभी दावेदार हैं । उक्त पद के लिए गिरि उत्कृष्ट चार प्रतिस्पर्धी में से एक हैं ।

देखिए कार्यक्रम के अन्य वक्ता तथा सहभागी (फोटो फिचर)

 

 

 

 

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