Sun. Sep 23rd, 2018

मोदीजी के भ्रमण से जनकपुर सहित पुरे नेपाल में धार्मिक पर्यटन द्रुतगती से बढ़ेगा : अशोक वैद्य

भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘जनकपुर भ्रमण’ और नेपाल–भारत संबंधों को जानने के लिए भारत–नेपाल सहयोग मंच के केंद्रीय अध्यक्ष अशोक वैध से ‘हिमालिनी’ संवाददाता मुरली मनोहर तिवारी द्वारा अन्तर्वार्ता

 

० वर्तमान अवस्था मे नेपाल–भारत रिश्ते को किस तरह पर आँकते है ?
– प्रधानमंत्री ओली सद्भाव भ्रमण के लिए भारत गए थे, सद्भाव भ्रमण में कोई नया मुद्दा नहीं उठा, लेकिन नेपाल–भारत के संबंध में जो पुराने समझौते हुए हैं, उसे क्रियान्वयन करने के प्रयास हुए । इस भ्रमण में १२बूंदे प्रेस विज्ञप्ति जारी हुई । कृषि, जलस्रोत तथा यातायात में सहकार्य के लिए सहमति हुई, रक्सौल से काठमांडू रेलमार्ग विस्तार, कोशी उच्च बांध परियोजना का आगे बढ़ाने और जलमार्ग से नेपाल को जोड़ने की सहमति हुई । पूर्व में नेपाल–भारत के रिश्ते में जो खटास आई थी, वो खटास दूर हुई और कूटनीतिक संबंध मजबूत हुए हैं ऐसा मुझे लगता है ।
० भारतीय प्रधानमंत्री के ‘जनकपुर भ्रमण’ में क्या संदेश छिपा है ?
नेपाल एक भूपरिवेष्ठित मुल्क है, जिसकी अपनी बाध्यता है, मोदी जी ने खुद से पहल करके उन बाध्यताओ को दरकिनार करके, भूपरिवेष्ठि परिस्थितियों को खारिज करते हुए, ‘सागरमाथा को सागर’ से जोड़ने का संकल्प किया । ये बहुत बड़ा संदेश है, इसकी गहराई में जाएं तो बहुत सार्थक बातें आती है । अब रेल द्वारा रक्सौल–काठमांडू जोड़ने की बात आई है, नेपाल में रेल आने से देश का कायापलट हो जाएगा, रेल आने से समय और लागत की बचत होगी, इससे ईंधन बचेगा, ढुवानी खर्च कम होगा । देश की तरक्की होगी ।
० नेपाल–भारत रेल लाइन के बारे में कई दशक से सुनते आ रहे हैं, लेकिन योजना एक कदम नही बढ़ती, क्या इसबार रेल योजना मूर्तरूप ले पाएगी ?
आपका प्रश्न एकदम सही है, बात होती है, समझौता भी होता है, लेकिन कार्यान्वयन पक्ष कमजोर रहता है, इस बार कार्यान्वयन पक्ष को बिशेष ग्राह्यता दिया गया है । पहले के बहुत सारे सहमति–समझौता कार्यान्वयन की प्रतीक्षा में हैं, इसमें दोनों देशों के विदेश मंत्रालय को सक्रिय पहल करना होगा । उदाहरण के लिए, २००८ में तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. रामवरण यादव भारत गए थे, जिसमे कई समझौते हुए लेकिन कार्य आगे नही बढ़ा । बीरगंज में नेपाल–भारत मैत्री सभागृह निर्माण का समझौता हुआ, रामायण सर्किट–बुद्ध सर्किट की घोषणा हुई, काशी–विश्वनाथ को पशुपतिनाथ से जोड़ने की बात हुई, ये सारे महत्वपूर्ण कार्य रुके हुए हैं या बहुत सुस्त गति से आगे बढ़ रहे हैं, इनका जल्द कार्यान्वयन होना चाहिए ।
० भारतीय प्रधानमंत्री के ‘जनकपुर भ्रमण’ के बाद क्या होगा ?
भारतीय प्रधानमंत्री का भ्रमण हम लोगाें के लिए खुशी की बात है, उनके भ्रमण के बाद जनकपुर धाम का धार्मिक स्थल और पर्यटकीय स्थल के रूप में विकास होगा, इसमें रामायण सर्किट का काम द्रुतगति से आगे बढ़ेगा । सबसे बड़ी बात मोदी जी के भ्रमण के बाद जनकपुर धार्मिक और पर्यटकीय स्थल के रूप में विश्व मानचित्र में स्थान ग्रहण करेगा ।
० प्रदेश नंबर २ को क्या लाभ मिलेगा ?
इसका लाभ केवल प्रदेश नंबर २ को ही नही बल्कि पूरे नेपाल को मिलेगा । भारत हमेशा नेपाल में विकास, शांति और स्थिरता कायम करने में सहयोग करता आया है, अब ये और ज्यादा होगा । नेपाल के प्रधानमंत्री का भ्रमण फिर भारत के प्रधानमंत्री का भ्रमण इसको नई ऊंचाई देगा । नेपाल में स्थानीय, प्रदेश और केंद्र का चुनाव हो चुका है, अब विकास करने की बारी है । मोदी जी का नारा है ‘सबका साथ–सबका विकास’ और ओली जी का नारा है ‘समृद्ध नेपाल–सुखी नेपाली’ अब दोनों देश मिलकर साथ भी निभाएंगे और विकास कार्य में लगेंगे, इसका सकारात्मक माहौल बन चुका है ।
० एक तरफ भ्रमण तो दूसरे तरफ बॉर्डर पर तार–कांटी और वीसा लगाने की बात हो रही है, ये कैसा मधुर संबंध है ?
ये बातें सही नहीं है । सोशल मीडिया की बातें पूरी तरह सही नही होती, उसे कुछ लोग अपने अनुसार तोड़–मरोड़ कर प्रस्तुत करते हैं । हां सुरक्षा के मद्देनजर परिचयपत्र सिस्टम लग सकता है, अब परिचयपत्र तो होटल, बस, नेपाल एयरलाइन्स में भी दिखाने पड़ते हैं, परिचय पत्र सिर्फ भारत–नेपाल में ही नही पूरे विश्व मे दिखाने पड़ते हैं, इसलिए इसमें कोई आश्चर्य की बात नहीं है और इसका दोनों देशों के मधुर संबंध पर कोई असर नही पड़ेगा ।
० सोशल मीडिया में दुष्प्रचार, दूतावास कैम्प पर हमला, कुछ नेताओं के वक्तव्य, क्या भारत विरोधी माहौल को पुख्ता नहीं करते हैं ?
भारतीय प्रधानमंत्री के आने के पहले दूतावास कैम्प पर हमला बहुत ही शर्मनाक घटना है, सोशल मीडिया पर दुष्प्रचार और वक्तव्य दूषित मानसिकता से ग्रसित लोगो का कुकृत्य है, ऐसे लोग भारत ही नहीं नेपाल के भी शुभचिंतक नहीं है ।
० क्या नेपाल दो पड़ोसी मुल्कÞ के आपकी खींचतान में मोहरा बना हुआ है ?
बिल्कुल नही ! मुझे नही लगता किसी भी दो देश के संबंध सुधारने में तीसरे को घसीटा जाए, कुछ मीडिया वाले इसे हवा दे रहे हैं । भारत और चीन दोनो चाहते हैं कि नेपाल ट्रांजिट पॉइंट बने, ऐसा होने से चीन का माल नेपाल के रास्ते भारत पहुँचेगा और भारत का माल नेपाल के रास्ते चीन पहूँचेगा, जिसकी लागत कम होगी, माल सस्ता पड़ेगा, इससे भारत–नेपाल–चीन से आयात–निर्यात को बढ़ावा मिलेगा, व्यापार के नए अवसर की सृजना होगी । नेपाल को दोनों देशों से लाभ मिलेगा ।
० आप प्रतिष्ठित उद्योगपति हैं, अपने तमाम व्यस्तता के बावजूद नेपाल–भारत संबंधों में इतनी रूचि क्यों लेते है ?
मैं उद्योगपति बाद में हूँ, इस देश का नागरिक पहले हूँ मेरे भी कुछ नैतिक दायित्व हैं उसे निभाने में पीछे नही हट सकता । मुझे व्यापार के अलावा सामाजिक जिम्मेदारी भी पूरी करनी होती है, मानवीय कल्याण में सहयोग करता हूँ, नेपाल के पड़ोसी देशों से संबंध सुधारने में भी पहल करता हूँ, जिससे दोनों देशों का आर्थिक समृद्धि और विकास हो सके । भारत–नेपाल सहयोग मंच का केंद्रीय अध्यक्ष होने के नाते मेरी जिम्मेदारी और ज्यादा हो जाती है ।
० आप व्यक्तिगत रूप में भारतीय प्रधानमंत्री के ‘जनकपुर भ्रमण’ पर क्या संदेश देना चाहेंगे ?
मैं व्यक्तिगत और भारत–नेपाल सहयोग मंच के केंद्रीय अध्यक्ष के नाते मोदी जी का स्वागत और अभिनंदन करता हूँ, साथ ही ये भी कहूँगा कि हमारा संबंध सिर्फ पड़ोसी मुल्क का नही है, हमारा पुरातन काल से धार्मिक और सांस्कृतिक संबंध रहा है, उस संबंध के धरोहर को पुख्ता करके आने वाले पीढ़ी को देना हमारा कर्तव्य है, जिससे नेपाल–भारत मैत्री अमर रहे ।

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