Thu. Oct 18th, 2018

यह नेपाल है और यहाँ कुछ भी हो सकता है

श्वेता दीप्ति,काठमाण्डू २५,जनबरी । ये नेपाल है, यहाँ कुछ भी हो सकता है यह वाक्य कई बार, कई मौके पर सुनने में आए । परम्पराएँ टूटती हैं और मान्यताएँ बदलती हैं, विरोध भी होता है और फिर उसे मानने को व्यक्ति विवश भी हो जाता है । किन्तु आज जो नेपाल की राजनीति केइतिहास में हुआ वह किस सम्भावना को जन्म दे रहा है ? क्या इसके बाद जो परिणाम आएगा उसे जनता स्वीकार कर लेगी या फिर एक द्वन्ध का जन्म होगा । मर्यादा और नियमों की बात करने वाले पक्ष ने आज जो नमूना पेश किया है उसे किस श्रेणी में रखा जाय ? किसी भी संसद का सभामुख किसी पक्ष prachanda-baburam-morchaविशेष से प्रभावित नहीं होता है । सभामुख महोदय ने आज स्वय. प्रस्तावना को पढ़कर अपनी स्थिति को स्यष्ट कर दिया है । तटस्थता की नीति को छोड़ उन्होंने प्रवक्ता की भूमिका का निर्वाह किया है क्या यह उचित था ? भगदड़ और हंगामा के बीच प्रस्ताव पारित भी हो गया । प्रस्ताव समिति में ४९ सदस्य हैं जो सभी सत्ताधारी पक्ष के हैं । सत्तापक्ष का मानना है कि संविधान निर्माण की राह खुल गई किन्तु क्या दमन और दवाब के बल पर बना संविधान कामयाव होगा ? मर्यादाविहीन राह पर चलकर जो संविधान सामने आएगा वो कितनो को संतुष्ट करेगा ये तो आने वाला वक्त बताएगा फिलहाल तो यही कहा जा सकता है कि यह नेपाल है और यहाँ कुछ भी हो सकता है ।

आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.

Leave a Reply

avatar
  Subscribe  
Notify of