Mon. Nov 19th, 2018

या देवी र्सवभूतेष शक्ति रुपेण संस्थिता

या देवी र्सवभूतेष शक्ति रुपेण संस्थिता
नमस्तस्यैं नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमों नमः
२०६८ विजया दशमी की शुभकामना । माँ दर्गा हम सभी को नेपाली जनता की चिर प्रतिक्षित शान्ति, नव संविधान निर्माण प्रक्रिया को पूरा करने की शक्ति प्रदान करें, यही पर्रार्थना है ।
स्वामी रामकृष्ण परमहंस जी कहते है कि- परोपकार नहीं सेवा करों, क्योंकि परोपकार में व्यक्तिनिष्ठ अभिमान का गंध रहता है, पर सेवा में नम्रभाव निहित रहता है । मानव तो निमित्त मात्र होता है, करने-कराने वाला तो अपरोक्ष शक्तिर् इश्वर है । सेवा भाव मानव अन्तस्करण को निर्मल बनाता है, पर दुःख की बात यह कै कि नेपाली जनता और राजनेता के अन्तस्करण से सेवा भाव लुप्त हो गया है । सबके सब क्षणिक समृद्धि तथा सत्ता प्राप्ति के खेल में आकण्ठ डूबते हुए लक्ष्य साधना के मार्ग से दिग्भ्रमित हो चुके हैं । राजनीति क्षेत्र सत्ता स्वार्थ में लुप्त होकर राष्ट्र और राष्ट्रियता को भूला दिया है तो नेपाल के व्यापारी क्षेत्र तो मानवता को ही इतिश्री कर दिया है । मिर्ठाई दुकान, होटेल, फास्ट फूड, रेस्टुराँ, भोजनालय, डेरी आदि उद्योग तो नेपाली जनता के दैनिक जीवन से ही खिलवाड करते हुए सडे-गले भोज्य पदार्थों एवं ढल के दर्ुगन्धयुक्त एवं प्रदूषित पानी में विभिन्न भोज्य परिकार बनाकर उपभोक्ताओं को खिलाने जैसे समाचारों से पत्र-पत्रिका भरी रहती है । उपभोक्ता हित संरक्षण मञ्च के महासचिव ज्योति बानियाँ ने कहा कि- सडे-गले तरकारी, मिर्ठाई आदि खिलाकर जनस्वास्थ्य के साथ खिलवाडÞ करने वालांे के ऊपर कडÞी कारवाई होनी चाहिए । खाद्य ऐन २०२३ में उल्लेख है कि दूषित खाद्य पदार्थ उत्पादन, विक्री-वितरण करने एवं निकासी पैठारी करनेवालों को ५ हजार से लेकर १० हजार रु. दण्ड तथा दो वर्षतक की कैद का प्रावधान है, तो उपभोक्ता संरक्षण ऐन २०५४ में गुणस्तरहीन उपभोग्य वस्तु उत्पादन, विक्री-वितरण करने वाले को ५ वर्षकैद तथा १ लाख रु. तक का जर्ुमाना लगाने का प्रावधान है । यहाँ पर प्रश्न उठता है कि क्या ऐन स्वयं कार्यान्वित होगा या इस कार्य के लिए नियुक्त अधिकारी वर्ग ऐन को कार्यान्वित करेगा । ऐन बना देना बडी बात नहीं है, ऐन को कार्यान्वित करने वालों को अपने कार्य के प्रति उत्तरदायित्वपर्ूण्ा निरन्तर सत्प्रयास की आवश्यकता है । यह कार्य तभी हो सकता है, जब इस देश में नव संविधान निर्माण के तहत स्वार्थरहित कर्तव्यनिष्ठ सरकार का गठन होगा, अन्यथा नहीं ।
वैसे तो फिल हाल नवसंविधान निर्माण होना असम्भवसा लगता है, पर देश में बहुत ही उहापोह के बाद जनता की आकांक्षा पर खडा और विगत में अपने कार्यकाल में जनपक्षीय एवं राष्ट्रहित के कार्य करने वाले माओवादी उपाध्यक्ष डा. बाबुराम भट्टर्राई के प्रधानमन्त्री बनने से जनता में क्षीण किन्तु आशा की नई किरण जागी हैं । उम्मीद है कि भट्टर्राई अपनी कुशल राजनीतिक सूझबूझ से नेपाल में व्याप्त शंका-उपशंकाओं को हटाते हुए भारतीय राजनीति का विश्वास प्राप्त करने के साथ-साथ नेपाली जनता की आकांक्षाओं को पूरा करने में सफल होंगे । इस दिशा में माओवादी और मधेशवादी विचार धाराएँ समय की मांग के अनुसार एकजूट होकर एक दूसरे को समझते हुए दोनों ही महाशक्तियाँ एकत्रित हर्ुइ हैं, यह राष्ट्र के लिए शुभ संकेत है । संयुक्त लोकतान्त्रिक मधेशी मोर्चा के ऊपर जो उत्तरदायित्वपर्ूण्ा जिम्मेवारियाँ आई है, उसे बखुबी निभाएँ । मोर्चा में समाहित जितने भी मधेशी नेता लोग हैं, उन्हें चाहिए कि अपने-अपने स्तर पर मधेश की मुद्दों के साथ न्याय करें और क्रियाशील प्रधानमन्त्री भट्टर्राई को भरपूर सहयोग देते हुए राष्ट्रीय मुद्दों को एवं मधेश के न्याय संगत मुद्दों को क्रियान्वित करने का प्रयास करे, इसीमें मधेशवादी नेताओं की भलाई है ।

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