Thu. Sep 20th, 2018

राजनीति खेल नहीं अपितु जीवन है : अजय कुमार झा

जलेश्वर, राजनीति को यदि हम खेल और षडयंत्र के रुप मे लेते हैं, तो नागरिक, देश, धर्म और संस्कृति सबका विनाश सुनिश्चित है। वास्तव में राजनीति सभी नीतियों का राजा है। सभी नीतियों का मार्ग निर्देशक है। सभी नीतियों का नियंत्रक और पोषक है। चाहे वह शिक्षा नीति हो या अर्थ नीति। जो धर्म सबको धारण किए हुए है,उसको भी राजनीति के आगे नतमस्तक होना पड़ता है। वैज्ञानिक , आविष्कारक, दार्शनिक और गुरु तक को राजनीति प्रभावित करती रहती है। दवाव और नियंत्रित करती रहती है। अपने स्वार्थ के अनुसार प्रयोग करती है। और मानव का सबसे बड़ा दुर्भाग्य यही से शुरु होता है। क्योंकि जो अति महत्वाकांक्षी, अति लोभी,दुष्टचरित्र, हिंसक, षडयंत्रकारी,भ्रष्ट,अहंकारी,अल्पज्ञ, उदंड और नकारात्मक सोच तथा विध्वंसकारी चरित्र के लोग होते हैं। वे ही आज के राजनीति में सफल देखे जाते हैं। इस तरह के घटिया, क्षुद्र, और विनाशकारी व्यक्ति के हाथों में विवेकशील, सृजनशील, दार्शनिक और वैज्ञानिकों के समग्र क्रियाकलापों को नियंत्रण और संचालन करने का अधिकार सौप देना राजनीति की  गरिमा को खंडित करने जैसा है।मानवता को अभिशप्त करने जैसा है।समाज को समाप्त करने जैसा है तो संस्कृति को लुप्त करने जैसा है।

नेपाल के राजनीति में हुए अभूतपूर्व परिवर्तन और बैचारिक राजनैतिक आन्दोलन ने नेपाली मिट्टी के कण कण में छुपे एकल प्रभुत्व और परिवारवाद को जड़ से ही उखाड़ फेका है। किसी भी समाज और राष्ट्र के विकास और गरिमा के लिए गणतंत्र सर्वोत्तम और आधुनिक मार्ग है। प्रणाली है। जहाँ चाकरी नहीं चतुराई का मुल्य होता है। व्यक्ति का नहीं समूह का मुल्य होता है। अपनो का नहीं अच्छों का मुल्य होता है। नाता और कृपा नहीं वल्कि दक्षता और क्षमता का मुल्य होता है। बहुजन हिताय ही नहीं सर्वजन हिताय का मुल्य होता है। जातिवाद नहीं राष्ट्रवाद का मुल्य होता है। इसी सन्दर्भ में देखा जाय तो आज का नेपाल नए नेपाल की ओर गतिशील है। गणतंत्र नेपाल को श्री के. पि.ओली के रूप में एक मजबूत प्रधान मंत्री मिला है।औपचारिक शिक्षा भले ही कम है ; परन्तु व्यवहारिक और राजनैतिक ज्ञान के हिमालय के रूप में दृढ निश्चयी, दृढ संकल्पित और (समृद्ध नेपाल सुखी नेपाल) रूपी नवराष्ट्रवाद का महान लक्ष्य लेकर चलनेबाला व्यक्ति साधारण नहीं हो सकता। वैसे भी नेपाल में तथाकथित विद्वानों का ही भीड़ है। इन्हें जो चाहे खरीद ले। जिस देस की इच्छा हो वो नेपाल के शिक्षा नीति को अपने अनुसार ढाल दे सकता है। यहाँ के विद्वानों को सिर्फ विदेश घुमने का अवसर मिलजाय।फिर इनसे नेपाल को गाली दिलवाओ या नेपाली संस्कृति का धज्जी उड़वाओ। ये  बड़े गौरव के साथ तैयार रहेंगे। इस प्रकार सोचने पर प्रधान मंत्री ओली जी को नेपाल के पौराणिक,एतिहासिक और आधुनिक; तीनो काल के सरकार प्रमुख से कही अधिक गरिमावान और महिमावान राष्ट्रनायक के रूप में देखा जा सकता है। मधेस को अबतक के किसी सरकार और शाषक ने समझने का प्रयास तक नहीं किया। स्वयं प्र म ओली जी की  भी मधेस के प्रति यही परम्परागत सोच थी । जिसके परिणाम स्वरुप मधेस में कम्युनिष्टो का पराजय और अनिच्छित मधेसी दलों की  विजय हुई । मधेसी नेताओं के अदूरदर्शिता और दलबदलू प्रबृत्ति को जानते हुए भी पहाडियों के द्वारा मधेसीयों के प्रति प्रयोग किए गए अपमान जनक शब्दों और व्यवहारों के कारण मधेसी जनता ने मधेसी नेताओं को जिताया। राजनीति को खेल और मखौल के रूप में लेने बाले कांग्रेसियों का देश  से सफाया होना ओली की  राजनैतिक दूरदर्शिता ही थी । अन्यथा निधि मात नहीं खाते। परन्तु जो हुआ शुभ ही हुआ है। राजनीति कोई खेल नहीं है। अपितु यह किसी समाज को, राष्ट्र को, जाति जो, संस्कृति को और धर्म विशेष को जापान, चीन, अमेरिका, स्विटजरलैंड, यूरोप, आष्ट्रेलिया इन देशों की तरह विकास रूपी हिमालय के उतुंग शिखर पर बिराजमान करबा सकता है। तो सीरिया, अफगानिस्तान, ईराक,नेपाल और बिहार की तरह विनाश  के दलदल में भी धसा सकता है। नेपाल हर क्षेत्र में बदतर होता  जा रहा है। आज तक की  सभी सरकार लुटेरों का ही पोषण,रक्षण और संबर्धन करती आई  है। जनता को कभी शिशु प्रजातंत्र के हत्या के नामपर लुटा गया है तो कभी राजावादियों के नाम पर डराया गया है। सत्ता हर हाल में कोइराला परिवार में या देउबा के हाथों में ही सीमित रहे; इस षडयंत्र में कांग्रेसियों ने अपनी पूरी ऊर्जा लगाकर बाल बुद्धि का परिचय देने के अलाबा और कुछ नहीं कर पाया।

नेपाल ,खनाल, दाहाल, भट्टराई, थापा इन में से किसी का भी योगदान उल्लेखनीय नहीं है। सब के सब राजनैतिक शतरंज के प्यादे और घोड़े सावित हुए हैं। सब के सब पद लोलुप,कमजोर और मजबूर साबित हुए हैं। राजनैतिक अदूर्दर्शिता और खंडित मानसिकता के कारण 2046 के बाद नेपाली जनता ने हर प्रकार से दुःख और आत्मग्लानि का ही सामना किया है। परन्तु आज देश  को एक ईमानदार राष्ट्रनायक मिला है। जिसमे देश  को नयी दिशा  देने की  दृढइच्छा शक्ति और बुलंद इरादा भी है। (न घूस  खाऊंगा न किसी को घूस  खाने दूंगा) ओली का यह महावाक्य पृथ्वीनारायण साह के माहवाणी घूस  लेने और देने बाला दोनों देश  के शत्रु होते है) को भी पीछे छोड़ दिया है। नेपाल के अबतक के सभी प्रधान मंत्री किसी ख़ास जाति  या पार्टी मात्र के हुए हैं। किसी में भी समग्र नेपाल को नेतृत्व प्रदान करने का सोच पैदा नहीं हुआ। या कहे सबके सब कूप मंडूक सावित हुए हैं।
जबकि प्रधान मंत्री सिर्फ देश  के होते हैं। और अब यह भाव नेपाल के आदरणीय प्रधान मंत्री ओली जी में झलकने लगा है। अतः यही से देश  विकास का मार्ग भी प्रशस्त होगा। नेपाली राष्ट्रीयता भी मजबूत होगी। देश  की अखंडता अखंड रहेगी। देश में बिधि का शाषण होना अनिवार्य है। विधि के शासन के अंतर्गत सरकारी अधिकारियों को मनमाना विवेकाधिकार प्राप्त नहीं होंता है, किसी भी व्यक्ति के पास विवेकाधिकार की असीमित शक्तियां नहीं होती हैं। सभी व्यक्तियों को विवेकाधिकार का प्रयोग विधि के अनुसार दी गई शक्तियों के अंतर्गत करना होता है । जबकि यहाँ हत्यारों को भी न्यायालय के फैसला बिरुद्ध आम माफ़ी दे दिया जाता है। हत्यारे खुलेआम घुमते,बिचरते,सम्मानित होते नजर आ रहे होते हैं। कभी न्यायपालिका तो कभी कार्यपालिका मजबूर नजर आते हैं। राजनीति मदारियों का खेल नजर आने लगा है। जिस प्रकार स्वयमसेवा काम नहीं जीवन जीने की उत्कृष्टतम नमूना है। उसी प्रकार राजनीति खेल और पेसा नहीं है। बल्कि यह विशाल हृदय बालों के बिराट बुद्धि और दार्शनिको के दूरदृष्टि के संयोग का दिव्य फल है। और इसी फल को पाने का लक्ष्य आम नागरिको का होता है। जो गणतंत्र में ही संभव है

। इन सभी पहलुओं पर आदरणीय प्र. म. जी का ध्यानाकर्षण हेतु निवेदन करता हूँ।

आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.

Leave a Reply

avatar
  Subscribe  
Notify of