Fri. Oct 19th, 2018

राजपा को अहंकार त्यागना होगा : उपेन्द्र यादव

 

काठमांडू | ११ जुलाई | संघीय समाजवादी फोरम नेपाल के अध्यक्ष उपेन्द्र यादव ने कहा है कि हमने चुनाव में भाग लिया इसलिय अत्यधिक मात्र में लोगों की सहभागिता हुई | हमारी पार्टी अंतिम समय में चुनाव में भाग ली चौतर्फी हमारे पार्टी के लोगो पर प्रहार हुआ उसके बाबजूद जो परिणाम आया हम संतुस्ट हैं | हमारे उपर सुनयोजित ढंग से अनर्गल प्रचारबाजी किया गया फिर भी हम चुनाव में भाग लिए | इससे लोकतन्त्र मजबूत हुआ है |चुनाव के जरिये हमने मधेश से लेकर हिमाल तक पहंचने का प्रयाश किया है लोगों ने माना भी है | हमारी पार्टी अब राष्ट्रीय पार्टी के रूप में आ गयी है |

श्री यादव ने आगे कहा कि जबतक मधेशी जनता का मांग पूरा नही होगा तबतक पूरा राष्ट्र का निर्माण नही हो सकता | हमारा मानना है कि अब जो संशोधन होगा उसको समस्या समाधान होने के हिसाव से संशोधन होना चाहिए भाड़ा टालने के हिसाब से नही | अभी का जो बिधेयक है उससे सभी समस्या का समाधान संभव नही है इसलिए वर्तमान बिधेयक को पुनर्मार्जित करके पुरे राष्ट्र का समस्या समाधान करने के रुपमे आना पड़ेगा | श्री यादव का मानना है कि अभी जो बिधेयक है वह अगर पास हो भी जाता है उसके बाद भी संविधान संशोधन फिर से करना ही पड़ेगा | इससे पुरे राष्ट्र की समस्या का समाधान नही हो सकता | सीमांकन का समस्या मूल है वैसे इसके अतिरिक्त भी कई समस्याएं है जो कि वर्तमान विधेयक से पूरा नही हो सकता | वैसे अगर पास होता है तो हम इसके पक्ष में होंगे|

उन्होंने प्रतिप्रश्न करते हुए कहा कि आखिर चुनाव को एक चरण से दो चरण में फिर तीन चरण में ले जाने का कारण क्या था | यह तो संविधान संशोधन के लिए ही किया गया था लेकिन नही हुआ |

राजपा के बारे में उन्होंने कहा कि राजपा के सभी लोग चुनाव प्रचार में थे उनका कार्यकर्ता चुनाव में उम्मेदवार थे चुनाव लड़े है और उसके बाद भी यह कहना कि हम चुनाव बहिष्कार करेगें का कोई औचित्य नही है | उन्होंने सल्लाह दिया की उनलोंगों को अंहकार त्यागना पड़ेगा |

हमने कोई अधिकार का कुंठित नही किया है चुनाव में भाग लेना अधिकार प्राप्त के पक्ष में है | मोरंग में ८० प्रतिशत जनता चुनाव में भाग लिया | यह दिखाता है कि जनता चुनाव के पक्ष में है | हिन्दी का नाम नहीं लेते हुये एक प्रश्न के जवाव में उन्होंने कहा कि हमारी मान्यता है कि नेपाल में बोली जाने वाली सभी भाषा को मान्यता मिलनी चाहिए |

उन्होंने जोर देते हए कहा कि मधेश की जनता बहुत ही पिछड़ा हुआ अहि ख़ास करके मधेश के उपेक्षित वर्ग दलित , जनजाति  जबतक इनकी सही सहभागिता नही होगी देश कविकास नही हो सकता | वे आज सुवह कान्तिपुर के हेडलाइन पर अपना विचार रख रहें थें |

 

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