Tue. Nov 20th, 2018

रात में देर से सोने वाले बच्चे होते हैं चंचल, नहीं टिकता एक जगह ध्यान


हिमालिनी डेस्क
काठमांडू, १३ जुलाई ।
अगर आपका बच्चा बहुत ज्यादा एक्टवि है या चंचल है और आप उसकी चंचलता को लेकर परेशान हैं तो बच्चे के सोने का समय सुधार लें ।

एकाग्रता में कमी से संबंधित ‘हाइपरएक्टिविटी डिजाँर्डर’ (एडीएचडी) के असर को कम करने में नींद अहम भूमिका निभा सकती है । समाचार एजेंसी सिन्हुआ के मुताबिक, मडरेक चिल्ड्रेंस रिसर्च इंस्टीट्यूट (एमसीआरआई) ने एक शोध में कहा कि एडीएचडी के लक्षण ७० फीसदी ऐसे बच्चों में पाए गए, जिन्हें नींद आने में दिक्कत होती है ।

प्रमुख शोधकर्ता मेलिस्सा मुलरेनी के अनुसार, सोने के समय की नियमित आदतों में सुधार से एडीएचडी पीडÞित बच्चों में खास अंतर लाया जा सकता है ।

उन्होंने कहा कि शोधकर्ताओं ने संकेत दिया कि एडीएचडी ऐसे बच्चे, जिनकी दिनचर्या एक सी होती है, वे सोते समय कम परेशान रहते हैं और आसानी से सो जाते हैं ।

रिपोर्ट में मुलरेनी के हवाले से कहा गया कि जिन बच्चों में अच्छी आदतें होती है, वे रात में सोते समय आम तौर पर बहस नहीं करते और लंबी व अच्छी नींद लेते हैं, जबकि दिन में वे ज्यादा चौकन्ने रहते हैं व कम सोते हैं ।

उन्होंने कहा कि यहां तक कि यदि आप अच्छी तरह से नहीं नींद लेते हैं, तो आप एडीएचडी की शिकायत के बगैर भी अच्छी तरह से ध्यान केंद्रित नहीं कर पाएंगे ।

मुलरेनी ने कहा कि हमारा ‘बाँडी क्लाँक’, जो हमें सोने के संकेत देती है, वह दिन के उजाले, तापमान व भोजन के समय जैसे बाहरी संकेतों से प्रभावित होती है ।

उन्होंने कहा कि अगर आपका सेट रूटीन है, जैसे– यदि आप ब्रश करते हैं और फिर पुस्तक पढ़ते हैं तो आपका शरीर इस रूटीन का आदी हो जाता है और आपके इस रूटीन के अनुसार ही आपको सोने की आवश्यकता महसूस होने लगती है ।एजेन्सी

आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.

Leave a Reply

avatar
  Subscribe  
Notify of